फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप 2022: क्रिकेट के दीवाने भारत में कैसे चढ़ रहा है फ़ुटबॉल का बुख़ार

इमेज स्रोत, ARUN CHANDRA BOSE
- Author, अशरफ़ पडन्ना
- पदनाम, त्रिवेंद्रम से, बीबीसी के लिए
इस सप्ताह, हाशिर अली और उनके 11 दोस्त दक्षिणी भारतीय राज्य केरल के कोझीकोड शहर से क़तर की राजधानी दोहा तक की लंबी यात्रा करेंगे.
55 वर्षीय अली सिविल इंजीनियर हैं और फ़ुटबॉल के दीवाने हैं. वो और उनके दोस्त दोहा जा रहे हैं जहां वो लाइव मैच देखने के लिए दस दिनों तक रहेंगे.
अली ने छह महीने पहले ही एक दोस्त के ज़रिए वर्ल्ड कप के टिकट ख़रीद लिए थे और वो तब से ही इस ‘बड़े मौक़े’ का इंतेज़ार कर रहे थे.
वो भारत के ऐसे कई फ़ुटबॉल प्रसंशकों में से एक हैं जो फ़ुटबॉल में शामिल होने को लेकर अतिउत्साहित हैं.
केरल के अलावा पूर्वी भारत के पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में और महाराष्ट्र के कोल्हापुर में बड़ी तादाद में फ़ुटबॉल प्रसंशक हैं.
दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी भारत में रहती है, बावजूद इसके बहुत से लोगों को लगता है कि दुनिया के सबसे चर्चित खेल फ़ुटबॉल की दुनिया में भारत का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है.
भारत की राष्ट्रीय फ़ुटबॉल टीम फ़ीफ़ा की रैकिंग में 106वे नंबर पर है.
हालांकि भारत ने साल 1950 में वर्ल्ड कप के लिए क्वॉलिफाई किया था लेकिन भारत कभी भी वर्ल्ड कप में खेला नहीं है.
भारत के विश्व कप में हिस्सा ना लेने की एक वजह ये भी थी कि आमतौर पर नंगे पैर खेलने वाली भारतीय टीम को फ़ुटबॉल जूते पहनने पड़ते.
लेकिन जब भी विश्व कप होता है, भारत के फ़ुटबॉल प्रेमी अपनी दीवानगी और अपनी पसंदीदा टीमों के प्रति सम्मान को ज़ाहिर करने के लिए कुछ ना कुछ ज़रूर करते हैं.
वो मैच देखने जाने के लिए महीनों तक पैसों की बचत करते हैं, अपनी पसंदीदा टीमों की जर्सी पहनकर उनके नाम से मॉक मैच खेलते हैं, विजेता कौन होगा इसका अनुमान लगाते हैं और अपनी पसंदीदा टीमों की जीत पर जश्न मनाते हैं.

इमेज स्रोत, ARUN CHANDRA BOSE
हाल ही में लियोनेल मेसी के समर्थकों ने कोझीकोड की एक नदी में उनका तीस फुट ऊंचा कट-आउट खड़ा किया. जल्द ही इसके पास क्रिस्टियानो रोनाल्डो और नेमार के प्रशंसकों ने भी उनके कट-आउट खड़े कर दिए.
नदी किनारे लगे इन आकर्षक कट-आउट को ज़बरदस्त मीडिया कवरेज मिली और फ़ीफ़ा ने भी इस बारे में ट्वीट किया.
केरल में रहने वाले बहुत से लोगों के लिए क़तर दूसरा घर भी हैं. केरल के हज़ारों लोग वहां नौकरी करते हैं या अपना कारोबार करते हैं.
इनमें से कई लोगों ने वर्ल्ड कप के लिए स्टेडियम बनाने वाली कंपनियों के लिए भी काम किया है.
अपनी फ़्लाइट पकड़ने की तैयारी कर रहे अली बीबीसी से कहते हैं, “अपने पसंदीदा खिलाड़ियों को एक्शन में देखना मेरे लिए सपना पूरा होने जैसा है.”
अपनी यात्रा के लिए ज़रूरी चीज़ों के अलावा अली ने केरल की पारंपरिक नाव धाव के लघु स्वरूप भी साथ रखे हैं. वो यादगार के तौर पर अपने पसंदीदा खिलाड़ियों को इन्हें पेश करना चाहते हैं.
धाव यानी पाल वाली नाव, जिसे केरल में उरू भी कहा जाता है, के अस्तित्व की जड़े भारत के प्राचीन समुद्री कारोबार से जुड़ती हैं.
कोझीकोड के प्राचीन बंदरगाह क़स्बे बेयपोर के कारीगर सदियों से धाव बनाते रहे हैं और उनकी बनाई लग्ज़री धाव क़तर के रईसों में खासी लोकप्रीय हैं.
बेयपोर के पारंपरिक नाव निर्माताओं की बनाई गई एक हज़ार मिनिएचर धाव को क़तर में वर्ल्ड कप की निशानी के तौर पर बिक्री के लिए क़तर भेजा गया है. यहीं नहीं एक अपने सटीक आकार की धाव को क़तर में प्रदर्शित भी किया गया है.

