भारत आईं ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री खालिस्तान समर्थक प्रदर्शनों पर खुलकर बोलीं- प्रेस रिव्यू

ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग

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ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग ने कहा है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच 'महत्वपूर्ण रिश्ते' हैं और वे आपस में 'ख़ालिस्तानी अलगाववादियों के प्रदर्शनों' और 'भारत-कनाडा के बीच आए तनाव' जैसे संवेदनशील विषयों पर खुलकर बात कर सकते हैं.

भारत के साथ द्विपक्षीय वार्ता टू प्लस टू के लिए ऑस्ट्रेलियाई उप प्रधानमंत्री रिचर्ड मार्ल्स के साथ दिल्ली आईं विदेश मंत्री वोंग ने अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू को दिए इंटरव्यू में यह बात कही.

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया में मौजूद भारतीय मूल के अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर दो बार खुलकर चिंता ज़ाहिर की है.

इस बारे में वोंग ने कहा, "हमारे यहाँ बड़ी संख्या में भारतीय मौजूद हैं और विदेशी नागरिकों की दूसरी बड़ी संख्या भारतीयों की ही है. हमारे लिए हमारा बहु-सांस्कृतिक चरित्र बहुत मायने रखता है. हर दूसरा ऑस्ट्रेलियाई या तो विदेश में पैदा हुआ है या फिर उसके माता-पिता विदेश में पैदा हुए थे और मैं भी उनमें से एक हूं."

वोंग ने कहा, "हम अपने लोकतंत्र की भी रक्षा करते हैं, इसलिए मानते हैं कि लोगों को असहमत होने का भी अधिकार है. उन्हें शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करने और अभिव्यक्ति की भी स्वतंत्रता है. हमने इन विषयों पर साफ़ किया है कि हम तोड़फोड़ और हिंसा स्वीकार नहीं करते. यह हमारे क़ानून और सिद्धांतों के ख़िलाफ़ है."

अख़बार के मुताबिक़, जब वोंग से पूछा गया कि क्या ऑस्ट्रेलिया ने भारत के कहने पर अपने यहां कुछ समूहों, जैसे कि ख़ालिस्तानी अलगाववादियों को लेकर कोई क़दम उठाए हैं, तो उन्होंने कहा, "इस संबंध में मैं कहना चाहूंगी कि हम आपकी संप्रभुता का सम्मान करते हैं और हमें शांतिपूर्ण प्रदर्शनों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और हिंसा व तोड़फोड़ के बीच का महीन फ़र्क़ मालूम है."

निज्जर

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इमेज कैप्शन, कनाडा के प्रधानमंत्री ने सिख अलगाववादी नेता निज्जर की हत्या के लिए भारत पर आरोप लगाया था, जिसके बाद दोनों देशों के संबंधों में खटास आ गई थी.

कनाडा में खालिस्तान समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद भारत और कनाडा के संबंधों में आए तनाव को लेकर पूछे गए सवाल पर वोन्ग ने कहा, "हमें मालूम है कि यह भारत के लिए संवेदनशील विषय है. इस बारे में हमारे बीच अच्छी बातचीत हुई है और हम ऐसी स्थिति में हैं कि हम दोंनों (देशों) को पता है कि इन मसलों पर हमारा रुख़ क्या है."

इस मामले में ऑस्ट्रेलिया ने कहा था कि भारत को निज्जर की हत्या की जांच में सहयोग करना चाहिए. इस रुख़ पर वोन्ग ने कहा कि 'ऑस्ट्रेलिया का दोनों देशों की संप्रभुता को लेकर स्पष्ट सैद्धांतिक विचार हैं.'

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उन्होंने कहा, "हम नियमों का सम्मान करते हैं, इसीलिए हमने इन्हीं सिद्धांतों को मानने वाले अपने भारतीय मित्रों को अपने विचारों से अवगत करवाया है."

"मैं इस विषय पर नहीं जाना चाहती कि अंतरराष्ट्रीय नियमों या कानूनों का उल्लंघन हुआ या नहीं, लेकिन इतना कहूंगी कि हम संप्रभुता और क़ानूनों के आधार पर ही अपने भारतीय समकक्षों से बात कते हैं."

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रणनीतिक, सैन्य और समुद्री साझीदारी बढ़ी है. वोंग ने इस दिशा में सहयोग और बढ़ाने की बात की.

उन्होने कहा, "हमें मालाबार अभ्यास की मेज़बानी करने की ख़ुशी है. भारतीय पनडुब्बी का ऑस्ट्रेलिया आना भी ख़ुशी की बात है. यह इस तरह की पहली यात्रा थी."

ऑस्ट्रेलिया द्वारा हमास के हमले की निंदा करने, मगर इसराइल से युद्धविराम की अपील न करने को लेकर जुड़े सवाल के जवाब में विदेश मंत्री ने कहा, "मुझे लगता है कि ऑस्ट्रेलिया का रुख़ सैद्धांतिक है. हमने कहा कि ये (हमास के) हमले आम लोगों पर किए गए आतंकवादी हमले हैं. इसराइल ने इस मामले में अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए क़दम उठाए हैं."

वोंग ने कहा, "हमने शुरू से कहा है कि अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का पालन होना चाहिए. हमने मानवीय पॉज़ (जंग में अस्थायी ठहराव) का समर्थन किया है. हम सभी चाहते हैं कि युद्धविराम हो, लेकिन यह एकतरफ़ा नहीं हो सकता. हम जानते हैं कि हमास क्या कर रहा है. उसके पास बंधक हैं और वह इसराइल पर हमले कर रहा है. मैं कहूंगी कि ग़ज़ा में मानवीय अपदा आन खड़ी हुई है."

