'मदहोश' कर देने वाले ब्राज़ील के व्यंजन

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- Author, जेनेट फ़ोरमैन
- पदनाम, बीबीसी ट्रैवल
शेफ़ और शोधकर्ता हैरान हैं. दक्षिण अमरीका की जादुई गुणों वाली कुछ वनस्पतियों के बारे में उन्होंने जो कहानियां सुनी थीं वे सच साबित हुई हैं.
मिसाल के लिए, घास जैसी स्वाद वाली जाम्बू मदहोश कर देती है. पारंपरिक रसोइये इसे बतख के साथ पकाते हैं.
देसी और अमेज़न की खाद्य सामग्रियों का अध्ययन करने वाले पाओलो मार्टिन्स संस्थान की प्रमुख जोआन्ना मार्टिन्स कहती हैं, "इससे आप झूम जाते हैं."
वैज्ञानिक अब टूथपेस्ट, दवाइयों और कामुक प्रसाधनों में इसके इस्तेमाल का पता लगा रहे हैं.
क्रेजिरु बेल की पत्तियां चाय और बॉडी पेंट की तरह इस्तेमाल की जाती हैं. कृषि वैज्ञानिक कीला मालवेज़्ज़ी दा सिल्वा लौह खनिज को पचाने की क्षमता बढ़ाने की इसकी खूबी देखकर दंग हैं.
कई शेफ़ कैक्टस परिवार के पौधे ओरा-प्रो-नोबिस की खूबियों से हैरान हैं, जिसमें 25 फ़ीसदी प्रोटीन होता है और विटामिन सी की मात्रा संतरे से चार गुना ज़्यादा होती है.
शेफ़ एलेक्स एटला कहते हैं, "देसी समुदायों को जंगल के बारे में अथाह जानकारी है. उतनी समझ के बारे में हमने सपने में भी नहीं सोचा है."
एटला पूर्व पंक-रॉकर हैं और ब्राजील की देसी सामग्रियों के बारे में अपने अध्ययन के लिए जाने जाते हैं. उनके रेस्तरां डी.ओ.एम. को दो मिशेलिन स्टार मिले हैं.

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साओ पोलो में उनके रेस्तरां के डाइनिंग रूम में कांच के टेबल टॉप पेड़ों के तने पर टिके हुए हैं. अंदर फ्रेंच शेफ़ अगस्टे एस्कॉफ़ियर की किताबों और एल्विस के एल्बम से सजावट की गई है.
यहां के मेहमान सूट, टी-शर्ट, मोती और टैटू वाले हैं. पहली नज़र में ही लगता है कि यहां कुछ भी मामूली नहीं है.
अमेज़न का जायका
बिना डंक वाली मधुमक्खियों के शहद के साथ पकाए गए कूबड़ वाले ज़ेबू बीफ़ का व्यंजन केविशे इतना मुलायम है कि उसे चम्मच के साथ परोसा जाता है.
केविशे के बाद मेरी थाली में मीठा रखा गया, जिसके साथ चींटियां थीं. मैं आंखें बंद करके ज़िंदा चींटी को निगल लिया.
गले में उनके पैरों की सरसराहट महसूस होने के तुरंत बाद मेरे मुंह में नींबू और अदरक का जायका भर गया. ब्राजील में पाक कला की मेरी यात्रा शुरू हो चुकी थी.
ब्राजील एक विशाल और उपजाऊ देश है. इसके 85 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के दूरदराज के हिस्सों में सिर्फ़ देसी आदिवासी समुदाय रहते हैं या फिर वहां पूर्व अफ्रीकी गुलामों की बस्तियां (किलोम्बो) हैं.
माना जाता है कि ब्राजील में धरती की 20 फ़ीसदी प्रजातियां हैं, जो खान-पान समुदाय को ज़्यादा से ज़्यादा सीखने के लिए प्रेरित करती हैं.
