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हैंगओवर का रामबाण इलाज है ये अचारी जूस
- Author, पॉल बेंजामिन ओस्टरलंड
- पदनाम, बीबीसी ट्रैवल
तुर्की के ऐतिहासिक शहर इस्तांबुल की पुरानी, भीड़-भरी गली में एक दुकान है.
इसमें एक बुज़ुर्ग दुकानदार तरह-तरह के रंग-बिरंगे अचार पैक कर रहा था.
वो गोभी, चुकंदर, बेरों और मिर्चों से भरी बड़ी सी बाल्टी में से सब्ज़ियां निकालता. फिर उन्हें वो मसालों से भरे जार में पैक कर देता.
इस बुज़ुर्ग दुकानदार का नाम है, एदेम अल्तुन. 64 बरस के एदेम अपने ख़ानदान में तीसरी पीढ़ी के हैं, जो अचार बेचने का कारोबार कर रही है.
वो अपने बचपन से अचार पैक करने और बेचने का काम करते आ रहे हैं. उनकी दुकान इस्तांबुल के पुराने मुहल्ले कुर्तुलुस मे स्थित है.
हालांकि, उनकी कई शाखाएं शहर के अलग-अलग हिस्सों में हैं. एदेम आज भी उसी तरीक़े से अचार बनाते हैं, जो उन्होंने अपने बुज़ुर्गों से सीखा था.
एदेम कहते हैं कि, "हमारे लिए अचार के बग़ैर खाने का तसव्वुर ही अधूरा है. तुर्की में हर घर की खाने की मेज पर आप को अचार मिलेगा. गर्मियों में अचार कम खाया जाता है. मगर, सर्दी के दिनों में यहां ख़ूब अचार खाते हैं."
लेकिन, आप ये मत सोचिए कि मैं एदेम के पास अचार बनाने का तरीक़ा सीखने के लिए गया था. न ही मैं उनसे अचार ख़रीदने गया था. मेरा उनकी दुकान आने का मक़सद दूसरा था.
असल में पिछली रात को मैंने कुछ ज़्यादा ही शराब पी ली थी. अब मुझे भयंकर सिरदर्द हो रहा था. माना जाता है कि शराब की ख़ुमारी उतारने के लिए अचार का जूस पीना बहुत फ़ायदेमंद होता है. इससे भयंकर से भयंकर सिरदर्द चला जाता है.
मुझे अचार के जूस का एक ग्लास पकड़ाते हुए एदेम कहते हैं कि, 'अचार के जूस में ढेर सारे मिनरल होते हैं.'
जैसे हिंदुस्तान में अचार-चटनी के बग़ैर खाना अधूरा है, ठीक उसी तरह तुर्की के खान-पान में अचार बहुत अहम हैं. तुर्की के लोग कहते हैं कि ज़मीन से जो भी उपजता है, उसका अचार बनाया जा सकता है. तुर्की में अचार को तुर्सू कहते हैं. अचार खाने का चलन तुर्की में ओटोमान साम्राज्य के दौर से शुरू हुआ था. आज भी यहां पर आप को तरह-तरह के अचार मिल जाएंगे. तुर्की के हर इलाक़े में अपना ख़ास अचार भी होता है.
समंदर किनारे सजती है अचार की दुनिया
तुर्की में अचार की अहमियत देखनी हो, तो आप इस्तांबुल शहर के एमिनोनू इलाक़े में चले जाएं. यहां समंदर के किनारे क़तार से लग कश्तियां दिखेंगी. समंदर किनारे ही मछलियां भूनकर बेची और खाती देखी जा सकती हैं. एक ज़माना था, जब पास ही समंदर से पकड़ी गई मछलियां यहां बेची जाती थीं.
मगर, अब इन्हें बाहर से मंगाया जाता है. यहां पर तट से टकराती नावों के शोर के बीच तसल्ली से फिश सैंडविच खाने का तजुर्बा ही अलग है.
इस किनारे पर बहुत से लोग आपको अचार और अचार का जूस बेचते भी दिख जाएंगे. गाजर, पत्ता गोभी और मिर्च के अचार को भुनी मछली के साथ खाने को दिया जाता है.
कुछ देशों में ख़ास चीज़ों का ही अचार बनता है. जैसे खीरा, हेलेपेनो वग़ैरह...लेकिन, तुर्की में आप को बेर से लेकर गाजर, चुकंदर और शलजम के अचार मिल जाएंगे. अचार को तुर्की में खाने का संतुलन बनाने वाला माना जाता है. यहां पर मक्खन में पकाया गया चावल हो या फिर योगर्ट सॉस के साथ तैयार हुआ पास्ता, हर चीज़ के साथ खाने के लिए अचार मिलेगा.
आम तौर पर अचार का जूस, खाने के वक़्त नहीं लिया जाता. लेकिन, शलजम के अचार का जूस लोग खाने के साथ भी ले लेते हैं. इसे लाल गाजर और शलजम के रस से तैयार किया जाता है.
