हवा से रोज़ 2000 लीटर पानी निकालेगी ये मशीन

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- Author, ब्रायन लुफ्किन
- पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर
जल ही जीवन है. ये कहावत बहुत पुरानी है.
तीसरा विश्व युद्ध पानी के लिए होगा. ये बात भी पिछले कई दशक से कही जा रही है.
आज दुनिया की आबादी क़रीब साढ़े सात अरब है और तेज़ी से बढ़ रही है. अब सवाल ये है कि दुनिया के हर इंसान को उसकी ज़रूरत का पानी कैसे मुहैया कराया जाएगा.
नदियों की धार धीमी हो रही है. झीलें, तालाब, बावड़ियां और कुएं सूख रहे हैं. नतीजा, पानी की भारी किल्लत. शहरों में अक्सर पानी के लिए लंबी लाइनें दिखती हैं. गर्मी के दिनों में पानी के लिए ख़ूनी लड़ाइयां हो रही हैं.

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पानी का बंटवारा बना विवाद का कारण
बहुत से देशों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर तनातनी बढ़ रही है. भारत का पाकिस्तान और चीन से नदियों के पानी को लेकर झगड़ा बढ़ रहा है. पानी बहुत बड़ा हथियार बन गया है. चीन अगर ब्रह्मपुत्र का पानी रोक लेता है तो भी दिक़्क़त और छोड़ता है तो पूर्वोत्तर के राज्यों में बाढ़ आ जाती है.
इसी तरह पाकिस्तान और भारत के बीच सिंधु जल समझौता, लगातार तनातनी की वजह बना हुआ है.
मिस्र का वरदान कही जाने वाली नील नदी का कंट्रोल इथियोपिया के पास है.
बारिश की कमी से फ़सलें तबाह हो रही हैं. सूखे से किसान बर्बाद हो रहे हैं. नदियों का पानी सूख रहा है.
दुनिया भर में 160 देश ऐसे हैं, जो अपनी पानी की ज़रूरत पूरी करने के लिए दूसरे देशों पर निर्भर हैं. यानी वो पानी का आयात करते हैं.
सब की ज़रूरत भर का पानी मुहैया कराना आज दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है.
निदान क्या है?

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तकनीक पूरी करेगी पानी की किल्लत
तमाम एक्सपर्ट इस सवाल का जवाब तलाश रहे हैं. ऐसी ही एक विशेषज्ञ हैं ज़ेनिया टाटा. ज़ेनिया एक्सप्राइज़ नाम की संस्था से जुड़ी हैं, जो लोगों की भलाई के लिए काम करती है. ज़ेनिया का मानना है कि हम तकनीक की मदद से पानी की किल्लत को दूर कर सकते हैं.
ज़ेनिया मानती हैं कि ऐसी तकनीक विकसित की जा सकती है, जिससे लोग अपनी पानी की ज़रूरत ख़ुद ही पूरी कर लें.
इस के लिए ज़ेनिया की संस्था एक्सप्राइज़ ने वाटर एबंडंस प्रोजेक्ट शुरू किया है. इस प्रोजेक्ट का मक़सद तकनीकी मदद से सब की ज़रूरत भर का पानी मुहैया कराना है.
एक्सप्राइज़ ने 17.5 लाख डॉलर की एक इनामी योजना शुरू की है. इसके तहत दुनिया भर के इंजीनियरों को एक ऐसी मशीन बनाने की चुनौती दी गई है, जो हवा में मौजूद नमी से पानी निकाल सके.

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रोज़ हवा से दो हज़ार लीटर पानी
एक्सप्राइज़ की कोशिश है ऐसी मशीन बनाने की, जो रोज़ाना हवा से दो हज़ार लीटर पानी निकाल सके. ये मशीन पेट्रोल या कोयले के बजाय हवा या सूरज की रौशनी से चलने वाली हो.
अगर इंजीनियर ऐसी मशीन बना लेते हैं तो इससे सिर्फ़ 70 पैसे में एक लीटर पानी निकाला जा सकेगा. ये मशीन ग़रीबों की पानी की ज़रूरत पूरी करने में बहुत मददगार साबित हो सकती है.
इस प्रोजेक्ट के तहत बनने वाली मशीनें अगले साल अगस्त महीने में दुनिया के सामने लाई जाएंगी.
भले ही आप को हवा से पानी निकालने का ख़याल अजीब लगे. मगर बहुत से रिसर्चर इस के लिए काफ़ी दिनों से काम कर रहे हैं.
अमरीका के बर्कले स्थित कैलिफ़ोर्निया यूनिवर्सिटी के उमर याग़ी ऐसे ही लोगों में से एक हैं. उन्होंने धातुओं से एक स्पंज जैसा दिखने वाला पाउडर तैयार किया है, जो अपने खाली पोरों में हवा से पानी को सोखकर जमा करता है.

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पाउडर सोखेगा हवा से पानी
उमर याग़ी के तज़ुर्बे से पता चला है कि ऐसे एक किलो पाउडर से 12 घंटे में तीन लीटर पानी हवा से सोखा जा सकता है.
दुनिया के वो इलाक़े जहां अक्सर बरसात होती रहती है. हवा में नमी रहती है, वहां पर तो इस जादुई पाउडर से और भी पानी जमा किया जा सकता है.
धरती पर इंसान के वजूद के लिए साफ़, मीठा पानी सबसे बुनियादी ज़रूरत है. आज इक्कीसवीं सदी में इसकी अहमियत और भी बढ़ गई है.
तो क्या हम हर इंसान को उसकी ज़रूरत भर का पानी मुहैया करा सकेंगे?
अच्छी बात ये है कि इंसान की अक़्ल अब तक हर चुनौती पर जीत हासिल करती रही है.
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