दुनिया के सबसे अग्रणी शेफ़ में से एक माने जाने वाले शेफ़ फ़ेरन एड्रिया के लिए अमेज़न 'पाक-कला का आख़िरी मुकाम' है.

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खाने को कई ख़तरे
ब्राज़ील की देहाती संस्कृति में रचे-बसे इस खजाने को जंगल की आग से, मवेशियों की चराई से, खनन, वन कटाई और इंसानों की घुसपैठ के दूसरे तरीकों से ख़तरा है. कुछ लोगों को फिक्र है कि प्रसंस्कृत भोजन के प्रसार से देसी व्यंजन ख़तरे में हैं.
शेफ़ इरीन न्यून्स कहती हैं, "फ़ास्ट फ़ूड आंदोलन ने हमारे खाने के तरीके को तहस-नहस कर दिया है और हमें उसे ठीक करना है."
न्यून्स साओ पोलो से कई घंटे दूर पहाड़ी की ओर कैमिन्हो दास गैरेस रेस्तरां चलाती हैं, जहां वह देहाती व्यंजनों में अपना ट्विस्ट देती हैं.
ब्राज़ील के पाक कला विशेषज्ञ लुप्तप्राय उत्पादों और उनको पकाने के कौशल को बचाने में लगे हैं.
2018 के आख़िर में 'स्लो फ़ूड ब्राज़ील' के प्रमुख जॉर्जेस श्नाइडर ने देश की पाक संस्कृति की रक्षा का संकल्प लिया.
यह कुछ वैसा ही है जैसे 2004 में मशहूर डेनिश शेफ़ रेने रेड्ज़ेपी समेत 12 नॉर्डिक शेफ़ ने 'मैनिफेस्टो फ़ॉर दि न्यू नॉर्डिक किचेन' पर दस्तख़त किए थे.
श्नाइडर कहते हैं, "खाना पकाना सिर्फ़ नुस्खा होना नहीं है. यह संस्कृति है, यह टिके रहने की क्षमता है.''
श्नाइडर का घोषणा-पत्र छोटे किसानों को फ़ूड चेन का आधार मानता है और भरोसा देता है कि उनके बच्चे इसी क्षेत्र में रह सकते हैं."
अमेज़न के जंगलों में आग लगी है, इसलिए इस पर तेज़ी से काम करने की ज़रूरत और बढ़ गई है.
एटला के मुताबिक "वनों की कटाई वाले क्षेत्रों में इज़ाफा हुआ है. हमें इस समस्या से जिम्मेदारी से निपटना चाहिए और इस मुद्दे को वैचारिक विवाद में नहीं बदलना चाहिए."

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परंपराओं का संरक्षण
कई शेफ़ देश के अंदरूनी इलाकों में बहुत अंदर तक जाते हैं. वे देसी वनस्पतियों को ढूंढ़ते हैं और उनका संरक्षण करते हैं.
अपने रेस्तरां के व्यंजनों में उन सामग्रियों का इस्तेमाल करके वे नये जायके तैयार करते हैं. इस तरह वे स्थानीय उत्पादकों का समर्थन भी करते हैं.
मॉडल से शेफ़ बनीं हेलेना रिज़्ज़ो साओ पोलो में मिशेलिन स्टार रेस्तरां मनि चलाती हैं.
वह स्थानीय सामग्रियों, जैसे- मैनिओक (कसावा) से ऐसे डिश बनाती हैं जिनको चखने के लिए उनके कद्रदान घंटों इंतज़ार करने को तैयार रहते हैं.
रिज़्ज़ो को यह अज़ीब लगता है कि दुनिया के 90 फीसदी व्यंजन मक्का, चावल और गेहूं जैसे कुछ ही वनस्पतियों से बनते हैं.
"अरारोट और मैंगरिटो (जिमीकंद की प्रजाति) न केवल अहम सामग्रियां हैं, बल्कि ये संस्कृति और खानपान की विविधता के लिए भी महत्वपूर्ण हैं."
