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स्कॉटलैंड की वो घड़ी जो समय से भी तेज़ चलती है
- Author, माइक मैकइचैरन
- पदनाम, बीबीसी ट्रैवल
घड़ियां हमें सही वक़्त बताने के लिए होती हैं ताकि हम वक़्त पर अपने काम पूरे कर सकें. देर न हो, न ही वक़्त से पहले कोई काम हो. पर, अगर घड़ी ही लेट हो जाए, या तेज़ चले तो?
हमारा तो सारा का सारा शेड्यूल ही बिगड़ जाएगा. समय पर दफ़्तर पहुंच नहीं पाएंगे. काम में देरी होगी या वक़्त से पहले पहुंच जाएंगे.
दुनिया में एक घड़ी ऐसी भी है जो वक़्त की चाल से तेज़ है. ये घड़ी है स्कॉटलैंड की राजधानी एडिनबरा में. यहां के पुराने शहर में स्थित बालमोरल होटल में लगी ये घड़ी हमेशा वक़्त से आगे भागती है.
मज़े की बात ये है कि इस तेज़ी में भी वक़्त की पाबंदी का ख़्याल रखती है ये घड़ी. बालमोरल होटल के घंटाघर में लगी ये घड़ी पूरे तीन मिनट की तेज़ी से चलती रहती है, हमेशा.
यूं तो एडिनबरा शहर गोथिक शैली में बनी अपनी ऐतिहासिक इमारतों और ख़ास स्कॉटिश जीवनशैली के लिए मशहूर है. मगर, यहां की ये घड़ी भी सैलानियों को ख़ूब लुभाती है.
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एडिनबरा की प्रिंसेस स्ट्रीट पर स्थित है बालमोरल होटल और इसी के घंटाघर में लगी ये घड़ी काफ़ी मशहूर है. 58 मीटर ऊंचे घंटाघर को अगर एडिनबरा के काल्टन हिल इलाक़े से देखें तो लगता है कि ये शहर की ख़ूबसूरत इमारतों का हर्फ़े-आख़िर है. वेवरले ट्रेन स्टेशन के ऊपर से झांकती ये घड़ी, डुगाल्ड स्टेवर्ट स्मारक के क़रीब है.
इसे एडिनबरा कासल से देखें तो यूं लगता है कि सदियों पहले इस महल के इर्द-गिर्द हुई जंगों की गवाह है ये घड़ी. हालांकि ये उतनी पुरानी है नहीं.
ग्रीनविच मीनटाइम यानी जीएमटी से तीन मिनट आगे इस घड़ी के पीछे अजब सोच है. पहली दफ़ा 1902 में बालमोरल होटल को खोला गया था. इसे उस वक़्त नॉर्थ ब्रिटिश स्टेशन होटल नाम दिया गया था.
उस वक़्त मानो ये वेवरले स्टेशन की पहरेदार के तौर पर वहां खड़ी होती थी. इलाक़े में ट्रेनों की आवाजाही के लिए ज़िम्मेदार कंपनी नॉर्थ ब्रिटिश रेलवे कंपनी ने ये घड़ी मानो इसलिए वहां लगा दी थी कि कोई भी मुसाफ़िर लेट न हो. होटल और रेलवे कंपनी के प्रबंधकों का मानना था कि जब मुसाफ़िरों के पास तीन मिनट ज़्यादा वक़्त होगा तो वो आराम से टिकट ले सकेंगे. गाड़ियों से अपना सामान उतार कर ट्रेन में रख सकेंगे.
मगर, आज भी बेवक़्त की चाल चलने वाली इस घड़ी की तेज़ी, एडिनबरा शहर को वक़्त का पाबंद बनाए रखती है.
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साल में एक दिन सही समय बताती है घड़ी
होटल आने वाले लोगों को घड़ी दिखाने वाले गाइड इयान डेविडसन कहते हैं कि, "ये एडिनबरा की सबसे दिलचस्प मगर ख़ुफ़िया जगह है. लोग अक्सर सोचते हैं कि ऊपर से देखने पर शहर की सड़कें और गलियां कैसी दिखती हैं."
