बर्फ़ के नीचे जमे पुरातात्विक अवशेषों को बचाना क्यों ज़रूरी है?

बर्फ के नीचे जमे पुरातात्विक अवशेषों को बचाना क्यों ज़रूरी है?

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    • Author, मैट स्टिर्न
    • पदनाम, बीबीसी ट्रैवल

टेंट की छत से बर्फ़ के क्रिस्टल मेरे चेहरे पर गिरे जिससे मेरी नींद खुल गई. टेंट के बाहर से कुछ आवाज़ें आ रही थीं.

मैंने स्लीपिंग बैग की चेन खोली और उठकर बैठ गया. मैं बाहर से आ रही आवाज़ को सुनने की कोशिश करने लगा.

पास ही कोई झरना था, जहां से पानी गिरने का शोर उठ रहा था. येलोस्टोन नेशनल पार्क के बाहर ऊंचे पहाड़ी मैदान में घोड़े घास चर रहे थे.

उसी समय मैंने सूखी टहनियों के टूटने की आवाज़ सुनी. टेंट से बाहर झांककर मैंने एब्सारोका पहाड़ के नीचे कुहरे से ढंके मैदान को देखा और फिर मेरी नज़र नीचे ज़मीन पर पड़ी.

वहां मिट्टी पर एक बड़े भेड़िए के पैरों के निशान थे, जो मेरे सोने की जगह से बस कुछ ही इंच की दूरी पर थे.

कैंप फ़ायर के दौरान मेरी एक सहकर्मी ने बताया कि चार भेड़ियों का एक झुंड मेरे टेंट के पास कुछ सूंघ रहा था.

चाय की केतली को वापस अंगीठी पर रखते हुए उसने कहा, "पहाड़ केवल सुप्रभात कह रहे थे." दिन की शुरुआत ऐसी थी, आगे एक असाधारण दिन सामने आने वाला था.

अमरीका के रॉकी पहाड़ों पर वैज्ञानिकों के साथ काम करने के 15 सालों के दौरान भालुओं से मेरा आमना-सामना हुआ, मैं जंगल की आग से बचकर निकला, घोड़े के साथ मैंने बाढ़ से उफनती नदी पार की और प्रागैतिहासिक गांवों को खोजा.

लेकिन मैंने कभी नहीं सोचा था कि टेंट के पास भेड़िए का आना भी ख़ुशक़िस्मती हो सकती है.

अवशेष

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पहाड़ों में बिखरी कहानियां

सुबह के सूरज की लाल रोशनी ने पहाड़ी ढलानों को रौशन किया तो मैं सोचने लगा कि आज ये पहाड़ जाने कौन सी पुरानी, जमी हुई कहानी को सामने लाने वाले हैं.

अल्पाइन पुरातत्वविद के रूप में मैं पहाड़ों के बर्फीले परिवेश में आबाद संस्कृतियों का अध्ययन करता हूं.

यहां आने वाले मेहमान अक्सर अल्पाइन के परिवेश को सख़्त और डरावना बताते हैं, लेकिन मैं रॉकी के वायोमिंग में टेटन रेंज की तलहटी में पला-बढ़ा हूं. यह हमेशा मुझे घर जैसा लगता है.

वास्तव में, तीन हज़ार मीटर की ऊंचाई पर ही मैं सबसे बेहतर महसूस करता हूं. फिर भी, जब तक मैंने एक अलग नज़रिये से इन पहाड़ों को तलाशना शुरू नहीं किया, तब तक मुझे अहसास भी नहीं था कि यहां के जंगलों में कुदरत और इंसानों को अनकही कहानियों की तिजोरी है.

किशोरावस्था की गर्मियां मैंने वायोमिंग आने वाले पर्वतारोही दलों के गाइड के रूप में बिताए थे. विंड रिवर रेंज के ऐसे ही एक ट्रिप के दौरान मुझे अपने कैंप के पास तीर का एक फल मिला था.

हमारा टेंट ठीक उसी जगह लगाया गया था जहां 2,000 साल पहले किसी ने शिविर लगाया होगा. मैं हमेशा हैरान होता हूं कि पहाड़ इंसान को हमेशा इतने आकर्षित क्यों करते हैं.

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पुरातत्वविद का नया करियर

कॉलेज में जाने पर मैंने वायोमिंग पहाड़ों के इतिहास पर शोध करने की कोशिश की, लेकिन मुझे आर्कियोलॉजिकल जर्नल में सिर्फ़ एक संदर्भ मिला जो कहता था कि "ऊंचाई वाले क्षेत्र प्रागैतिहासिक लोगों के लिए बहुत कठोर थे."

कई महीनों बाद मुझे पता चला कि वायोमिंग के एक पुरातत्वविद् डॉक्टर रिचर्ड एडम्स ने एक पूरा प्रागैतिहासिक गांव ढूंढ़ निकाला है.

