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विमान पर बिजली गिरे तो क्या होता है?
- Author, क्रिस बैरेन्युक
- पदनाम, बीबीसी फ्यूचर
तीन अक्टूबर को एक बेहद सनसनीख़ेज़ वाक़या कैमरे में क़ैद हुआ. उत्तरी अटलांटिक में स्थित देश आइसलैंड में तेज़ बारिश हो रही थी. आसमान में बिजली चमक रही थी. आसमान में चमक रही बिजली को कैमरे में क़ैद करने के लिए हालडोर गुडमुंडसन ने अपने मोबाइल का कैमरा चालू किया. जैसे ही उन्होंने तस्वीरें क़ैद करनी शुरू कीं, आसमान में तेज़ बिजली कड़की और उसी वक़्त पास के हवाई अड्डे से उड़े विमान पर जा गिरी.
हालडोर का तो दिल ही बैठ गया. आसमानी बिजली जो बेहद ख़तरनाक मानी जाती है, वो मुसाफिरों से लदे एक विमान पर जा गिरी थी. मगर हालडोर ये देखकर हैरान रह गए कि आसमानी बिजली गिरने के बावजूद वो विमान आराम से अपनी उड़ान पर निकल गया. इस विमान ने पूरी तरह सुरक्षित फ्लाइट पूरी की और पेरिस एयरपोर्ट पर उतर गया. विमान को बिजली गिरने से कोई नुक़सान नहीं हुआ था.
हालडोर ने जो तस्वीर खींची थी उसे देखकर किसी का भी दिल बैठ जाए. बिजली गिरने से विमान को कोई नुक़सान न पहुंचने की ख़बर से वो हैरान थे. आख़िर विमान ने क़रीब एक अरब ज्यूल बिजली का झटका झेला था. ये एक चौथाई टन के विस्फोटक से होने वाले धमाके के बराबर होता है. मगर शुक्र था कि विमान सुरक्षित था.
आप भी ये जानकर हैरान होंगे कि बिजली गिरने के बावजूद विमान को कोई नुक़सान क्यों नहीं हुआ?
असल में विमान के ऊपर ऐसी परत चढ़ी होती है जो उसे ऐसे क़ुदरती झटकों से बचाती है. वरिष्ठ ब्रिटिश पायल क्रिस हैमंड बताते हैं कि आजकल विमानों में सुरक्षा के सख़्त इंतज़ाम होते हैं. असल में विमान, अक्सर बादलों के बीच सफ़र करते हैं. उनका सामना कई बार बिजली गिरने की ऐसी घटनाओं से होता है. इसीलिए आज विमान ऐसे बनाए जाते हैं कि उन पर आसमानी बिजली का असर न हो.
जब किसी विमान पर बिजली गिरती है तो वो उसकी ऊपरी परत से होती हुई गुज़र जाती है. विमान को हल्का झटका ज़रूर लगता है. मगर बिजली कितनी भी ताक़तवर क्यों न हो, उसका असर विमान के भीतर बैठे मुसाफ़िरों पर नहीं होता. विमान की परत बिजली के गुज़र जाने वाले मेटर की बनी होती है. इसलिए आसमानी बिजली भी उसमें से होकर गुज़र जाती है.
साथ ही विमान के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और ईंधन का टैंक भी ऐसी सुरक्षा परत से लैस होते हैं जो आसमानी बिजली को बेअसर कर देते हैं. विमान को सर्टिफिकेट मिलने से पहले उसकी तमाम तरह से जांच होती है. उसमें से बिजली गुज़ारकर देखा जाता है कि उस पर बिजली गिरी तो कोई नुक़सान तो नहीं होगा.
हालडोर गुडमुंडसन की ली हुई तस्वीर के बारे में क्रिस हैमंड कहते हैं कि विमान के सुरक्षा इंतज़ामों ने ठीक उसी तरह बर्ताव किया, जैसा उन्हें करना चाहिए था. बिजली विमान पर गिरी और उससे आराम से गुज़र गई. न विमान को नुक़सान हुआ, न मुसाफ़िरों को.
आज से बीस तीस साल पहले विमान इतने सुरक्षा इंतज़ामों से लैस नहीं होते थे. उस वक़्त अक्सर पायलट को सूझ-बूझ से विमान को ऐसे सदमे से बचाना होता था. ख़ुद क्रिस हैमंड एक बार ऐसे तजुर्बे से गुज़रे थे.
लेकिन, आज तकनीक इतनी तरक़्क़ी कर चुकी है कि ऐसे झटकों को झेलना, पायलट और विमान के लिए आम बात हो चुकी है. भीतर बैठे मुसाफ़िरों को तो पता भी नहीं चलता कि आसमानी बिजली उनके प्लेन पर गिरी है.
(अंग्रेजी में मूल लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी फ्यूचर पर उपलब्ध है.)
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