हर्बल चाय या फलाहार का हमारी आंतों पर क्या असर

    • Author, क्लॉडिया हैमंड
    • पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर

क्या डीटॉक्सिंग यानी सेहतमंद जीवनशैली से आंतों का स्वास्थ्य सुधारने में मदद मिलती है?

साल के पहले कुछ हफ्तों में ग्रहण किए जाने वाले डीटॉक्स आहार आहार हमारी आंतों में मौजूद जीवाणुओं के लिए भी लाभकारी होने चाहिए, है न?

यदि आपने पिछले दिनों त्योहारों के दौरान जमकर स्वादिष्ट व्यंजनों का आनन्द उठाया हो तो डीटॉक्स यानी विषहरण का विचार आपको आकर्षित करेगा.

कई सारी चीज़ें इसमें मदद करती हैं जैसे डीटॉक्स मसाज और स्मूदी से लेकर हर्बल चाय और व्रताहार या फलाहार.

ये आपको चमकदार त्वचा, वजन में कमी, स्वस्थ शरीर के वादे भी किए जाएंगे जिससे आप त्योहारों के खानपान के कारण शरीर में उत्पन्न हुए आलस्य को भगा सकें.

नए साल की शुरुआत में शरीर से अशुद्धियों को निकालकर बाहर करने का विचार अच्छा तो लगता है लेकिन क्या आप इसका कोई प्रमाण है कि ये काम करता है या नहीं?

आधुनिक जीवन शैली

डीटॉक्स शब्द का प्रयोग दो बहुत अलग तरीकों से किया जाता है.

पहले का अर्थ चिकित्सकीय डीटॉक्स कार्यक्रमों से संबंधित है जिसके अन्तर्गत शराब पीने या नशे की समस्या से निपटने में लोगों की मदद की जाती है.

दूसरे तरीके का संबंध उन वादों से है जो हमारे शरीरों से विष को दूर करने के लिए किए जाते हैं.

आधुनिक जीवन शैली में हमारा संपर्क कई तरह के बनावटी रसायनों और प्राकृतिक चीजों से होता है जिनमें से कुछ विषैली हो सकती हैं.

लेकिन इस बात का इतना प्रमाण है कि डीटॉक्स क्रिया से ये विष हमारे शरीर से बाहर किया जा सकेगा.

ये बात सच है कि जिस दिन आप शराब पीना कम करते हैं और एक स्वस्थ आहार की ओर बढ़ते हैं, विषैले पदार्थ आपके शरीर को छोड़ देंगे.

लेकिन ये तो रोज होता है, केवल उस समय नहीं जब आप कच्ची सब्जियों का रस पीते हैं.

छींक के जरिए...

शरीर अपने आप बड़ी चालाकी से अंदर उत्पन्न होने वाली नुकसानदायक चीजों को बाहर करता रहता है. अगर शरीर ऐसा न करे तो हम मुसीबत में फंस जाएंगे.

हमारे पूरे शरीर में विषैले तत्वों को बाहर रखने या बाहर करने का काम सतत चलता रहता है.

इसमें त्वचा एक अवरोधक का काम करती है और श्वास प्रणाली में मौजूद सूक्ष्म बाल म्यूकस में मौजूद कणों को रोक लेते हैं जिससे छींक के जरिए उन्हें बाहर किया जा सके.

हमारी आंतों के एक हिस्से में लिम्फेटिक सेल यानी लिंफ की कोशिकाएं होती हैं जिन्हें पायर्स पैचेज कहा जाता है. ये म्यूकस की झिल्ली की परत पर एक गट्ठर बनाती हैं.

छोटी आंत के सबसे निचले हिस्से में पाए जाने वाले इन पैचेज यानी चकत्तों का आकार इन्हें नुकसानदायक कणों को पहचानने और उन्हें बाहर निकालने लायक बनाता है

जिससे ये कण हमारे भोजन के लाभकारी पौष्टिक तत्वों के साथ रक्त में घुल न जाएं.

शराब पीने की आदत

हालांकि हमें ऐसा लगता होगा कि हमारी आंतें गंदी हैं और उन्हें साफ करने की आवश्यकता है, दरअसल वे अपना काम कर ही रही हैं.

इसके अतिरिक्त आपके गुर्दे हर मिनट में आधा कप रक्त छानते रहते हैं और मूत्र के माध्यम से शरीर में पैदा होने वाले यूरिया जैसे विषैले तत्वों को बाहर करते रहते हैं.

जहां तक शराब की बात है तो इसमें यकृत की पूरी भूमिका होती है। यह प्रक्रिया दो चरणों में की जाती है.

सबसे पहले किण्वक यानी एन्जाइम शराब को एसिटलडिहाइड में परिवर्तित कर देते हैं जो कि विषैला होता है.

लेकिन यह जल्दी ही पहले एसिटिक एसिड और फिर कार्बन डाइ ऑक्साइड तथा जल में परिवर्तित हो जाता है.

यदि आप यकृत की क्षमता से अधिक शराब पीयेंगे तो आपका लीवर यानी यकृत आपकी रफ्तार का साथ नहीं दे पाएगा और आपके खून में शराब की मात्रा बढ़ जाएगी.

डीटॉक्स आहार

यदि आप नियमित रूप से अधिक शराब पीते हैं तो एसिटलडिहाइड आपके लीवर को नुकसान पहुंचा सकता है.