डेविडसन बताते हैं कि 1902 से लेकर अब तक यानी 116 सालों में इस घड़ी में एक ही बदलाव आया है. पहले जहां ये घड़ी हाथ से चलाई जाती थी, वहीं अब ये बिजली से चलती है.
वैसे, ये घड़ी हर वक़्त ग़लत समय बताती है, ऐसा भी नहीं है. हर नए साल की पूर्व संध्या पर यहां एक इंजीनियर भेजा जाता है जो घड़ी का वक़्त सही करे ताकि नए साल की परेड सही वक़्त पर ही निकले. डेविडसन कहते हैं कि उस एक दिन के सिवा सब को लगता है कि ये घड़ी ग़लत समय बताती है.
घड़ी में भले ही 116 में कोई बदलाव न आया हो, इसके इर्द-गिर्द एडिनबरा में बहुत कुछ बदल गया है. दूसरे विश्व युद्ध के ख़ात्मे के बाद 1948 में ब्रिटेन ने रेलवे का राष्ट्रीयकरण कर दिया. भाप के इंजन बंद हो गए. नॉर्दर्न ब्रिटिश स्टेशन होटल का ताल्लुक़ भी रेलवे से ख़त्म हो गया. 1990 में इस होटल को नया नाम दिया गया- द बालमोरल होटल. मालिक बदले तो करोड़ों रुपए लगाकर होटल को नए सिरे से संवारा गया. नहीं बदला, तो घड़ी का ग़लत होना.
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वो परिवार जो इस घड़ी का रख-रखाव करता है
इस घड़ी का रख-रखाव स्मिथ ऑफ़ डर्बी नाम का घड़ी बनाने वाला परिवार करता है. इस परिवार की पांचवीं पीढ़ी के पास ही बालमोरल होटल की मशहूर घड़ी के रख-रखाव का ज़िम्मा आज भी है. इस परिवार के पास लंदन के सेंट पॉल गिरजाघर की मशहूर घड़ी और मस्कट की मजलिस ओमान में लगी घड़ी के रख-रखाव की ज़िम्मेदारी भी है.
इस कंपनी के पास चीन के गांझाऊ स्थित 12.8 मीटर चौड़ी पेंडुलम वाली घड़ी की रखवाली का काम भी है.
कंपनी के टोनी चार्ल्सवर्थ कहते हैं कि, "हम दुनिया भर में 5000 से ज़्यादा घड़ियों की ज़िम्मेदारी संभालते हैं. इनमें से द बालमोरल होटल की घड़ी को सबसे ख़ास कहना ग़लत होगा. वो कहते हैं कि यूं तो उनका ज़िम्मा सभी घड़ियों को सही वक़्त दिखाने का है. मगर बालमोरल होटल की घड़ी को ग़लत वक़्त बताते हुए दिखाने के पैसे उन्हें मिलते हैं."
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टोनी बताते हैं कि 2012 में ये घड़ी पूरे 90 मिनट लेट हो गई थी. उस वक़्त प्रिंसेस स्ट्रीट पर चलने वाली ट्राम सेवा की बिजली उसके कर्मचारियों ने काट दी थी. दो साल पहले ये घड़ी अचानक बंद हो गई थी. 108 साल में ऐसा पहली बार हुआ था जब ये घड़ी बंद हुई थी.
टोनी कहते हैं कि आज लोगों के पास स्मार्टफ़ोन और स्मार्टवाच हैं. फिर भी वो इस घड़ी पर भरोसा करते हैं. और इसके ग़लत वक़्त को सही करने के लिए उन्हें कभी नहीं कहा गया. वो कहते हैं कि आने वाले वक़्त में भी ये घड़ी ग़लत वक़्त ही बताती रहेगी.
टोनी कहते हैं कि इस घड़ी का ग़लत समय बताना एडिनबरा की संस्कृति का हिस्सा बन चुका है. अब अगर इसे सही किया जाएगा, तो लोग इसे मंज़ूर नहीं करेंगे.
बड़े योजनाबद्ध तरीक़े से बसे एडिनबरा शहर में सालाना लगने वाले मेलों और सब कुछ नियत जगह होने के बाद, आपको इस घड़ी की मदद से ज़िंदगी के तीन मिनट ज़्यादा मिलते हैं.
(मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी ट्रैवल पर उपलब्ध है.)
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