You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
रोबोट से कितना सेक्स और कितना शोषण
- Author, जेन वेकफ़ील्ड
- पदनाम, टेक्नॉलॉजी रिपोर्टर
रोबोट्स के बारे में लिखने वाले एक लेखक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बच्चों की तरह दिखने वाले सेक्स रोबोट के आयात पर रोक लगाई जानी चाहिए.
प्रोफ़ेसर नोएल शार्की का कहना है कि एक समाज के तौर पर हमें हर प्रकार के सेक्स रोबोट के असर के बारे में सोचना होगा.
रेस्पॉन्सिबल रोबोटिक्स ने हाल में इस विषय पर एक परामर्श शिविर का आयोजन किया था.
प्रो. शार्की का कहना है कि फिलहाल कुछ कंपनियां ही रोबोट्स बना रही हैं, लेकिन उनका कहना है कि रोबोट क्रांति आ रही है इससे सब कुछ बदल सकता है.
उन्होंने कहा कि 'आवर सेक्शुअल फ्यूचर विद रोबोट्स' नाम की ये रिपोर्ट उस विषय पर लिखी गई है जिस पर अभी कम ही बातचीत होती है.
सवाल
रिपोर्ट के अनुसार कितने लोग इस तरह के रोबोट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं ये जानना मुश्किल है क्योंकि रोबेट्स बनाने वाली कंपनियां इसके सही आंकड़े जारी नहीं करतीं.
हालांकि प्रो, शार्की का कहना है कि वक़्त आ गया है कि हम भविष्य के उस समय के बारे में सोचें जब इंसान और रोबोट्स के बीच सेक्स संभव होगा.
उन्होंने कहा, "कानून बनाने वालों को इस बारे में सोचना होगा और लोगों को भी इस बारे में सोचना होगा कि किस बात की अनुमति दी जा सकती है और किसकी नहीं."
वो कहते हैं, "एक समाज के तौर पर हमें सोचना होगा कि हम इस बारे में क्या करना चाहते हैं. मुझे इसके जवाब नहीं पता- मैं तो केवल सवाल कर रहा हूं."
बाज़ार
एंड्रॉएड लव डॉल, सेक्स बॉट और ट्रू कंपेनियन उन कंपनियों में हैं जो सेक्स रोबोट बनाती हैं. इनमें से अधिकतर ने इससे पहले सिलिकॉन का इस्तेमाल कर इंसान की तरह दिखने वाले सेक्स डॉल बनाए हैं और अब ये कंपनियां ऐसी डॉल बेचना चाहती हैं जो बात कर सकें और चल-फिर सकें.
फिलहाल इनमें से सबसे उन्नत किस्म की सेक्स डॉल रील डॉल, सैन डिएगो की कंपनी एबिस्स क्रिएशन्स बनाती हैं जो इस साल के आख़िर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वाली एक सेक्स डॉल बाज़ार में उतारने वाली है.
हार्मोनी नाम का ये रोबोट टैबलेट ऐप के ज़रिए अपना सिर और आंखें हिलाने और बात करने में सक्षम है.
कंपनी पहले ही ये ऐप रिलीज़ कर चुकी है. इसके ज़रिए डॉल का मूड और उसकी आवाज़ को कंट्रोल किया जा सकता है.
रिपोर्ट में उन काम धंधों के बारे में बताया गया है जिनमें सेक्स रोबोट्स को लगाया जा सकता है -
- रोबोट्स को वेश्यालयों में 'यौनकर्मियों' की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है.
- बुज़ुर्ग व्यक्ति इसे अपने साथी के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं.
- सेक्शुअल हीलिंग यानी इलाज के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है.
- बलात्कारियों और बच्चों का यौन शोषण करने वालों के लिए थेरपी के तौर पर इनका उपयोग संभव है.
प्रो. शार्की के अनुसार यौन शोषण करने वालों के लिए इसके इस्तेमाल पर सवाल उठाया जाना चाहिए.
बच्चों की तरह दिखने वाले सेक्स रोबोट्स बाज़ार में हैं और फिलहाल कनाडा की एक कोर्ट इस बारे में विचार कर रही है कि इस तरह के रोबोट को ख़रीदना सही है या नहीं.
न्यूफाउंडलैंट के रहने वाले केनेथ हैरीसन ने जापान की कंपनी हारूमी डिज़ाइन्स से एक डॉल ख़रीदी. ये कंपनी कनाडा की वॉचलिस्ट में हैं और इस डॉल को एयरपोर्ट पर ही बरामद कर लिया गया. हैरीसन पर चाइल्ज पोर्नोग्राफी रखने के आरोप लगाए गए हैं.
