रोबोट्स को 'इंसान' बना रहे हैं डिज़ाइनर्स

    • Author, विलियम कुक
    • पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर

तकनीक ने हमारी ज़िंदगी को पूरी तरह बदल दिया है. इसका दख़ल इस हद तक हो चुका है कि उसने इंसान की जगह लेनी शुरू कर दी है.

इसकी सबसे उम्दा मिसाल तो इंटरनेट ही है. हम सबके बीच मौजूद होकर भी सबसे जुदा होते हैं. हर कोई अपने फोन या लैपटॉप पर कुछ ना कुछ कर रहा होता है. अगर हमें किसी की सलाह की ज़रूरत होती है या किसी चीज़ के बारे में ज्ञान हासिल करना होता है तो भी हम अपने किसी खास के पास ना जाकर गूगल बाबा की मदद लेते हैं.

अब तो हमारी मदद के लिए रोबोट हमारे परिवार के सदस्यों की तरह हो गए हैं. विदेशों में घर के बहुत से कामों में रोबोट की मदद ली जा रही है. रोबोट के बढ़ते दख़ल के साथ इंसान की चिंता भी बढ़ गई है. उन्हें लगता है कि अगर रोबोट हमारी ज़िंदगी में ऐसे ही अहम रोल निभाते रहे, तो उनके रोज़गार पर संकट आ जाएगा.

इसीलिए रोबोट को इंसानी समाज में खुले दिल से क़बूल नहीं किया जा रहा है. जबकि ये सिर्फ़ हमारी सोच का फेर है. रोबोट और इंसान दोनों की अहमियत अपनी-अपनी जगह है.

इंसान जैसे दिखने लगे हैं रोबोट

रोबोट के प्रति लोगों को अपनी सोच बदलने की ज़रूरत है. इस काम में रोबोट को बनाने वाले डिज़ाइनर अहम रोल निभा सकते हैं. इसी मक़सद से ऑस्ट्रिया की राजधानी विएना में रोबोट की एक प्रदर्शनी लगाई गई, जिसे लोगों ने ख़ूब सराहा. अब यही प्रदर्शनी दुनिया के कई दूसरे देशों में भी लगाई जाएगी. जैसे स्विट्ज़रलैंड और पुर्तगाल. अप्रैल महीने में बेल्जियम के 'एक्सेलेंट डिज़ाइन म्यूज़िम' में ये प्रदर्शनी लगाई जाएगी.

अभी तक जिन लोगों ने इस प्रदर्शनी को देखा है, उन्हें ये बहुत पसंद आई है. ये प्रदर्शनी अपने आप में ख़ास इसलिए भी है, क्योंकि ये रोबोट के प्रति हमारी सोच बदलने का काम कर रही है.

हाल के वर्षों में रोबोट ने हमारी रोज़मर्राह की ज़िंदगी में अपनी ख़ास जगह बनाकर सोच के बुनियादी ढांचे को ही बदल दिया है. शुरूआती दौर में जो रोबोट बनाए गए उनका आकार ख़ालिस मशीन जैसा था. शायद इसी वजह से इंसान इसे दिल से नहीं अपना रहा था.

अब रोबोट बनाने वाले डिज़ाइनर्स ने इन्हें नया रूप दिया है. इन्हें इंसानी शक्ल दी है ताकि इन्हें महज़ एक मशीन ना समझा जाए.

'रोबोट' शब्द चेक भाषा के शब्द 'रोबोटा' से लिया गया है. इसका मतलब है जबरन मज़दूरी कराना या बंधुआ मज़दूर. इस शब्द का इस्तेमाल साल 1920 में सबसे पहले चेक रिपब्लिक के एक नाटककार केरल केपेक ने किया था.

चूंकि रोबोट एक मशीन है, सो उसके बुनियादी अधिकार नहीं हैं. इंसान उससे जैसा चाहे, जितना चाहे काम करा सकता है. लिहाज़ा वो एक बंधुआ मज़दूर की तरह ही होता है.

ख़तरनाक मिशन पर रोबोट कर रहे हैं काम

रोबोट के प्रति हमारी सोच बदलने में फ़िल्मों ने काफ़ी अहम रोल निभाया है. रोबोट के किरदार को ध्यान में रखते हुए जितनी भी फिल्में बनीं उन सभी में रोबोट को तबाही की वजह के तौर पर पेश किया गया है. शायद इसलिए भी लोगों के मन में रोबोट को लेकर एक डर है.

विएना में लगी नुमाइश में जितने रोबोट पेश किए गए हैं, वो देखने में मशीन जैसे हैं. लेकिन, ये रोबोट बहुत से ऐसे काम कर सकते हैं, जो इंसान करता है. देखा जाए तो बहुत ख़ामोशी से रोबोट हमारी जिंदगी में शामिल हो चुके हैं. वो हर वक्त हमारे साथ मौजूद हैं. लेकिन हम उनकी मौजूदगी से बेख़बर हैं. बल्कि ये कहना ग़लत नहीं होगा कि कई ऐसे कामों के लिए आज हम रोबोट पर निर्भर हो गए हैं.