इमेज स्रोत, ARUN CHANDRA BOSE
अली आयोजकों के लिए भी तोहफ़े लेकर जा रहे हैं. वो एक ख़ास धाव लेकर जा रहे हैं जिसके मस्तूल पर वर्ल्ड कप में हिस्सा ले रहे देशों के फूल बने हुए हैं.
इस कलाकृति को बनाने वाली कलाकार मेघना उन्नीकृष्णनन ने बीबीसी को बताया, “हमने इस पर सभी आठ स्टेडियमों और हिस्सा ले रहे देशों के झंडे बनाए हैं. इसके अलावा अन्य प्रतीकों को भी जगह दी है.”
वो बताती हैं कि उन्हें इस धाव को बनाने में एक महीने का समय लगा है. इसे टीकवुड से बनाया गया है और मेघना के अलावा तीन और कलाकारों ने इस पर काम किया है.
अली माराडोना के बाद अब लियोनेल मेस्सी के प्रसंशक हैं और वो पहली बार लाइव मैच देखने जा रहे हैं.
वो कहते हैं, “अल्लाह का शुक्र है कि इस बार वर्ल्ड कप यहां (क़तर) में हो रहा है और सभी आठों स्टेडियम एक दूसरे के दस किलोमीटर के दायरे में ही हैं. अगर ऐसा ना होता तो मैं वर्ल्ड कप देखने के बारे में सपने में भी नहीं सोच पाता”
वो कहते हैं कि वो चाहते थे कि और अधिक दिन क़तर में रूकें और बाक़ी मैच देखें लेकिन ये सब बहुत ख़र्चीला होगा और इससे उनका काम भी प्रभावित होगा.
पिछले सप्ताह जब इंग्लैंड की टीम क़तर पहुंची तो भारत के प्रसंशकों ने ढोल बजाकर और नारे लगाकर उसका स्वागत किया था.

इमेज स्रोत, HASHIR ALI / GUDAM ART GALLERY
केरल के टीवी नेटवर्क भी दूसरे देशों की टीमों के स्थानीय प्रसंशकों को जश्न को जगह देते हैं. यहां प्रसंशक अपनी पसंदीदा टीमों का झंडा थामे हुए और उनकी जर्सियां पहने हुए जश्न मनाते हैं.
अली कहते हैं, “फ़ुटबॉल हमारे ख़ून में है और हम हर मैच को जश्न में बदल देते हैं. किसी एक टीम के प्रति स्थायी वफ़ादारी नहीं है.”
पास के ही मल्लापुरम ज़िले में वर्ल्ड कप की दीवानगी छह महीने पहले ही शुरू हो गई थी. यहां प्रमुख स्थानीय टीमों के बीच सात मुक़ाबले खेले गए.
खिलाड़ियों ने अपनी पसंदीदा टीमों- फ़्रांस, इंग्लैंड, अर्जेंटीना, ब्राज़ील, हॉलैंड, जर्मनी और पुर्तगाल की जर्सियां पहनीं थीं.

इमेज स्रोत, Getty Images
मल्लापुरम के फ़ुटबॉल खिलाड़ी अब्दुल नज़र भी अगले महीने दोहा जाने की तैयारी कर रहे हैं.
उनके साथ, उनके गांव के 25 अन्य फ़ुटबॉल प्रसंशक भी अपनी-अपनी पसंदीदा टीमों का हौसला बढ़ाने के लिए जा रहे हैं. उन्होंने बजाने के लिए ढोल और लहराने के लिए झंडे जुटा लिए हैं.
नज़र कहते हैं, “हमारे बीच सभी प्रमुख टीमों के प्रसंशक हैं, हालांकि सबसे ज़्यादा लोग अर्जेंटीना और ब्राज़ील को पसंद करते हैं.”
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)