"हम अब भी उन्हें ढूंढ़ सकते हैं और उनको पका सकते हैं लेकिन मुझे नहीं पता कि कब तक. कई सामग्रियों को हम पहले ही खो चुके हैं."

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मैनिओक की अहमियत
ब्राज़ील के कई फ़ूड एक्सपर्ट मानते हैं कि मैनिओक देश के व्यंजनों का आधार है, जिसे कई नामों से जाना जाता है जैसे मनि, मनिवा, आईपिम, मैंडिओका, मैकेक्सेरा वगैरह.
इसके अनगिनत सह-उत्पाद हैं, जैसे- टैपिओका, पोल्विलोस (टैपिओका आटा), टुकुपी (पीली चटनी) और टिकिरा (मादक पेय). ये इसके सर्वव्यापक होने के सबूत हैं.
मैनिओक अभी लुप्त होने की कगार पर नहीं है फिर भी यह ब्राज़ीली व्यंजनों के लिए इतना अहम है कि संकल्प में इसे 'पैतृक और देसी संस्कृति का असाधारण उत्पाद' कहा गया है.
एटला कहते हैं, "यह ऐसी सामग्री है जो सभी सामाजिक वर्गों में हमेशा मौजूद रही है."
"हम इसे छीलते हैं, घिसते हैं और दबाकर स्टार्च (टैपिओका) निकालते हैं. किण्वन के बाद इसका रस टुकुपी बन जाता है और गूदे से मैनिओक आटा तैयार होता है."
शेफ़ टेरेज़ा पैम का साल्वाडोर रेस्तरां कासा डि टेरेज़ा पारंपरिक भोजन का एक अन्य सुरक्षित ठिकाना है.
वह हाथ से तैयार डेंडे तेल (ताड़ के तेल) का उपयोग करती हैं. गुलाम व्यापार के दौरान पुर्तगाली यह तेल अफ्रीका से लाए थे. टेरेज़ा को लगता है कि यह ऐसी सामग्री है जिसे कभी खोना नहीं चाहिए.
डेंडे तेल की खुशबू और इसका बैंगनी, वाइन-लाल रंग पारंपरिक ब्राज़ील व्यंजनों की पहचान है, ख़ासकर बाहिया प्रांत में.
टेरेज़ा के लिए यह पहली पसंद है. इसके लाल रंग में वह साल्वाडोर की खाड़ी (सभी संतों की खाड़ी) में सूर्यास्त के समय बिखरने वाले रंगों को देखती हैं.
साल्वाडोर में दास युग के समय आयातित भोजन और संस्कृति आज भी जीवित हैं. स्थानीय डेंडे तेल टेरेज़ा हर रोज याद दिलाता है वह अफ़्रीकी वंशज हैं.
मिली-जुली विरासत
ब्राज़ील के लोगों को अपनी बहु-नस्लीय विरासत पर नाज़ है. यहां अफ़्रीका, एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व से आए लोग 200 से अधिक देसी समुदायों के साथ रहते हैं.
देसी समुदायों के भी अपने-अपने क्षेत्र हैं जो अमेज़न के वर्षा वनों से लेकर सेराडो के सवाना और पेंटानल के जलीय क्षेत्र तक फैले हैं.
उनकी पाक कला आपस में घुल-मिलकर आधुनिक ब्राज़ील के व्यंजन तैयार करती है जिनको सम्मान देने, संरक्षित करने और भविष्य में और विकसित करने की वकालत हो रही है.

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जिस तरह ब्राज़ील की आबादी पूरी दुनिया से आई है, उसी तरह यहां की खाद्य सामग्रियां और उनको पकाने की तकनीक भी हर तरफ से आई है.
मिसाल के लिए, गुआंडु के बीज ज़मीन की उर्वरा शक्ति बढ़ाते हैं और फसलों को नाइट्रोजन देते हैं. माल्वेज़्ज़ी डा सिल्वा ने ऐसी कहानियां सुनी हैं कि ये बीज गुलामों के बालों में फंसकर ब्राजील आए थे.