स्पेस रिसर्च में रोबोट ने बहुत अहम रोल निभाया है. अंतरिक्ष के कई ख़तरनाक मिशन पर इंसानों की जगह रोबोट भेजे गए. मंगल ग्रह के बारे में हमें जो भी जानकारी मिली है वो 'मार्शियन एक्सप्लोरर' से मिली है. ये स्पेसक्राफ्ट रोबोट ही तो हैं.

इसी तरह नासा का 'क्युरिओसिटी रोवर' लाल ग्रह पर घूम कर वहां की तस्वीरें हमें धरती पर भेज रहा है.

ये तो अभी शुरूआत है. अब तो बिना ड्राइवर वाली कारें भी सड़कों पर नज़र आने लगी हैं. उन्हें कोई और नहीं बल्कि बनावटी अक़्लमंदी वाली मशीनें यानी रोबोट चलाते हैं. वो दिन दूर नहीं जब इंटरनेट की मदद से आपके घर के सारे काम होने शुरू हो जाएंगे. इसलिए हमें अपनी सोच बदल कर रोबोट को अपना लेना चाहिए.

सेना का रोबोट से नाता

कार, रेल या किसी अन्य मशीन की तरह रोबोट सिर्फ एक मशीन नहीं, बल्कि ये वैज्ञानिकों की या रोबोटिक इंजीनियर्स की क्रिएटिविटी का कमाल हैं. आजकल रोबोट को ख़ूबसूरत बनाने के लिए जी-तोड़ मेहनत की जा रही है.

जिस तरह अन्य मशीनों के डिज़ाइन में बदलाव करने से उनकी बिक्री बढ़ जाती है. उसी तरह रोबोट की बिक्री भी तभी बढ़ेगी जब उसके डिज़ाइन में बदलाव लाकर उसे और दिलकश बनाया जाएगा.

आप ड्रोन की ही मिसाल लीजिए. इसे मिलिट्री में निगरानी के लिए ख़ूब इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन अब इसका इस्तेमाल शादी-ब्याह में फोटोग्राफ़ी के लिए भी होने लगा है. इसके बावजूद एक डर अभी लोगों के दिलों में बैठा है. उन्हें लगता है इस तरह की मशीनों की बदौलत उनकी निजता ख़त्म हो जाएगी.

वैसे भी ड्रोन का आकार किसी कीड़े के जैसा होता है. ये खालिस मेटल से बना होता है. अगर इसे ज़्यादा साज-सज्जा और रंग बिरंगे रंगों से तैयार किया जाए तो हो सकता है ये लोगों को ज़्यादा पसंद आए.

अमरीका तो रोबोट सैनिक अपनी फौज में भर्ती कर रहा है. कई मोर्चों पर अमरीका ने सैनिकों की जगह रोबोट को मिशन पर भेजा. पहले अमरीकी फौज के रोबोट ज़ख़्मी जवानों को अस्पताल तक पहुंचाते थे. बाद में इन्हीं रोबोट को टेडी बियर का रूप दे दिया गया, ताकि जवानों को ये एहसास ना रहे कि उन्हें कोई मशीन अस्पताल तक पहुंचा रही हैं.

विएना में लगी रोबोट की नुमाइश में ऐसे रोबोट भी दिखाए गए हैं, जो काम काजी मां-बाप के लिए बहुत कारआमद साबित हो सकते हैं. ये रोबोट बच्चे को दूध पिला सकते हैं, उसकी पूरी तरह से देखभाल कर सकते हैं.

इसी तरह एक 'म्यूस्यू' नाम का एजुकेशनल और सोशल रोबोट है. इस रोबोट की ख़ासियत है कि ये इंसान से राब्ता कर सकता है. अपने आस पास के माहौल के मुताबिक़ ख़ुद को ढाल सकता है. इसकी मार्केटिंग इंसान के दोस्त के तौर पर की जा रही है. इस रोबोट का आकार चुलबुले खिलौने जैसा है.

इस प्रदर्शनी में बहुत से रोबोटिक पालतू भी मिल जाएंगे. यहां आप रोबोटिक बेबी सील के साथ खेल सकते हैं जिसका नाम है 'पारो'. ये रोबोटिक पालतू असली पालतू से सस्ते हैं और इनका रख-रखाव भी आसान है.

इंसान से अधिक स्मार्ट हैं रोबोट

रोबोट कई मामलों में इंसान से ज़्यादा स्मार्ट होते हैं, इसमें कोई दो राय नहीं.

अब से बीस साल पहले ही आईबीएम के 'डीप ब्लू कंप्यूटर' ने वर्ल्ड चैंपियन गैरी कास्परोव को शतरंज के खेल में हरा दिया था. 2016 में गूगल के 'अल्फागो' ने वर्ल्ड चैंपियन ली सेडोल को हराया था.

रोबोट का भोंडा डिज़ाइन ही सिर्फ़ एक ऐसी वजह है जो इसे इंसानों से दूर करता है. अगर डिज़ाइनर इसके बुनियादी ढांचे में बदलाव करके इसे इंसान से सीधे राब्ता करने वाला बना दें, तो ये इंसानी ज़िंदगी का अटूट हिस्सा बन जाएंगे.

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