तुर्की के मशहूर शेफ़ सोमर सिवरिगोलू कहते हैं कि, 'तुर्की में अचार की दुकानें बहुत भड़कीली होती हैं, ये तुर्की के रंग-बिरंगे जीवन की झलक दिखाती हैं. आप को तुर्की में खीरे और मिर्च के अचार तो मिलेंगे ही. इसके अलावा हरे बादाम, भरवां बैंगन और अखरोट के अचार भी मिल जाएंगे. अनातोलिया की प्राचीन संस्कृति का हिस्सा रहे हैं अचार. ताज़ा सब्ज़ियों को फ़ौरन पकाने-खाने के बाद बची सब्ज़ियों का अचार डाल दिया जाता था.'
जब मैंने पहली बार अचार का जूस पिया था, तब ज़्यादा पी लेने से मुझे भयंकर सिरदर्द हो रहा था. तब किसी के सुझाव पर मैंने पहली बार चुकंदर के अचार का जूस पिया था. कुछ ही देर में मेरा सिरदर्द ग़ायब हो गया था.
तब से जब भी मुझे हैंगओवर होता है, मैं अचार के जूस की दुकान तलाशता हूं. ये क़ुदरती तो है ही, किसी भी पेनकिलर से सस्ता भी है.
कैसे बनाया जाता है ये अचार
एक बार एमिनोनू इलाक़े की सैर के दौरान मैंने एदेम एल्टुन से थोड़ा तीखा और मसालेदार जूस मांगा. उन्होंने खीरे और चुकंदर के अचार के जूस के साथ मसालेदार मिर्च मिलाकर मुझे पीने को दी. ये नमकीन जूस बेहद मसालेदार था.
एदेम ने बताया कि इस में काला नमक, सिरका और लहसुन मिलाया गया है.
तुर्की में अचार बनाने की विधि को लेकर भी खींच-तान होती आई है. कुछ लोग इसे नींबू के रस से बनाना चाहते हैं, तो किसी की पसंद सिरका है.
1978 में आई फ़िल्म नेसेली गुनलर यानी ख़ुशगवार दिन में एक सीन इसी पर था, जिसमें एक दंपति इस बात पर झगड़ रहा था कि अचार सिरके से बनाया जाए या नींबू के रस से.
इस सीन को इस्तांबुल की मशहूर अचार की दुकान असरी तुर्सुकू के भीतर फि़ल्माया गया था. अचार की ये दुकान 1913 में खुली थी. 1938 से लेकर आज तक ये दुकान इस्तांबुल के चिहांगिर इलाक़े में चल रही है. इसके मालिक बारान गुरेलेर, तीसरी पीढ़ी के अचार कारोबारी हैं. बारान कहते हैं कि वो नींबू के रस से अचार बनाना पसंद करते हैं.
बारान कहते हैं कि, 'हम सिर्फ़ पत्ता गोभी और खीरे का अचार नहीं बनाते. हमारे यहां चेरी, बेर और भिंडी के अचार मिलते हैं. हम ने इन अचारों का तार्रुफ़ नई पीढ़ी से कराया है.'
इसके अलावा भी उनकी दुकान पर दर्जनों क़िस्म के अचार मिलते हैं.
अचारों की महारानी
तुर्की की बेग़म अटाकन स्वयंभू पिकल क्वीन यानी अचारों की महारानी हैं. वो अचार बनाने में तमाम तरह के तजुर्बे करती हैं. फिर इन अचारों की नुमाइश बेग़म अटाकन अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर करती हैं. दुनिया भर में उनके 14 हज़ार से ज़्यादा शैदाई हैं.
बेग़म अटाकन कहती हैं कि, 'आप फर्मेंटेशन यानी किण्वन से बिना सिरके के तरह-तरह के अचार बना सकते हैं. मैं थोड़ा नींबू ज़रूर मिलाती हू, ख़ास तौर से गर्मी के दिनों में डाले जाने वाले अचार में. नींबू से अचारों में ताज़गी आ जाती है.'
बेग़म अटाकन ने अचार बनाने का ये नुस्खा अमरीका में सीखा था. इस्तांबुल में उनकी अचार बनाने की विधियां हर कोई सीखना चाहता है. वो कहती हैं कि तुर्की में अचार बनाने का जो तरीक़ा है, वो ज़्याा अच्छा है. इससे नमकीन, खट्टा और मज़ेदार अचार तैयार होता है.
अब अचार चाहे नींबू से बने या सिरके से, बेग़म अटाकन का नुस्खा हो या एदेम का, ये तुर्की के खान-पान का बुनियादी हिस्सा हैं.
लेकिन, एदेम आगाह करते हैं, 'अचार हर कोई नहीं बना सकता. ऐसा नहीं है कि किसी भी सब्ज़ी या पानी से तैयार हो सकता है.'
अब अचार चाहे जैसे बनाया जाता हो, तुर्की के अचारों का जूस आप को बड़े से बड़े हैंगओवर से निजात दिला सकता है.
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