हफ़्ते में सिर्फ़ दो-चार घंटे कसरत बदल सकती है आपकी ज़िंदगी, बस तरीका जान लीजिए

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- Author, पीटर स्वोबोडा
एक हफ़्ते में कितनी कसरत करनी चाहिए? कई लोग इस बात से परेशान रहते हैं कि वो पर्याप्त कसरत नहीं कर पाते.
मगर, रिसर्च बताती है कि कम कसरत का असर भी अच्छा-ख़ासा होता है .
दरअसल इसमें कोई शक ही नहीं है कि कसरत आपके दिल के लिए अच्छी होती है. नियमित तौर पर की जा रही कसरत से आपका ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल कम होता है.
इससे आपको हार्ट अटैक या स्ट्रोक आने की आशंका कम हो जाती है.
मगर, कई बार कसरत करने के लिए समय निकालना मुश्किल हो जाता है.
क्या ऐसे हालात में कम कसरत से काम चलाया जा सकता है?

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तो इसका ज़वाब इस बात पर निर्भर है कि आप शुरुआत करने के लिए कितने स्वस्थ हैं.
क्योंकि फ़िटनेस के मामले में आप शुरुआती दौर में जितने कम स्तर पर होंगे, आपको उतने ही कम प्रयास से फ़ायदा देखने को मिलेगा.
अगर आप उन लोगों में से हैं, जो पूरे समय बैठे रहते हैं, तो थोड़ी सी कसरत भी आपके लिए दिल संबंधी रोगों के जोखिम को कम करने का काम कर सकती है.
जैसे, शुरुआत में एक घंटा या सप्ताह में दो बार साइकिल चलाना या फिर तेज़ गति से चलना भी आपके लिए हृदय संबंधी रोगों से होने वाली मौत के जोखिम को 20 फ़ीसदी तक कम कर सकता है.
कसरत का समय

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जैसे-जैसे आप फ़िट होते जाते हैं आप ज्यादा कसरत करने लगते हैं. लेकिन ऐसा करने पर आपके दिल की सेहत को होने वाले फ़ायदे कम हो जाते हैं या फिर स्थिर हो जाते हैं.
सरल शब्दों में इसे ऐसे समझिए कि मानव शरीर में ब्लड प्रेशर कम होना चाहिए. लेकिन अगर वो सामान्य से कम हो जाए तो मुश्किल खड़ी कर सकता है.
अधिकतर समय बैठे रहने वाला कोई व्यक्ति अगर थोड़े समय के लिए कसरत करना शुरू कर देता है, तो उसमें दिल से संबंधित रोगों का जोखिम घट जाता है.
अगर सप्ताह भर में की जाने वाली कसरत की अवधि चार घंटे बढ़ा भी दी जाए तो दस फ़ीसदी ख़तरा और कम हो जाएगा.
मगर, सप्ताह में चार से छह घंटे की कसरत करने वालों को जितना फ़ायदा मिलता है वो अधिकतम है.
इससे ज़्यादा कसरत करने पर कोई अतिरिक्त लाभ नहीं होता है.
ये एक अध्ययन में पता चला है. ये अध्ययन उन लोगों पर केंद्रित था, जिन्हें मैराथन जैसे किसी इवेंट को पूरा करने के लिए ट्रेन किया गया है.
इस दौरान यह देखा गया कि जिन लोगों सप्ताह में सात से नौ घंटे तक कसरत की, उनके दिल की सेहत में उल्लेखनीय बदलाव आया.
यह बदलाव उतना ही था जितना किसी चार से छह घंटे कसरत करने वाले व्यक्ति के साथ होता. यानी कम कसरत करने व्यक्ति को भी दिल से संबंधित रोगों के जोखिम का ख़तरा कम होता.
इस दौरान न सिर्फ़ प्रतिभागियों के दिल की मांसपेशियों की मात्रा बढ़ी बल्कि उनके कार्डियक चैंबर का फ़ैलाव भी हुआ. यानी उनके दिल की सेहत पहले से और बेहतर हो गई.
दिखता है बदलाव