जिस जगह मुझे तीर का फल मिला था, यह गांव उससे कुछ ही मील की दूरी पर था. मैंने उनसे संपर्क किया तो उन्होंने मुझे गांव की खुदाई के प्रोजेक्ट में शामिल होने का न्योता दिया.

एडम्स ने मुझे दिखाया कि पहाड़ों में कई पुराने रहस्य छिपे हुए हैं जो उजागर किए जाने का इंतज़ार कर रहे है. बस वहीं से छिपे हुए अतीत की तलाश का मेरा नया करियर शुरू हो गया.

अब मैं उत्तर अमरीका में प्रागैतिहासिक गांवों का पता लगाने के लिए पुरातात्विक खुदाई से लेकर उपग्रह खोजों तक परियोजनाएं निर्देशित करता हूं.

यह सफर 17 साल की उम्र में किस्मत से हुई एक खोज से शुरू हुआ था.

चूंकि कई पुरातत्वविदों ने यह मान लिया था कि ऊंचे अल्पाइन क्षेत्र प्रागैतिहासिक लोगों के लिए बहुत कठोर थे, इसलिए पहाड़ों पर तलाश ही नहीं हुई थी.

दुनिया भर में जो भी ऊंचे पहाड़ों पर पुरातात्विक खोज कर रहे हैं, उनके लिए ये क्षेत्र रोमांचित करने वाले अनजाने क्षेत्र हैं जिनको समझने की अभी शुरुआत हुई है.

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बर्फ़ के नीचे दबे अवशेष

गर्मियों में मैं और मेरे सहकर्मी अनदेखे गांवों, शिकार के हथियारों, पत्थर के खदानों और 13 हजार साल ईसा पूर्व (माना जाता है कि इंसान तभी पहली बार उत्तर अमरीका पहुंचे थे) से लेकर अब तक जीवन के अन्य सबूतों की तलाश में रॉकी पहाड़ों के बहुत अंदर तक पैदल घूमे.

अन्य पुरातात्विक खोजों से हमारा काम अलग था क्योंकि हमारे सुराग और सबूत ज़रूरी नहीं कि मिट्टी के नीचे दबे हों, कई बार वे बर्फ के अंदर भी फंसे होते हैं.

दुनिया भर की पर्वत श्रृंखलाओं में लोगों ने बर्फीले मैदानों और ग्लेशियरों का इस्तेमाल शिकार करने और भोजन इकट्ठा करने के लिए किया. दुर्गम क्षेत्रों में जाने के लिए पुल की तरह भी उनका इस्तेमाल किया गया.

आधुनिक ट्रेकर्स की तरह ही पुराने हाइकर्स के भी कुछ निजी सामान कभी-कभी गिर जाते थे, जो बर्फ में फंसकर सुरक्षित और संरक्षित हो गए.

हमें पत्थर की पुरानी कलाकृतियां मिलीं, लेकिन उनसे ज़्यादा अहम हैं लकड़ी, चमड़े और अन्य कार्बनिक चीज़ों से बनी तीर की डंडी और सुतली जैसी चीज़ें जो अगर कुदरती फ्रीजर में न दबी होतीं तो नष्ट हो जातीं.

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सबूत खो जाने का ख़तरा

ये दुर्लभ चीज़ें आदिम इंसानों की ज़िंदगी की झलक दिखाती हैं. उनसे प्रवासन के तौर-तरीकों और खानपान से लेकर पर्यावरण और मौसम में आए बदलावों के बारे में भी अनमोल सुराग मिलता है.

खाइयों में जमी बर्फ और ग्लेशियर में वैज्ञानिक सूचनाओं के खजाने छिपे हैं. वे हमेशा के लिए खो जाने के ख़तरे के मुहाने पर हैं.

धरती का तापमान बढ़ रहा है जिससे पहाड़ों की बर्फ अभूतपूर्व तेज़ी से पिघल रही है. उनमें हजारों साल से जमे ये अवशेष बाहर आ रहे हैं और नष्ट हो रहे हैं.

इन पुरातात्विक अवशेषों की तलाश एक रोमांचक अवसर भी है और समय के साथ दौड़ भी.

2007 में मोंटाना स्टेट यूनिवर्सिटी के डॉक्टर क्रेग ली ने उत्तरी वायोमिंग में 3,200 मीटर की ऊंचाई पर एक असामान्य आकार की छड़ी खोजी थी.

करीब से विश्लेषण के बाद ली को लगा कि वह छड़ी वास्तव में एक भाले का डंडा है, जिसे 10,300 साल पहले बनाया गया था.

वह छड़ी अब तक दुनिया में बर्फ के अंदर से मिली सबसे पुरानी शिल्प कृति है.

