'रूफ़ ऑफ़ द वर्ल्ड' के 10 हैरतअंगेज़ नज़ारे

इमेज स्रोत, Audrey Scott

    • Author, आद्रे स्कॉट एवं डेनिएल नोल
    • पदनाम, बीबीसी ट्रैवल्स

दुनिया की छत कहलाने वाला पामीर हाईवे लगभग 2000 से इस्तेमाल होता रहा है और ऐतिहासिक सिल्क रूट का हिस्सा है.

एम41 के नाम से भी मशहूर ये हाईवे किर्गिस्तान के शहर औश से शुरू हो कर पामीर पर्वत के साथ चलते हुए 1252 किलोमीटर की दूरी तय करके ताजिकिस्तान की राजधानी डूशान्बे में खत्म होता है.

यह सिल्क रूट का उत्तरी हिस्सा है और 13वीं शताब्दी में मार्कोपोलो इस रास्ते से चीन तक पहुंचा था. हालांकि इसके बाद इसका इस्तेमाल दूसरे यात्रियों ने ज्यादा नहीं किया.

इमेज स्रोत, Daniel Noll

पामीर हाईवे पर सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था बहुत अनियमित, नहीं के बराबर है. पत्थरों के खिसकने और मेंटिनेंस के अभाव के चलते इस हाईवे पर झटके खूब लगते हैं. अधिकतर यात्री ओश से लोकल चालक के साथ यूटिलिटी वाहन का इस्तेमाल करते हैं.

मार्कोपोलो भेड़ की प्रतिमा

ओश शहर से 220 किलोमीटर दक्षिण में मार्कोपोलो भेड़ की प्रतिमा लगी है, इस इलाके में भेड़ बेहद उपयोगी जानवर माना जाता है.

किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान की सीमा करीब 4,282 मीटर की ऊंचाई पर है और बॉर्डर क्रॉसिंग पर है किज़लार्ट पास है.

इमेज स्रोत, Audrey Scott

पामीर पर्वत के इलाके में ताजिक नेशनल पार्क भी है जिसे 2013 में यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल किया गया.

व्यापार का शहर मुर्गाब

ताजिकिस्तान का रेगिस्तानी शहर मुर्गाब, किर्गिस्तानी सीमा से 190 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है. रात होने पर हमारा पहला पड़ाव यही शहर बना.

इमेज स्रोत, Audrey Scott

यहां से कई मुख्य सड़कें गुजरती हैं जो ताजिकिस्तान, किर्गिस्तान और चीन के बीच कारोबार के लिहाज से बेहद अहम हैं. यहां पर ट्रेन और शिपिंग कंटेनर की भरमार दिखती है.

लेकिन ये तस्वीर अस्थायी कैफ़े की है. मुर्गाब की ऊंचाई 3,560 मीटर है, लिहाजा यहां पर जीव जंतुओं की मौजूदगी नाम मात्र की है. याक और गदहे ही इस ऊंचाई पर आसानी से रह पाते हैं.

स्टालिन के बसाए अल्पसंख्यक

मुर्गाब से ताजिकिस्तान के गांव लांगर पहुंचने पर हम खाने के लिए एक टी हाउस पर रुके, जिसे दो किर्गिस्तानी महिला चला रही थीं. यहां के स्थानीय लोग तुर्की बोलने वाले किर्गिज हैं जबकि पश्चिमी पामीर के पड़ोसी इलाकों में लोग फ़ारसी बोलते हैं.

इमेज स्रोत, Audrey Scott

सोवियत संघ के समय में ताजिकिस्तान किर्गेस्तान के नाम से जाना जाता था. जब सोवियत संघ के नेता जोसेफ स्टालिन ने 1929 में सीमा तय की थी तो उन्होंने स्थानीय लोगों को अल्पसंख्यकों को अलग अलग बसाया था.

हिंदूकुश की बर्फ से ढकी चोटियां

हम लांगर गांव में स्थानीय लोगों के साथ भी चले जो अपने अपने खच्चरों पर लकड़ी लादे घरों की ओर लौट रहे थे. तस्वीर में हिंदुकुश की बर्फ से ढकी चोटियां दिख रही हैं.

इमेज स्रोत, Daniel Noll

वैसे पंज नदी ताजिकिस्तान और अफ़गानिस्तान के बीच सीमा रेखा का काम करती है. अब हम तजिकिस्तान के वाखन घाटी में पहुंच चुके थे.

वाखन घाटी में कोई होटल नहीं मिला. यात्रा करने वाले लोग पामीरी घरों में ही ठहरते हैं. ऐसे घर आपको इलाके में सक्रिय गैर सरकारी संगठनों की मदद से मिल जाते हैं.

शियाओं के घर, मांसाहार कभी-कभी

इमेज स्रोत, Audrey Scott

वाखन घाटी में स्थानीय लोगों के घर शिया मुस्लिम परंपरा से मेल खाते हैं क्योंकि शियाओं की बहुलता है. हम जिस घर में ठहरे, वहां के लोगों ने हमारा गर्मजोशी से स्वागत किया, घर में बनी ब्रेड और दूध की चाय भी पीने को मिली.

वाखन घाटी मुख्य रूप से खेती पर आधारित है. नीचे उतरने पर फसल और सब्जियों को उपजाना आसान होता है. स्थानीय लोग आलू, जौ और गेहूं इत्यादि उपजाते हैं. बकरी और भेड़ इत्यादि भी पालते हैं, लेकिन मांसाहार खास मौकों पर ही करते हैं.

चोथी शताब्दी के बौद्ध स्तूप

इमेज स्रोत, Audrey Scott

जब हम वारांग गांव पहुंचे तो स्थानीय बच्चों का समूह हमें चौथी शताब्दी के बने बौद्ध स्तूप पर ले गया. स्थानीय लोगों के दावों के मुताबिक पामीरी लोग मूल रूप से मकदूनिया के रहने वाले थे और सिंकदर के हमलों के दौरान ईसा पूर्व 300 में इन इलाकों में आकर बस गए.

इमेज स्रोत, Daniel Noll

वैसे ख़ास बात ये है कि इस इलाके के कई बच्चे कई भाषाओं में बात कर लेते हैं. रूसी और अंग्रेजी में भी. इस्मायली मुसलमानों के धार्मिक नेता आग़ा ख़ान ने यहाँ शिक्षा और ख़ासकर लड़कियों की शिक्षा के क्षेत्र में काफी पैसा लगाया है.

इमेज स्रोत, Daniel Noll

वाख़ान घाटी में ही तीसरी शताब्दी में बने यामचुन किले का खंडहर दिखाई देता है. ये किला व्यापारियों ने तीसरी शताब्दी में बनवाया था. ये खंडहर पामीर हाईवे के महत्व को रेखांकित करता है. यह हाईवे अतीत में कारोबार और संस्कृतियों की आवाजाही का गवाह रहा है.

अब कम लोग ही इसका इस्तेमाल करते हैं. लेकिन अगर आप इस हाईवे की यात्रा करते हैं तो आपका वास्ता ख़ूबसूरत लैंडस्केप, पामीरी लोगों की आवभगत और रोमांच की अनोखी दुनिया से ज़रूर पड़ेगा.

<italic><bold>अंग्रेज़ी में <link type="page"><caption> मूल लेख</caption><url href="http://www.bbc.com/travel/story/20141211-driving-one-of-the-worlds-most-remote-highways" platform="highweb"/></link> यहां पढ़ें, जो <link type="page"><caption> बीबीसी ट्रैवल</caption><url href="http://www.bbc.com/travel" platform="highweb"/></link> पर उपलब्ध है.</bold></italic>

<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>