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दरअसल आपका दिल भी शरीर की बाकी मांसपेशियों जैसा है. अगर आप ढंग से कसरत करें तो तीन महीने में आपको बदलाव दिखने लगते हैं.
लेकिन ज़रूरत से ज्यादा कसरत से दिल की सेहत को कोई अतिरिक्त लाभ नहीं होता.
पहले ये सोच ये थी कि सिर्फ़ बड़े एथलीट दिल की सेहत में इतना सुधार कर सकते हैं.
ये अध्ययन साबित करता है कि अगर हम कम कसरत करें तब भी हम अपना दिल एक एथलीट की तरह फिट रख सकते हैं.
जब आप दिल की सेहत में सुधार लाने के मकसद से सप्ताह में एक या दो घंटे कसरत करना शुरू करते हैं तो आपके सामने कुछ अविश्वसनीय और अप्रत्याशित नतीजे आते हैं.
सप्ताह में चार घंटे कसरत करना भी एक बेहतर विकल्प है, जो आपके दिल संबंधित रोगों के जोखिम को कम करने में मदद करता है.
व्यायाम और आराम

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बिल्कुल कसरत न करने की तुलना में, हफ़्ते में चार घंटे कसरत करना शुरुआत में चुनौती हो सकता है.
लेकिन आप दिल संबंधित रोगों का जोखिम कम करना चाहते हैं, तो आपको पसीना बहाना होगा.
हाई इंटेन्सिटी इंटरवल ट्रेनिंग (हिट) एक ऐसा ही वक्त बचाने का तरीका है. कसरत के इस तरीके से आपको कम समय में प्रभावी परिणाम मिलते हैं.
हिट आमतौर पर 20 मिनट की कसरत होती है.
इसमें आप 30 से 60 सेकेंड तक कसरत करते हैं और फिर कुछ मिनट आराम करते हैं.
ये छोटी-छोटी कसरतें, जब आप कई सप्ताह तक करते हैं, तो आपको इसका असर साफ़ दिखने लगता है. इस तरीके से कसरत करने से आपका ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण में आ सकता है.
लेकिन हाई इंटेन्सिटी इंटरवल ट्रेनिंग पर किए गए अध्ययन फ़िलहाल छोटे सैंपलों पर आधारित हैं. इसलिए इससे होने वाले लाभ की तस्वीर इतनी सटीक नहीं है.
ऐसे लोग बरतें सावधानी

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अगर आपको दिल संबंधित कोई बीमारी है तो आपको सावधानी बरतने की ज़रूरत है.
ऐसी कई स्थितियां हैं.
अगर आप कार्डियोमायोपैथी (दिल की मांसपेशियों की बीमारी), इस्केमिक हार्ट डिज़िज (दिल की धमनियों का सिकुड़ना) और मायोकार्डिटिस (दिल में सूजन) जैसी दिक्कतों से परेशान हैं तो आपको ज़्यादा कसरत की सलाह नहीं दी जाती है.
अगर आपको सप्ताह भर में कसरत के लिए समय निकालने में मुश्किल आ रही है, और आप केवल सप्ताह के अंत में कसरत कर सकते हैं, तो यह भी आपके लिए फ़ायदेमंद हैं.
इस संबंध में 37 हज़ार से ज़्यादा लोगों पर एक अध्ययन किया गया.
ये वो लोग थे, जो पूरे सप्ताह कसरत नहीं कर पाए. इन लोगों ने केवल सप्ताह के आख़िर में एक या दो दिन कसरत की.
इनको भी दिल से संबंधित रोगों का जोखिम उतना ही कम था, जितना सप्ताह भर कसरत करने वाले लोगों के लिए था.
उनको भी इस वीकेंड कसरत का लाभ हुआ.
इसलिए, जो लोग खुद को आलसी समझते हैं मगर अपने दिल की सेहत को सुधारना चाहते हैं उनके लिए संदेश साफ़ है कि थोड़ी कसरत भी, एक बड़ा बदलाव ला सकती है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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