एशिया में इस तरह के वेश्यालय हैं जहां सेक्स रोबोट्स का इस्तेमाल किया जाता है. रिपोर्टों की मानें को बार्सिलोना में इस तरह की डॉल बनाने वाली एक कंपनी वेश्यालय चला रही थी, हालांकि इस ख़बर की पुष्टि नहीं हो पाई है.
मांग
डे मॉन्टफोर्ट विश्वविद्यालय में रोबोट की नैतिकता पर काम करने वाली डॉक्टर कैथलीन रिचर्डसन मानती हैं कि बच्चों की तरह दिखने वाले सेक्स रोबोट्स पर रोक लगाई जानी चाहिए लेकिन उन्होंने सभी तरह के सेक्स रोबोट्स पर रोक लगाने की मांग नहीं की है.
वो कहती हैं, "यहां पर समस्या डॉल में नहीं है बल्कि सेक्स के व्यवसाय में है. सेक्स रोबोट्स एक तरह की पोर्नोग्राफी ही तो हैं."
डॉ रिचर्डसन मानती हैं कि रोबोट्स के कारण "समाज में व्यक्ति अलग-थलग पड़ जाएगा."
वो इस रिपोर्ट का आलोचना करती हैं और कहती हैं इसमें रोबोट्स और सेक्स से जुड़ी सभी बातों पर ग़ौर नहीं किया गया है.
वो पूछती हैं, "रिपोर्ट के कवर पर एक पुरुष रोबोट की तस्वीर है जबकि हम जानते हैं कि ये पूरा बाज़ार मुख्य रूप से सेक्स डॉल से भरा हुआ है?"
वो कहती हैं, "इससे ऐसा आभास मिलता है कि ये सोच जेंडर न्यूट्रल है, जबकि सच ये है कि महिलाएं इस तरह के डॉल नहीं खरीद रहीं. ये बाज़ार पुरुष और सेक्स को ले कर पुरुष मानसिकता पर आधारित है."
प्रो. शार्की कहते हैं, आज के वक़्त में सेक्स डॉल बेचने वाले अपने ग्राहकों को सेक्स डॉल के बारे में जो यकीन दिलाना चाहते हैं और जो वाकई में उन्हें उपलब्ध करा रहे हैं उसमें बड़ा फर्क है.
वो कहते हैं, "कंपनियां चाहती हैं को वो रोबोट के ज़रिए अपने उपभोक्ताओं को इंसानी सेक्स जैसा अनुभव दे सकें. लेकिन रोबोट्स प्रेम का अनुभव नहीं करते, वो क़रीब होने और भावनात्मक तौर पर आपसे नहीं जुड़ते. जो एक काम रोबोट्स बेहतर कर सकते हैं वो है इस झूठ को दर्शाना."
फिलहाल विकसित हो रही सेक्स डॉल आने वाले समय में सेक्स रोबोट्स की शक्ल ले लेंगी हैं और इन्हें बनाने की प्रक्रिया हाल के सालों में जटिल होती जा रही हैं. अधिकतर सेक्स डॉल में अब सिलिकॉन की त्वचा, मेटल का ढांचा और असल दिखने वाले बाल और आंखों का इस्तेमाल किया जा रहा है.
आम तौर पर ये महिला की शक्ल की होती हैं हालांकि सिंथेटिक्स कंपनी को पुरुष सेक्स डॉल में थोड़ी सफलता मिली है.
लेकिन प्रो. शार्की को इंसान की तरह दिखने वाली ये डॉल आने वाले समय में क्या रुख लेंगी इस पर संदेह है.
वो कहते हैं, "मैं अगले 50 सालों तक इन्हें इंसान की तरह बनता नहीं देख पा रहा हूं. ये हमेशा ही थोड़ी डरावनी रहेंगी और फिलहाल उनके बात करने का फीचर भी बढ़िया नहीं है."
डॉक्टर रिचर्डसन भी इस रोबोर्ट के मुख्यधारा में शामिल होने की संभावना पर सवाल करती हैं.
वो कहती हैं, "रिपोर्ट के अनुसार ऐसे रोबोट्स बनाए जा सकते हैं जो इंसान की ही तरह प्रतिक्रिया दें लेकिन तकनीक के लिहाज़ से ऐसा करना काफी जटिल है."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)