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क्या आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस बीमारियों को रोक सकता है?
- Author, जुआन पिकार्डो
- पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर
परिवर्तन प्रकृति का नियम है. अगर समय-समय पर बदलाव न होते रहते, तो आज सभ्यता इस मुकाम तक नहीं पहुंचती, जहां आज हम खड़े हैं.
पर इंसान की बुनियादी फ़ितरत है बदलाव की मुख़ालफ़त. लोग बदलाव नहीं चाहते, उसका विरोध करते हैं. भले ही वो उनके फ़ायदे के लिए क्यों न हो.
बीमारियों की रोकथाम के लिए कई बार बदलाव बहुत ज़रूरी हो जाते हैं. जैसे कि डेंगू की बीमारी. हम तमाम कोशिशों के बावजूद इससे होने वाली मौतों को पूरी तरह रोक नहीं पाए हैं.
रोकथाम के लिए ज़रूरी है कि हमें पहले से पता हो जाए कि डेंगू कहां अपने पंजे मारने वाला है.
डेंगू एक ऐसी ख़तरनाक बीमारी है, जो मच्छरों की वजह से फ़ैलती है. इस बीमारी के वायरस मच्छर के काटने की वजह से इंसान के शरीर में घुस जाते हैं और क़हर बरपाते हैं.
विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि हर साल क़रीब 39 करोड़ लोग डेंगू के शिकार होते हैं.
रेनियर मल्लोल की मां इस बीमारी की शिकार हो गई थीं. तभी से वो इस मुहिम में लग गए कि नई तकनीक की मदद से डेंगू को फैलने से रोकें.
इसके लिए रेनियर ने एआईएमई (AIME) नाम की एक संस्था बनाई है.
जब रेनियर की मां बीमार थीं, तो वो उन्हें खोने के डर से घबराए हुए थे. रेनियर इस बात से भी परेशान थे कि डेंगू के विस्तार की वजह समझने के लिए लोग तैयार नहीं थे. उनके पास जानकारी नहीं थी.
मां की बीमारी के वक़्त रेनियर को मां का सिखाया हुआ सबक़ याद आया. वो ये था कि 'जानकारी ही ताक़त है.'
2015 में जब रेनियर को नासा जाने का मौक़ा मिला, तो 10 हफ़्ते के इस कार्यक्रम के दौरान उन्हें इंसानी सभ्यता की नई चुनौतियों को बारीक़ी से समझने का मौक़ा मिला.
नासा के कार्यक्रम से लौटने के बाद रेनियर ने एक आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का एल्गोरिद्म तैयार किया. ये मशीनी आंकड़ा लोगों की सेहत, उनकी रिहाइश और आस-पास के माहौल की जानकारी का है. इस एल्गोरिद्म में लोगों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का ब्यौरा भी शामिल है.
इसकी मदद से किसी बीमारी के फैलाव का अनुमान लगाया जाता है. इसकी मदद से रेनियर और उनकी टीम ने अब तक 100 बार बिमारियों की भविष्यवाणियां की हैं. इनमें से 88 सही साबित हुईं.
इस कामयाब तजुर्बे के बाद रेनियर की संस्था को काफ़ी मदद मिली. इसके बाद एआईएमई की टीम को ब्राज़ील जाने का मौक़ा मिला. जहां के आंकड़ों की मदद से उन्होंने बीमारियों के फैलाव की 85 फ़ीसद भविष्यवाणी करने में कामयाबी मिली.
रेनियर कहते हैं कि उनके तैयार किए हुए एल्गोरिद्म ने बीमारियों की सटीक भविष्यवाणी से जता दिया है कि ये बहुत कारगर है. हम बीमारियों के विस्तार को रोकने के लिए इसका इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए हमें आंकड़े जुटाने होंगे.
रेनियर ने इस सिस्टम को अपने देश मलेशिया के सभी हिस्सों में लागू कर दिया है. अब रेनियर की टीम इस मशीनी की मदद से ज़ीका वायरस और चिकनगुनिया की बीमारी की रोकथाम की कोशिश में जुटे हुए हैं.
अब वो कीटाणुओं से फैलने वाली दूसरी बीमारियों और डायबिटीज़ जैसी पेचीदा बीमारी का वक़्त से पहले पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं.
रेनियर का कहना है कि आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस इंसान की बेहतरी के लिए है.
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