टेरेज़ा पेम के मुताबिक शुरुआती "ब्राजीली" रसोइये पहले पुर्तगाली कुलीन वर्ग की रसोइयों में गुलाम थे. उन्होंने उपलब्ध संसाधनों के हिसाब से पुर्तगाली, अफ़्रीकी और देसी व्यंजनों को अनुकूलित किया.
कुछ व्यंजन इन गुलामों के लिए कूट भाषा बन गए थे, जिन्होंने अफ़्रीकी मूल के संप्रदाय कैंडोम्बले के लिए पवित्र व्यंजन बनाए.
शेफ़ बेल कोएल्हो के मुताबिक उन व्यंजनों की तैयारी इतनी पवित्र मानी जाती है कि उनको सिर्फ़ वे महिलाएं (याबासी) पका सकती हैं जिन्होंने अपना जीवन ओरिक्सा की वरीयताओं को समझने में समर्पित किया है या जो कैंडोम्बले देवी की प्रतिनिधि हैं.
'पवित्रभोजन'
साओ पोलो में कोएल्हो के रेस्तरां क्लैन्डेस्टिनो में इसे चखा जा सकता है, जहां उन्होंने याबासी रसोइयों से प्रेरित होकर अपना ख़ुद का नुस्खा तैयार किया है.
यह रेस्तरां महीने में सिर्फ़ एक हफ्ते के लिए खुलता है और यहां खाने के लिए पहले से आरक्षण कराना पड़ता है. खाने की तारीख एक महीने पहले तय हो जाती है.
साओ पोलो के रेस्तरां एज़ोम की शेफ़ टेल्मा शिराइशी ब्राज़ील में जापानी व्यंजनों की गुडविल एंबेसडर हैं. वह जापान से आए आप्रवासियों के समूह का प्रतिनिधित्व करती हैं.
शिराइशी कहती हैं, "कई दूसरे लोगों की तरह मेरे दादा-दादी कॉफी के बागानों में मजदूर बनकर आए थे. मेरे नज़रिये से यह देश यहां के लोगों और सदियों में यहां आए लोगों की संस्कृतियों के मिलने से बना है."

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रियो डि जेनेरियो से 200 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में गोस्टो कॉम गोस्टो रेस्तरां की शेफ़ मोनिका रंगेल कहती हैं, "जो लोग धन की तलाश में यहां आए थे उन्होंने भी हमें बहुत बहुत बड़ा खजाना दिया है."
रंगेल का मानना है कि हालांकि वे ब्राज़ील के प्राकृतिक संसाधनों का फायदा उठाने आए थे, लेकिन यूरोपीय लोगों ने यहां की जमीन का उपयोग करके इसे समृद्ध किया.
मवेशियों को पालने और पनीर के छोटे कारखाने शुरू करके उन्होंने अपने सांस्कृतिक अवयवों को पारंपरिक ब्राज़ीली खाने से जोड़ दिया.
अपने व्यंजनों के ज़रिये ब्राज़ील ने कई संस्कृतियों और देशों को गले लगाया है. रंगेल कहती हैं, "यह खानाबदोशों की रसोई है, साथ ही दरबार की भी. यहां के शेफ़ प्रयोग करने से नहीं घबराते."
भविष्य के संरक्षण के लिए अतीत को अपनाना
शेफ़ का मानना है कि परंपराओं का सख़्त पालन करने की जगह रचनात्मकता अपनाने से ज़्यादा फायदा होगा.
मनि रेस्तरां में रिज़्ज़ो केले के पत्ते पर मछली पकाने के देसी तरीके से प्रभावित हैं, लेकिन केले के पत्ते की जगह वह अरबी के पत्तों का इस्तेमाल करती हैं, जो मैंगरिटो परिवार का पौधा है.
शिराइसी ने पारंपरिक जापानी अचार में अफ़्रीकी खीरे मैक्सिक्स और गन्ने के रस से तैयार कशाका को मिलाकर उसमें ब्राज़ील का जायका डाल दिया है.
