जब पहली बार दुनिया ने देखा था जंबो विमान

    • Author, स्टीफ़न डावलिंग
    • पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर

हाल ही में सिंगापुर एयरलाइंस की एक फ़्लाइट ने सिंगापुर के चांगी एयरपोर्ट से न्यूयॉर्क के लिए उड़ान भरी.

इसे दुनिया की सबसे लंबी फ़्लाइट कहा जा रहा है.

लंबी दूरी की उड़ानों में आज से 50 साल पहले क्रांति आई थी.

इन क्रांति लाने वाले विमानों ने आधी सदी का सफ़र पूरा कर लिया है.

आज, एयरबस और बोइंग के बड़े-बड़े विमान ऐसी लंबी उड़ानें खूब भरते हैं. मगर आज से आधी सदी पहले ऐसा नहीं था. इसे बदला था. बोइंग के विमान 747 ने.

30 सितंबर 1968 को इस बोइंग 747 को हज़ारों लोगों की भीड़ के बीच दुनिया के सामने पेश किया गया था.

उमड़ी थी लोगों की भीड़

बोइंग की अमरीका के एवरेट में स्थित फैक्ट्री के बाहर जब ये विमान खड़ा किया गया, तो इसे देखने के लिए भारी तादाद में लोग जुटे थे.

ये 'जंबो जेट' युग की शुरुआत थी.

इस विमान को ख़ास तौर से लंबी दूरी की उड़ानों के लिए डिज़ाइन किया गया था. जैसे कि न्यूयॉर्क से लंदन.

इसके साथ ही इस विमान में एक साथ ज़्यादा मुसाफ़िर उड़ान भर सकते थे.

इससे पहले बोइंग के 707 में बोइंग 747 के मुक़ाबले आधे लोग ही एक बार में सफ़र कर पाते थे.

उड़ान के वक़्त बोइंग 747 अपने साथ 333 टन का वज़न उठा सकता था.

इसके लिए प्लेन को 16.8 टन की ताक़त की ज़रूरत पड़ती थी.

जब बोइंग 747 को बनाया गया, तो उससे बड़ा कोई और विमान दुनिया में नहीं था.

बल्कि कोई और विमान उसके आस-पास भी नहीं ठहरता था. ये छह मंज़िला इमारत से भी ज़्यादा ऊंचा था.

बदल गया था पूरा खेल

बोइंग 747 210 फ़ीट से ज़्यादा लंबा था. पंखों को जोड़ कर इसकी चौड़ाई 195 फ़ीट थी.

बोइंग ने इस जंबो जेट को बनाने के लिए नया कारखाना लगाया था, एवरेट में.

जब इसे बाज़ार में उतारा गया, तो विमान कंपनियों को इसे खड़ा करने के लिए नए हैंगर की ज़रूरत पड़ी.

क्योंकि उस वक़्त तक इतने विशाल विमान की कल्पना तक नहीं की गई थी.

इस विशाल विमान को ख़रीदने के लिए एयरलाइंस में होड़ मच गई थी. बोइंग 747 एक बार में 8,560 किलोमीटर की दूरी तय कर सकता था.

इस दौरान इसे दोबारा ईंधन लेने की ज़रूरत नहीं पड़ती थी.

किसी और विमान के मुक़ाबले बोइंग 747 की ये ख़ूबी ही लंबी दूरी की उड़ानों की शुरुआत की वजह बनी.

कंपनी का कायापलट किया

बोइंग 747 की कामयाबी ने बोइंग कंपनी को भी घाटे से उबरने में मदद की.

आज से 50 साल पहले बोइंग कंपनी एक अरब डॉलर से भी ज़्यादा के क़र्ज़ के बोझ तले दबी थी.

बोइंग 747 बनाने के लिए कंपनी को 7 बैंकों से भारी क़र्ज़ लेना पड़ा था. लेकिन, बोइंग 747 ने कंपनी के घाटे का बोझ भी आसानी से उठाया.

ब्रिटिश एयरवेज़ ने सब से ज़्यादा बोइंग 747 विमान ख़रीदे. एक वक़्त ऐसा भी था जब ब्रिटिश एयरवेज़ के पास 100 से ज़्यादा बोइंग 747 विमान थे.

बात 2018 की करें, तो आज भी ब्रिटिश एयरवेज़ के पास ही सबसे बड़ी संख्या में ये विमान मौजूद हैं.

आज ब्रिटिश एयरवेज़ बोइंग 747 के मॉडल 400 के 36 विमान उड़ाती है.

आज बोइंग की प्रतिद्वंदी कंपनी एयरबस का 380-800 सिरीज़ का विमान दुनिया का सबसे बड़ा विमान कहा जाता है.

एयरबस के विमान से ही सिंगापुर एयरलाइंस ने दुनिया की सबसे लंबी उड़ान भरी.

लेकिन, याद रहे कि विशाल यात्री विमान बनाने की शुरुआत बोइंग ने की थी.

(मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी फ़्यूचर पर उपलब्ध है.)

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