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कुछ ही इंसान बाएं हाथ का इस्तेमाल करते हैं, पर क्यों?
- Author, हना फ़्राय
- पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर
छोटे बच्चे जब अपने हाथों से चीजों को पकड़ना सीखते हैं तो दोनों हाथों का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन जैसे जैसे ताक़त बढ़ती जाती है वो एक हाथ का इस्तेमाल करने लगते हैं.
कुछ बच्चे अपने दाएं हाथ का इस्तेमाल ज़्यादा करते हैं तो कुछ बाएं का. हम बच्चों को दाएं हाथ इस्तेमाल कराने की कोशिश करते हैं, क्योंकि लोग इसी हाथ का इस्तेमाल ज़्यादा करते आए हैं.
लेकिन इसके बावज़ूद कुछ बच्चे अपने बाएं हाथ का इस्तेमाल करते हैं. अगर आपका बच्चा भी ऐसा करता है वो अकेला ऐसा करने वाला नहीं है. ऐसे बहुत से बच्चे हैं. लेकिन बायां हाथ इस्तेमाल करने वालों की तादाद ज़रा कम ही है.
आख़िर क्या वजह है कि बाएं हाथ का इस्तेमाल करने वालों की तादाद पूरी आबादी में बेहद कम होती है?
दरअसल हमारे पूरे शरीर में एक ख़ास तरह का असंतुलन है. मिसाल के लिए हम बाएं हाथ से अपना फोन उठाते हैं और दाएं को कान पर लगा कर सुनते हैं.
जब हमें फोन पर बात करते करते कुछ लिखना होता है तो बाएं कान पर फोन लगाते हैं और दाएं हाथ से लिखना शुरू कर देते हैं.
इससे साफ़ ज़ाहिर होता है कि हमें जिस तरह से काम करने में आसानी होती है, वैसे ही अपने शरीर के अंगों का इस्तेमाल करते हैं.
मोटे तौर पर 40 फ़ीसद लोग अपने बाएं कान का, 30 प्रतिशत लोग बाईं आंख का, और 20 फीसद लोग बाएं पैर का इस्तेमाल करते हैं.
लेकिन जब बात आती है हाथ की, तो सिर्फ 10 फीसद लोग ही बाएं हाथ का इस्तेमाल ज़्यादा करते हैं.
सवाल उठता है ऐसा क्यों है?
बाएं के मुक़ाबले दाएं हाथ का इस्तेमाल सिर्फ़ इंसान नहीं करते. हमारे और भी भाई-बंधु यही करते हैं, जैसे कि चिंपांज़ी.
वो किसी काम के लिए दायां, तो किसी काम के लिए बायां हाथ इस्तेमाल करते हैं. हालांकि वैज्ञानिकों ने अपने तजुर्बों में पाया है कि आधे चिंपांज़ी बाएं हाथ का तो आधे दाएं हाथ का इस्तेमाल करते हैं.
मगर दस के मुक़ाबले एक इंसान ही बाएं हाथ का इस्तेमाल करता है.
आख़िर इंसानों ने दाएं हाथ के इस्तेमाल पर ज़ोर देना कब से शुरू कर दिया?
हम ने अपने हाथों का इस्तेमाल कैसे करना शुरू किया, ये जानने के लिए हमें इंसान के विकास की बुनियाद में जाना होगा.
आदि मानव के रिश्तेदार रहे 'निएंडरथल' मानव के दांतों से इसका इशारा मिलता है. उन्होंने अपने हाथों का बख़ूबी इस्तेमाल करना सीख लिया था. हालांकि वो थोड़े फूहड़ किस्म के भी थे.
अपने हाथों का इस्तेमाल उन्हेंने भले ही करना सीख लिया था, लेकिन, मांस वो अपने दांतों से नोंच कर ही खाते थे. अलबत्ता गोश्त काटने के लिए छुरा उसी हाथ में पकड़ते थे, जिसमें गिरफ़्त ज़्यादा थी.
वो जिस तरह के औज़ार इस्तेमाल करते थे, उनकी बनावट को देखकर भी अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि वो कौन से हाथ में खाना पकड़ते थे और कौन से हाथ से औज़ार का इस्तेमाल करते थे.
रिसर्च करने वालों ने पाया है कि निएंडरथल मानव भी अपने दाएं हाथ का इस्तेमाल ज़्यादा करते थे. उन में भी दाएं और बाएं हाथ का इस्तेमाल करने का अनुपात दस में से एक था. जो कि आज के इंसानों में देखने को मिलता है.
रिसर्चर आज भी ये पता लगाने की कोशिश में हैं कि हमारे डीएनए का कौन सा हि्स्सा इस बात के लिए उकसाता है कि हम दाएं या बाएं हाथ का इस्तेमाल ज़्यादा करें. लेकिन जवाब आज भी किसी के पास नहीं है.
