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'कास्त्रो को अमरीका कभी भूल नहीं पाएगा'
- Author, प्रोफेसर वेद नंदा
- पदनाम, डेनवर यूनिवर्सिटी
फ़िदेल कास्त्रो को अमरीका खराब संबंधों के लिए हमेशा याद करेगा. अमरीका के फ्लोरिडा में क्यूबा से आए लोग भले ही खुशी मना रहे हों, लेकिन अमरीका में भी दो तरह के लोग हैं.
बहुत लोग ये भी सोचते हैं कि कास्त्रो ने क्यूबा में काफी अच्छा काम किया- खासकर मेडिकल और शिक्षा के क्षेत्र में कास्त्रो के काम को लोग याद करते हैं.
हालांकि सोवियत यूनियन से क्यूबा के संबंध में गर्माहट कम हुई तो वहां की आर्थिक स्थिति बिगड़ती ही गई. मैं 400 के करीब वकीलों, जजों और लॉ प्रोफ़ेसरों को लेकर क्यूबा गया था. मैं उस समय वर्ल्ड यहूदी असोसिएशन का अध्यक्ष था. तब क्यूबा की अर्थव्यवस्था बहुत बदतर थी.
राष्ट्रपति ओबामा के क्यूबा के साथ नए सिरे से संबंधों की शुरुआत में कास्त्रो के छोटे भाई ने भी खासी मदद की.
दोनों के बीच अच्छे संबंध बने थे. अब ट्रंप के आने के बाद यह संबंध कैसे होंगे, फिलहाल किसी को पता नहीं है.
हालांकि एक बात ज़रूर कही जा सकती है कि अमरीका के साथ जो संबंध शुरू हुए हैं वो एकदम से खत्म नहीं हो सकते.
ट्रंप के आने के बाद भी वो आगे बढ़ेंगे. क्यूबा मे निजीकरण, आर्थित बदलाव और राजनीतिक छूट कितनी होगी यह कहना कठिन है लेकिन रिफॉर्म का जो काम शुरू हुआ है वो खत्म नहीं होगा.
फ़िदेल कास्त्रो अमरीका विरोध के अलावा इस बात के लिए भी याद किए जाएंगे कि उन्होंने बहादुरी दिखाते हुए से बतिस्ता शासन को खत्म किया. उन्होंने क्यूबा में क्रांति की और एक क्रांतिकारी नेता बने.
उन्होंने तीसरी दुनिया के देशों को जोड़ा. अफ्रीकी देशों की उन्होंने काफी मदद की. इन देशों में उन्होंने मेडिकल मदद पहुंचाई.
इन मुल्कों में कास्त्रो को लोग हीरो मानते हैं. इनके लिए कास्त्रो अब भी हीरो हैं. वह केवल अमरीका विरोध के कारण ही नहीं बल्कि एक क्रांतिकारी के रूप में भी जाने जाएंगे.
(बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय से बातचीत पर आधारित)
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