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तीर, टोकरियां और धनुष

ली की खोज ने पूरे रॉकी पहाड़ों में नष्ट होने के ख़तरे में पड़ी कलाकृतियों की गहन तलाश को प्रेरित किया. पिछले एक दशक से उत्तरी अमरीका के अल्पाइन टुंड्रा में पहले से कहीं ज़्यादा पुरातत्वविद काम में लगे हुए हैं.

उन्होंने 1,300 साल पुराने तीर से लेकर बुनी हुई टोकरियां और लकड़ी के धनुष तक खोजे हैं.

लकड़ी के विश्लेषण से पता चलता है कि प्रागैतिहासिक मनुष्य तीर के लिए कुछ ख़ास प्रजाति के पेड़ों की लकड़ी पसंद करते थे.

जमे हुए पराग-कण ये संकेत देते हैं कि पहले पहाड़ों पर अधिक ऊंचाई तक पेड़ होते थे. गोबर में मिले बीजों से पता चलता है कि अमरीकी बायसन एक समय 3,000 मीटर ऊपर भी रहते थे.

नई जानकारियों का खजाना खुल गया है, लेकिन इसका दरवाजा हमेशा खुला नहीं रहेगा.

दूरदराज के क्षेत्रों में जमी बर्फ की अनगिनत तादाद को देखते हुए, हम कभी भी सभी तक समय से नहीं पहुंच पाएंगे.

इस युग में जबकि कंप्यूटरों और उपग्रहों ने करनी और हेल्मेट की जगह ले ली है, कई खोजकर्ता यह कहने लगे हैं कि खोज करने का समय ख़त्म हो गया है.

लेकिन हमारे अभियान उत्तर अमरीका के आदिम निवासियों के नज़रिये को सामने ला रहे हैं.

चूंकि हम अमरीकी महाद्वीप के पहाड़ों में बहुत अंदर तक जाते हैं, इसलिए वहां तक अपने खाने और उपकरणों को ले जाने के लिए घोड़ों और काउबॉय पर निर्भर करते हैं.

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अवशेषों की रोमांचक कहानी

हमने ऊंची झीलों के किनारे कैंप बनाए. घास के मैदानों से खाने वाले पौधों की कटाई की. खुले में आग जलाकर एल्क या बड़े सींग वाले भेड़ के मांस को भूना और तारों के नीचे खुले आसमान में सोये.

जिन आदिम लोगों का हम अध्ययन कर रहे हैं, उनके नक्शेकदम पर चलने से हमें उनको बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलती है.

हमें नहीं मालूम होता कि बर्फ के किस ढेर में प्रागैतिहासिक चीज़ें मिलेंगी, इसलिए पहाड़ी दर्रों को पार करने और सुराग की तलाश में खाइयों की खाक छानने में हमारे दिन बीतते हैं.

जब हम पिघलती बर्फ के नीचे से किसी पुरातात्विक अवशेष या जानवरों की हड्डियों को खोजते हैं तो उनको सावधानी से समेटते हैं और घोड़ों पर रखकर उनको सुरक्षित भेजते हैं.

संग्रहालय या यूनिवर्सिटी के प्रशीतगृह में भेजने से पहले प्रयोगशाला में उनकी तस्वीरें ली जाती हैं, रेडियो कार्बन विधि से उनकी उम्र निर्धारित होती है और हर अवशेष की प्रजातियों की पहचान की जाती है.

प्रागैतिहासिक पत्थर का कटोरा या 8,000 साल पुराने भाले की नोंक को खोजना हमेशा आनंददायक होता है.

लेकिन उनकी रोमांचक कहानियां प्रयोगशाला में जाने के बाद ही सामने आनी शुरू होती हैं, जैसे कि उस बरतन में क्या खाना पकता होगा या हथियार के लिए पत्थर की खोज में आदिम इंसानों ने कहां तक सफर किया होगा.

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पहाड़ ही ऑफ़िस है

अनगिनत फफोलों, ठंडी शामों और मच्छरों के झुंड के हमलों के बावूजद मैं पहाड़ों को अपना ऑफिस कहने के लिए आभारी हूं.

तराशी गई छड़ी या तोड़ी गई हड्डी की हर खोज मुझे याद दिलाती है कि मैं पहाड़ों और इंसानियत के साझा इतिहास को संरक्षित करने में अपनी छोटी भूमिका निभा रहा हूं.

युवा पर्वतारोही के तौर पर मैंने टेटन की ऊंची चोटियों पर चढ़ने में अनगिनत दिन बिताए हैं. पिछले 15 साल में मैंने सीखा है कि भले ही आप कहीं से परिचित हों या अनजान हों, किसी जगह के बारे में और खोज करने की संभावना हमेशा रहती है.

इस दुनिया की हर जगह अद्भुत है और नई कहानी कहने को तैयार है, यदि हम उसे उजागर करना चाहें.

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