हालांकि ये भी सच है कि कम मात्रा में पी जाने वाली शराब को लीवर सफलतापूर्वक शरीर से बाहर निकाल देता है.

ये हमारी लगातार काम करने वाला सचल डीटॉक्स प्रणाली है. डीटॉक्स आहार के समर्थन में अच्छे प्रमाण की कमी है.

तो क्या विशेष डीटॉक्स आहार कारगर होते हैं? ऐसे आहारों में शराब, कैफीन और चीनी को पूरी तरह छोड़ देने से लेकर वो कड़े तरीके भी शामिल हैं.

जिनमें कई दिनों तक आप केवल तरल पदार्थ पीते हैं और उसके बाद बहुत कम मात्रा में भोजन ग्रहण करते हैं.

एक्सीट विश्वविद्यालय में पूरक औषधि विभाग में ससम्मान सेवामुक्त प्रोफेसर एडज़ार्ड अर्न्सट ने 2012 में इस तरह के साहित्य की एक सुनियोजित समीक्षा की.

नियंत्रित परीक्षण

लेकिन उन्हें घर में किए जाने वाले डीटॉक्स से संबंधित पर्याप्त ऐसे अध्ययन नहीं मिले जिनको औषधीय डीटॉक्स कार्यक्रमों से अलग करके देखा जा सके.

साल 2014 में सिडनी में रहने वाले दो शोधकर्ताओं ने डीटॉक्स आहारों से संबंधित अध्ययनों की समीक्षा प्रकाशित की.

उन्हें वाणिज्यिक डीटॉक्स आहारों में बेतरतीब लेकिन नियंत्रित परीक्षण नहीं मिले. हालांकि कुछ ऐसे अध्ययन जरूर मिले जो नियंत्रित समूहों पर नहीं थे.

जैसे कि साल 2000 में केवल 25 लोगों पर सात दिन तक किए गए डीटॉक्स आहारों पर शोध जिसके बाद लोगों ने अपने आपको स्वस्थ पाया.

और यकृत का कार्य कुछ सुधर गया लेकिन ये सुधार सांख्यिकी तौर पर बहुत महत्वपूर्ण नहीं था.

सिडनी की इस जोड़ी को ऐसे भी कुछ परीक्षण मिले हैं जिनमें शरीर से किसी विशेष विषैले पदार्थ को बाहर निकालने का प्रयास किया गया हो.

व्रत का सहारा

लेकिन इनमें से अधिकतर परीक्षण बहुत छोटे समूहों पर किए गए थे और उनमें नियंत्रण नहीं था या अन्य कमियां थीं.

इसलिए इन शोधकर्ताओं ने यह निष्कर्ष निकाला कि डीटॉक्स आहारों के पक्ष में अच्छे प्रमाणों की कमी है. इससे हमारी पूरी निर्भरता सुनी सुनायी बातों पर आ टिकी है.

जो लोग इस तरह की अल्पावधि वाले आहारों या रस आधारित व्रत का सहारा लेते हैं, वे कुछ दिनों के लिए अपना वजन कम करते हैं.

लेकिन लम्बी अवधि के लिए वजन कम रहा हो, इसके प्रमाण बड़ी मुश्किल से मिलते हैं. क्या आपको डीटॉक्स की चिंता करनी चाहिए?

जहां तक शराब की बात है तो वर्ष के कुछ हफ्तों में कई दिनों तक शराब छोड़ना सेहत के लिए अधिक फायदेमंद है.

बनिस्पत इसके कि एक बार के डीटॉक्स आहार में इसे कुछ हफ्तों के लिए छोड़ दिया जाए.

भूमध्यसागरीय आहार

आपके स्वास्थ्य के लिए कुछ समय तक लगातार अधिक फल और सब्जियां खाना भी लाभप्रद है.

भूमध्यसागरीय आहार लेना और बाकी बची ज़िन्दगी में व्यायाम करने का प्रण लेना त्वरित डीटॉक्सिंग से कहीं अधिक कारगर सिद्ध होगा.

इन सबके बावजूद बहुत सारे लोगों को डीटॉक्स का विचार बड़ा लुभावना लगता है. यदि अपने बेरोकटोक खाने की भरपाई आपको स्वयं को दंड देकर ही करनी है.

और इससे आपको अच्छा लगता है तो शायद इसकी वजह ये है कि आप अपने शरीर के विषैले तत्व नहीं बल्कि अपने पाप धोना चाहते हैं.

फिर भी मनोवैज्ञानिक रूप से ये संभव है कि डीटॉक्स के माध्यम से आप एक नई शुरुआत कर सकें जिसमें पुरानी आदतें छूट जाएं और आप नई आदतें डाल सकें.

पुरानी आदतों को छोड़ने से...

लेकिन इन सबके लिए आपको भविष्य की एक योजना तैयार रखनी होगी अन्यथा पुरानी आदतें फिर घर कर लेंगी.

शायद डीटॉक्स को हमें एक उपमा के रूप में देखना होगा जिसका संबंध पुरानी आदतों को छोड़ने से अधिक है.

और आपकी आंत या अंगों के विष को बाहर निकालने से कम है. विशेष चायों, रसों या आहारों के बिना भी आपका शरीर लगातार विषहरण करता रहता है.

बेशक आप एक स्वस्थ आहार लेकर, नियमित पानी पीकर, व्यायाम करके तथा उचित नींद के साथ अपने शरीर की मदद कर सकते हैं.

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