सवाल ये भी है कि जो लोग अपने बाएं हाथ का इस्तेमाल करते हैं, क्या उनके जीवन में इसका कोई असर पड़ता है? इस विषय पर लंबी बहस चली आ रही है.
कहा जाता है कि हमारे बाएं तरफ़ का दिमाग़ दाएं हाथ को कंट्रोल करता है और दिमाग़ का दायां हिस्सा बाएं हाथ को काबू में रखता है.
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के प्रोफ़ेसर और मनोविज्ञानिक क्रिस मैक्मेनस मानते हैं कि बाएं हाथ का इस्तेमाल करने वाले लोग ज़्यादा समझदार होते हैं. उनके पास दूसरे आम इंसानों के मुक़ाबले ज़्यादा क़ाबिलियत होती है.
हालांकि क्रिस की इस बात से दीगर रिसर्चर इत्तेफ़ाक़ नहीं रखते.
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफ़ेसर डोरोथी बिशप, ख़ुद खब्बू हैं. यानी वो बाएं हाथ का इस्तेमाल करती हैं. उन्हें लगता है कि वो औरों से अलग हैं.
डोरोथी कहती हैं कि बाएं हाथ का इस्तेमाल करने वालों के साथ ये मिथक जुड़े हैं कि उन्हें डिस्लेक्सिया और ऑटिज़्म जैसी बीमारियां जल्दी होती हैं.
जबकि वो ये भी कहती हैं कि अच्छे शिल्पकार और संगीतकार ज़्यादातर बाएं हाथ का इस्तेमाल करने वाले ही हैं.
लेकिन जब प्रोफ़ेशर डोरोथी बिशप आंकड़ों पर नज़र डालती हैं तो वो इस बात से ख़ुद को अलग कर लेती हैं. उनका कहना है जो लोग इस तरह की बातें फैलाते हैं वो दरअसल भेदभाव का नज़रिया रखते हैं.
हालांकि वो इस बात पर रज़ामंदी ज़ाहिर करती हैं कि बाएं हाथ वालों को कुछ खास बीमारियां जैसे डाउन्स सिंड्रोम, या मिर्गी और सेरेब्रल पालसी दाएं हाथ वालों के मुक़ाबले ज़्यादा होती हैं.
बाएं हाथ वालों के बर्ताव और उनकी समझ को लेकर बहुत तरह की बातें आम लोगों के बीच प्रचलित हैं. लेकिन इनका दिमाग़ आख़िर कैसे काम करता है? क्यों ये हरेक काम के लिए सिर्फ अपने बाएं हाथ का ही इस्तेमाल करते हैं?
ये जानने के लिए आज भी बहुत सी रिसर्च की जा रही हैं. लेकिन ज़्यादातर तजुर्बे दाएं हाथ से काम करने वालों पर किए जा रहे हैं.
जब तक बाएं हाथ से काम करने वालों पर ये तजुर्बे नहीं किये जाएंगे, शायद इस राज़ पर से पर्दा नहीं उठ सकेगा.
साइंस ने आज इतनी तरक़्क़ी कर ली है कि बच्चे की पैदाइश से पहले ही जान सकते हैं कि आपका बच्चा दुनिया में आकर दाएं हाथ का इस्तेमाल करेगा या बाएं हाथ का.
उत्तरी आयरलैंड की क्वींस यूनिवर्सिटी के डॉक्टर पीटर हेपर ने इस बारे में पता लगाया है.
उन्होंने गर्भ में पल रहे बच्चों का अल्ट्रासाउंड किया. देखा ये गया दि दस में से नौ बच्चे दायां अंगूठा चूसते हैं. वहीं सिर्फ़ एक को बायां अंगूठा चूसते देखा गया.
जन्म के बाद भी देखा यही गया कि जिन बच्चों ने दाएं हाथ को तरजीह दी, वो उसी पर अटल रहे. यही हाल बायां अंगूठा चूसने वालों का हुआ. यानी मां के गर्भ में ही तय हो गया था कि बच्चा दाएं हाथ वाला होगा या बाएं हाथ वाला.
बहरहाल बाएं हाथ का इस्तेमाल करने वाले अगर बहुत समझदार और रचनात्मक मिज़ाज के होते हैं, तो फिर उनकी तादाद इतनी कम क्यों है?
ये आज भी एक पहेली ही बना हुआ है. इसका जवाब तलाशने के लिए तमाम तजुर्बों का सिलसिला जारी है.
तब तक आप इत्मीनान से जिस हाथ से काम करने में आसानी हो, उसका इस्तेमाल करते रहें.
(अंग्रेजी में मूल लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी पर उपलब्ध है.)
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