एक वीरान द्वीप जहां रखे जाते थे कुष्ठ रोगी

कुष्ठ रोगी

इमेज स्रोत, Elizabeth Warkentin

    • Author, एलिज़ाबेथ वारकेंटिन
    • पदनाम, बीबीसी ट्रैवल्स

आप में से बहुत से लोगों ने कहीं न कहीं ये पढ़ा होगा-कुष्ठ रोग साध्य है.

मतलब ये कि कुष्ठ रोग यानी कोढ़ की बीमारी का इलाज मुमकिन है. भारत सरकार पिछले कई दशक से इस बीमारी से देश को निजात दिलाने के लिए काम कर रही है. हालांकि आज भी दुनिया के आधे से ज़्यादा नए कुष्ठ रोगी भारत में ही होते हैं.

कोढ़ की बीमारी बहुत बुरी मानी जाती रही है. सदियों से इसके शिकार लोगों को समाज से अलग-थलग करने का चलन रहा है. पहले तो कोढ़ के शिकार लोगों को एकदम अलग ही रखा जाता था. बाद में उनके लिए कुष्ठ रोगी आश्रम बनने लगे. आज भी देश में कई कुष्ठ रोगी आश्रम चलते हैं.

सिर्फ़ हिंदुस्तान में ही नहीं, बहुत से पश्चिमी देशों में भी कोढ़ के मरीज़ों के साथ ऐसा ही सुलूक किया जाता था. यूरोपीय देश ग्रीस या यूनान में तो एक जज़ीरा ही कोढ़ के मरीज़ों के लिए अलग कर दिया गया था.

इस जज़ीरे का नाम है-स्पिनालॉन्गा. ये यूनान के सबसे बड़े द्वीप क्रीट के पास स्थित है. स्पिनालॉन्गा का कुल इलाक़ा 8.5 हेक्टेयर का है. ये भूमध्य सागर मे मिराबेलो की खाड़ी के मुहाने पर स्थित है.

स्पिनालॉन्गा द्वीप

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द्वीप पर थे 400 रोगी

आज की तारीख़ में स्पिनालॉन्गा द्वीप पर कोई भी नहीं रहता. बहुत कम लोग ही वहां आते-जाते हैं. ये द्वीप क्रीट के गांव प्लाका से थोड़ी ही दूरी पर स्थित है. मगर, उसमें बहुत कम लोगों की दिलचस्पी है.

किसी ज़माने में स्पिनालॉन्गा द्वीप एक बड़ा फ़ौजी अड्डा हुआ करता था. पहले वेनिस के राजा ने यहां पर सैनिक अड्डा बनाया था. बाद में तुर्की के ऑटोमान साम्राज्य ने यहां पर क़िलेबंदी कर के रखी थी.

1904 में क्रीट के निवासियों ने तुर्कों को अपने देश से खदेड़ दिया. इसके बाद स्पिनालॉन्गा को कोढ़ के मरीज़ों का अड्डा बना दिया गया. एक वक़्त में इस द्वीप पर 400 के क़रीब कोढ़ के मरीज़ रहा करते थे.

क्रीट और यूनान के दूसरे हिस्सों से कुष्ठ रोगियों को यहां लाकर रखा जाता था. उनकी पहचान ख़त्म कर दी जाती थी. उनकी संपत्तियां छीन ली जाती थीं. स्पिनालॉन्गा द्वीप पर कुष्ठ के मरीज़ों के इलाज का भी कोई इंतज़ाम नहीं था. एक डॉक्टर यहां तैनात किया गया था. मगर वो भी तब आता था जब इस जज़ीरे के किसी बाशिंदे को दूसरी बीमारी हो जाती थी.

यूं तो 1940 के दशक में वैज्ञानिकों ने कोढ़ का इलाज खोज निकाला था. मगर, यूनान की सरकार ने स्पिनालॉन्गा में रहने वालों के इलाज की कोशिश ही नहीं की. कोढ़ के मरीज़ों का ये केंद्र 1957 तक चलता रहा था.

स्पिनालॉन्गा द्वीप

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वीरान हुआ द्वीप

1957 में एक ब्रिटिश एक्सपर्ट ने यहां का हाल देखा और पूरी दुनिया को बताया. यूनान की सरकार को इसकी वजह से काफ़ी शर्मिंदगी उठानी पड़ी. जिसके बाद यहां के सभी लोगों को इलाज के लिए ले जाया गया. ये कुष्ठ रोगी आश्रम बंद कर दिया गया. यूनान की सरकार ने इस जज़ीरे पर कोढ़ के मरीज़ों के रहने के सभी सबूत मिटाने की कोशिश की.