कुछ रसोइये देसी सामग्रियों से अन्य प्रकार के व्यंजन बना रहे हैं जो शायद ही कभी मेन्यू में दिखते हों.
कोएल्हो ने हवा और बिजली की देवी लांसा के लिए बनाए जाने वाले पारंपरिक व्यंजन एकाराजे को नये सिरे से तैयार किया है.
इसके लिए उन्होंने पुरानी सामग्रियों- डेंडे तेल, नारियल का दूध, धनिया, मिर्च और मूंगफली का ही प्रयोग किया, लेकिन उसे तैयार करने में मोलेकुलर गैस्ट्रोनॉमी तकनीक का इस्तेमाल किया.
अपने संस्करण के लिए कोएल्हो ने मटर का पतला सूप तैयार किया, फिर उसमें एल्गीनेट और कैल्शियम साल्ट कैल्सिक मिलाया.
पेम अपने श्रिम्प बोबो डिश में आधुनिक स्वास्थ्य चिंताओं का भी ध्यान रखती हैं. वह मैनिओक और डेंडे तेल का इस्तेमाल करके क्रीमी स्ट्यू तैयार करती हैं जो ग्लूटन और लैक्टोज दोनों से मुक्त है.

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जायके के साथ सेहत का ध्यान
ब्राजील के ये शेफ़ मानते हैं कि पारंपरिक व्यंजनों और उसे पकाने के तरीकों को बचाने और उसे विकसित करने की कोशिशों का असर उनके रेस्तरां की रसोई से बाहर तक होगा.
इस तरह कई शेफ़ स्थानीय समुदायों और उनकी सामग्रियों के समर्थन में भविष्य की योजनाएं बना रहे हैं.
पराटी में बनाना दा टेरा रेस्तरां की शेफ़ एना ब्यूनो ने स्कूल ऑफ़ ईटिंग की स्थापना की है, जहां स्कूली बच्चों को स्वस्थ खानपान और स्थानीय खेती के बारे में शिक्षित किया जाता है.
रंगेल लुप्तप्राय ऐरोकेरिया पेड़ के बीजों को सेलिब्रेट करने के लिए पिन्हाओ फ़ेस्टिवल का आयोजन करती हैं.
पिछले 26 वर्षों में यह फ़ेस्टिवल एक से बढ़कर 42 रेस्तरां तक पहुंच गया है, जिसमें सेलिब्रिटी शेफ़ भी शामिल होते हैं. इस फ़ैस्टिवल ने रियो डि जेनेरियो को पर्यटन केंद्र बनाने में भी मदद की है.
शेफ़ मानु बफ़ारा किसान परिवार की बेटी हैं. वह कहती हैं, "पूर्वजों के खाद्य ज्ञान को संरक्षित करने और उसे साझा करने से हमारे सामने आने वाली कई चुनौतियों का समाधान मिल सकता है."
बफ़ारा अपने पैतृक शहर क्यूरिटिबा में रेस्तरां मनु चलाती हैं. वह कहती हैं, "जो खो गया है उसमें से बहुत कुछ भूल गया है इसलिए हमें अपनी संस्कृति और अपनी जड़ों तक नियमित रूप से जाना चाहिए."
देसी पाक-शास्त्र की जड़ों का सम्मान करते हुए भी ब्राजील के शेफ़ नये व्यंजनों पर जोर दे रहे हैं. वे पुरानी सामग्रियों का नये तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे पूरे देश में नये व्यंजनों की लहर चल पड़ी है.
ब्राज़ील के लोग भोजन के बारे में जिस तरह से बातें करते हैं उसमें यह इंसान की मूलभूत ज़रूरत से कहीं ऊपर की चीज़ लगती है.
मालवेज़्ज़ी दा सिल्वा के शब्दों में, "भोजन प्रकृति के साथ इंसान का बंधन है जिससे हमें यह चेतना होती है कि हम कौन हैं और हमें कहां जाना है."
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