इसराइल हमास जंग पर ब्रिक्स की वर्चुअल बैठक

ब्रिक्स

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इसराइल-ग़ज़ा युद्ध पर ब्रिक्स देशों के एक वर्चुअल सम्मेलन का आयोजन होने जा रहा है. इस सम्मेलन की मेज़बानी दक्षिण अफ़्रीका करेगा.

द हिंदू में छपी ख़बर के अनुसार, दक्षिण अफ़्रीका और रूस ने जानकारी दी है कि मंगलवार को यह सम्मेलन होगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी इस बैठक में शिरकत करेंगे.

ब्रिक्स, उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों- ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ़्रीका का एक समूह है.

इस बैठक में सऊदी अरब, अर्जेंटीना, मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात भी शामिल होंगे, जो अगले साल जनवरी में ब्रिक्स से जुड़ने वाले हैं.

दक्षिण अफ़्रीका के राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी इस बैठक में जुड़ेंगे.

इस वर्चुअल बैठक में पांचों सदस्य देशों के राष्ट्रप्रमुख शामिल होंगे और उसके बाद ग़ज़ा के हालात पर एक संयुक्त बयान जारी किया जा सकता है.

वन नेशन, वन इलेक्शन से केंद्र की सत्ताधारी पार्टी को लाभ- कोविंद

राम नाथ कोविंद

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पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने कहा है कि 'वन नेशन, वन इलेक्शन' लागू होने का केंद्र की सत्ताधारी पार्टी को फ़ायदा मिलेगा.

हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के अनुसार, 'वन नेशन, वन इलेक्शन' के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति के अध्यक्ष राम नाथ कोविंद ने रायबरेली में पत्रकारों से बात करते हुए यह बात कही.

उन्होंने कहा कि केंद्र में जो भी सत्ताधारी पार्टी होगी, चाहे बीजेपी हो या कांग्रेस या कोई और, उसे इसका सीधा फ़ायदा मिलेगा.

कोविंद का कहना था कि इससे जनता को सबसे ज़्यादा लाभ होगा, क्योंकि करोड़ों रुपये बचेंगे, जिन्हें विकास कार्यों में खर्च किया जा सकता है.

कोविंद ने बताया कि इस विषय पर बनी समिति जल्द ही सरकार को सुझाव देगी कि कैसे इस व्यवस्था को लागू किया जा सकता है.

उन्होंने कहा, "इस बारे में सभी दलों से संपर्क करके सुझाव मांगे गए हैं और कई दलों ने इसका समर्थन भी किया है. हम सभी से आग्रह कर रहे हैं कि इस मुद्दे को लेकर सहयोग दें क्योंकि यह देशहित में है."

जजों के तबादलों में देरी से सुप्रीम कोर्ट केंद्र से नाख़ुश

सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट न्यायाधीशों के स्थानांतरण के लिए कलीजियम की सिफ़ारिश को मंज़ूरी देने को लेकर केंद्र के रवैये पर नाख़ुशी जताई है. कोर्ट ने कहा कि यह मनमाफ़िक ढंग से चयन करना है और इससे अच्छा संदेश नहीं जाता.

जनसत्ता में छपी ख़बर के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कलीजियम ने जिन 11 जजों के तबादले की सिफ़ारिश की है, उनमें से पांच का तो ट्रांसफ़र कर दिया गया, मगर छह का रुका हुआ है. इनमें चार जज गुजरात हाई कोर्ट के हैं, एक-एक इलाहाबाद और दिल्ली हाई कोर्ट के.

जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस सुधांशु धूलिया की बेंच ने कहा कि हाई कोर्टों में जजों के लिए जिन नामों की सिफ़ारिश हाल ही में की गई थी, उनमें से आठ को मंज़ूरी नहीं दी गई है. इनमें से कुछ जज तो उन जजों से वरिष्ठ हैं, जिन्हें नियुक्ति दी जा चुकी है.

यह बेंच दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी. एक में नियुक्ति और तबादले के लिए कलीजियम की सिफ़ारिश वाले नामों को केंद्र से मंज़ूरी मिलने में देरी करने का आरोप था.

पन्नू के ख़िलाफ़ एनआईए ने दर्ज किया मामला

सिख फ़ॉर जस्टिस के नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू के ख़िलाफ़ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने एक नया मामला दर्ज किया है.

सिख फ़ॉर जस्टिस अमेरिका स्थित एक ग्रुप है, जिसे भारत सरकार ने 10 जुलाई, 2019 को गै़रक़ानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत प्रतिबंधित कर दिया था. भारत का कहना है कि इस संगठन का एजेंडा अलगाववादी है.

द हिंदू की ख़बर के अनुसार, नया मामला एयर इंडिया की उड़ानें बंद करने की धमकी से जुड़ा है.

गुरपतवंत सिंह पन्नू ने एक वीडियो में19 नवंबर को एयर इंडिया की उड़ानें बंद करने की धमकी दी थी, जिसके बाद दिल्ली और पंजाब के एयरपोर्ट्स पर सुरक्षा के इंतज़ाम और बढ़ा दिए गए थे.

वीडियो में पन्नू ने सिख समुदाय के लोगों से 19 नवंबर को एयर इंडिया के विमानों से यात्रा न करने की सलाह देते हुए कहा था कि 'ऐसा करके वे अपनी जान ख़तरे में डाल सकते हैं.'

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