जब यहां के कोढ़ के मरीज़ चले गए तो स्पिनालॉन्गा द्वीप वीरान हो गया. कोई यहां झांकने भी नहीं आता था.

दुनिया का ध्यान इस द्वीप पर तब गया, जब ब्रिटिश लेखिका विक्टोरिया हिस्लॉप ने इस जज़ीरे के मरीज़ों की ज़िंदगी को बुनियाद बनाकर एक फ़ंतासी उपन्यास लिखा. तब जाकर लोगों को पता चला कि दुनिया से दूर कर दिए गए कोढ़ के इन मरीज़ों की ज़िंदगी कैसी होती थी.

बाद के दिनों में यहां के एक मरीज़ एपामिनॉनडास रेमोन्डाकिस ने मॉरिस बॉर्न के साथ मिलकर यहां के लोगों पर एक क़िताब लिखी.

इस जज़ीरे पर जाएं तो सन्नाटे का शोर आप के कान फाड़ता-सा मालूम होता है. पुरानी इमारतों के खंडहर मिलते हैं. कोढ़ियों के लिए बनाए गए बाज़ार के सबूत हैं. एक क़ब्रिस्तान है. एक भट्टी भी यहां थी, जहां कोढ़ियों के कपड़े जलाए जाते थे.

स्पिनालॉन्गा द्वीप

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मिटा दिए सबूत

असल में 1957 में जब यहां की कुष्ठ रोगी कॉलोनी को बंद किया गया तो यूनान की सरकार चाहती थी कि इसका कोई भी सबूत दुनिया को न मिले. इसीलिए यहां की सारी फ़ाइलें जला दी गईं. यहां के रहने वालों को किसी से बात करने के लिए मना कर दिया गया. इसी वजह से इस जज़ीरे का राज़ दुनिया की नज़रों से ओझल रहा.

यूं लगा जैसे स्पिनालॉन्गा नाम का कोई द्वीप ही इस धरती पर नहीं. पर, हालात विक्टोरिया हिस्लॉप के उपन्यास से बदल गए. सैलानी यहां आने लगे. पुराने कुष्ठ रोगियों ने लोगों से बात करनी शुरू की.

लोगों को पता लगा कि कोढ के मरीज़ों के लिए यहां अलग से कोई इंतज़ाम नहीं किया गया था. वेनिस और तुर्की के शासकों ने यहां सैनिकों के रहने के लिए जो इमारतें बनवाई थीं, उन्हीं में मरीज़ रहा करते थे. द्वीप के चारों तरफ़ दीवार थी जिसमें कुष्ठ रोगी क़ैदियों जैसी ज़िंदगी बिताते थे.

बाद में सरकार की इजाज़त से इस दीवार को तोड़ दिया गया ताकि मरीज़ समुद्र के किनारे आज़ाद हवा में सांस ले सकें.

स्पिनालॉन्गा द्वीप

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सुधार

जब रेमोनडाकिस इस द्वीप पर रहने आए तो उन्होंने हालात सुधारने की पहल की. कुछ नियम-क़ायदे बनाए गए. मसलन, किसी को भी आईना देखने की इजाज़त नहीं थी. जो संगीत के जानकार मरीज़ थे, उनकी मदद से संगीत की महफ़िलें सजाई जाने लगीं.

द्वीप पर सेंट जॉर्ज के नाम का एक गिरजाघर भी है. इसे वेनिस के लोगों ने बनवाया था. साथ ही यहां एक क़ब्रिस्तान भी है. जब अस्सी के दशक में यहां सैलानी आते थे, तो वे क़ब्रों को बहुत नुक़सान पहुंचाया करते थे.

2013 में इन सभी हड्डियों को इकट्ठा करके एक बड़ी-सी क़ब्र बनवाई गई.

कुष्ठ रोगियों की कॉलोनी ख़त्म होने के बाद से आज कई साल बाद भी स्पिनालॉन्गा द्वीप वीरान पड़ा है.

मगर ये अपने आप में इंसान के इतिहास को शर्मसार करने वाला पन्ना छुपाए हुए है.

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