दूसरे पर छींटाकशी के क्या कोई फायदे भी हैं?

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- Author, ज़ारिया गॉर्वेट
- पदनाम, बीबीसी वर्कलाइफ़
तीन मुर्गियां एक कतार में डांस करती हैं. डायना रॉस के गाने "अपसाइड डाउन" की ताल के साथ उनके शरीर झूमते हैं लेकिन सिर बिल्कुल स्थिर रहते हैं.
यह कोई सपना नहीं, बल्कि लग्ज़री कार कंपनी मर्सिडीज बेंज़ का विज्ञापन है.
2013 में "इंटेलीजेंट ड्राइव" सिस्टम को प्रोमोट करने के लिए मर्सिडीज ने यह वायरल एड कैंपेन किया था.
इसमें लगता है जैसे मुर्गियों ने बैले डांस में महारत हासिल कर रखी हो, जिससे उनके सिर हमेशा स्थिर रहते हैं.
इस विज्ञापन के ज़रिये मर्सिडीज-बेंज़ यह बताना चाहती थी कि उसकी गाड़ियों में "मैजिक बॉडी कंट्रोल" है.
मर्सिडीज-बेंज़ की एक प्रतिद्वंद्वी कंपनी ने इसे उकसावे के तौर पर लिया था.
जगुआर ने कुछ महीने बाद एक विज्ञापन जारी किया. इसमें भी एक मुर्गी डांस करती थी जिसे "मर्सिडीज की तरह" बताया गया.
एक जगुआर उस मुर्गी को झपटकर खा लेता है. फिर विज्ञापन की किलर लाइन आती है- "मैजिक बॉडी कंट्रोल? हमें बिल्ली जैसी फुर्ती पसंद है."
खेल के मैदान तक सीमित नहीं
छींटाकशी या फ़ब्ती कसने को आम तौर पर खिलाड़ियों के आक्रामक अहंकार से जोड़ा जाता है, लेकिन मार्केटिंग से लेकर राजनीति और कानून तक दूसरे क्षेत्रों में भी इसके उदाहरण कम नहीं हैं.
पुराने राजा भी ऐसा करते थे. मैसेडोनिया के राजा फिलिप द्वीतीय ने अपने दुश्मन राजा को यह संदेश भिजवाया था कि अगर उन्होंने अपनी सेना उनकी जमीन पर उतारी तो उनका समूल नाश कर दिया जाएगा.
विरोधी राजा ने सिर्फ़ एक शब्द में जवाब भिजवाया था- "अगर".
दफ़्तरों में भी सहकर्मियों के बीच एक-दूसरे पर तंज़ कसते हुए छींटाकशी या मौखिक तकरार आम है.

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जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के मैनेजमेंट विशेषज्ञ जेरेमी यिप ने पेनसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के साथ मिलकर पता लगाने की कोशिश की कि फॉर्च्यून 500 कंपनियों के कर्मचारियों के बीच छींटाकशी कितनी प्रचलित है.
उन्होंने 143 लोगों से उनके अनुभव पूछे. पता चला कि 61 फीसदी लोगों को पिछले तीन महीनों में हुई तकरार की बातें याद थीं.
यिप कहते हैं, "यह बहुत आम है और अक्सर होता है. यह वास्तव में चौंकाने वाला है."
इस तरह की आक्रामक बातें किसे प्रभावित करती हैं? क्या हम सभी को मखौल उड़ाने की अपनी कला को मांजना चाहिए?
छींटाकशी से प्रेरणा
शोधकर्ताओं ने "Trash talk" को "अपने बारे में बड़बोली टिप्पणी या विरोधी के बारे में अपमानजनक टिप्पणी" के रूप में परिभाषित किया है.
1999 में लंदन में नई सहस्राब्दी के जश्न की तैयारी के दौरान विशालकाय "लंदन आई" फ़ेरीस व्हील का निर्माण हो रहा था. इसे ब्रिटिश एयरवेज़ ने प्रायोजित किया था.
आखिरी चरणों में पता चला कि यह काम समय पर पूरा नहीं हो सकता. इससे लंदन एयरवेज की प्रतिद्वंद्वी कंपनी वर्जिन अटलांटिक के अरबपति मालिक रिचर्ड ब्रैनसेन चहक उठे.
उन्होंने अधूरे कंस्ट्रक्शन के ऊपर हवाई जहाज जैसा एक बड़ा गुब्बारा लगवाया जिस पर लिखा था- "ब्रिटिश एयरवेज इसे खड़ा नहीं कर सकी."

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क्या इस तरह की छींटाकशी लोगों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है? यह जानने के लिए यिप और उनके सहयोगियों ने 178 छात्रों को एक ऑनलाइन गेम खेलने के लिए बुलाया.
गेम शुरू होने से पहले आधे छात्रों के बीच सामान्य बातें करवाई गईं, जबकि दूसरे समूह के छात्रों ने एक-दूसरे पर फ़ब्तियां कसीं, जैसे- "हे डमी, तुम हारने जा रहे हो. अंत में तुम बुरी तरह हारोगे".
सबको बताया गया था कि जीतने पर उनको एक डॉलर का इनाम दिया जाएगा.
अविश्वसनीय रूप से, जिनके ऊपर छींटाकशी हुई थी, उन्होंने दूसरे समूह के छात्रों से बेहतर प्रदर्शन किया.
यिप कहते हैं, "यह बहुत दिलचस्प है, क्योंकि हम तो सोचते थे कि छींटाकशी दूसरे आदमी को नीचा दिखाने और उनके प्रदर्शन को बिगाड़ने का तरीका है. लेकिन हमने पाया कि अगर आपके साथ ऐसा होता है तो विरोधी को पछाड़ने के लिए आप ज़्यादा प्रेरित होते हैं."
दफ़्तर की होड़
दफ़्तर प्रतियोगिता के केंद्र बन चुके हैं, क्योंकि संसाधन सीमित हों तो ऐसा होना लाजिमी है. यहां संसाधन का मतलब बोनस, तरक्की और रोमांचक परियोजनाओं में काम के मौके से है.
दफ़्तरों में छींटाकशी के जोख़िम हैं. यिप कहते हैं, "इससे तुरंत ही प्रतिद्वंद्विता पैदा हो सकती है."
सहकर्मियों के साथ प्रतियोगिता पहले से हो सकती है, लेकिन प्रतिद्वंद्विता दूसरी चीज है. प्रतिद्वंद्विता होने पर वे बस आपको हारते हुए ही देखना चाहेंगे.
दूसरा ख़तरा यह है कि इससे गंदे तौर-तरीकों की शुरुआत हो जाती है.
यिप की टीम ने पाया कि जिन छात्रों ने गंदी बातें की थीं उनके अपने प्रतिद्वंद्वियों को हराने के लिए धोखा देने की अधिक संभावना थी.

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ध्यान भटकाने की कला
इसके फायदे भी कम नहीं. आप अपने विरोधी को उसी की भाषा में जवाब दे सकते हैं. दूसरे, यह भी मुमकिन है कि इससे मिली प्रेरणा से आप दोनों को फायदा हो.
अगर ऐसा न हो तो भी इसका एक बड़ा फायदा यह है कि आपका विरोधी पूरी तरह विचलित हो सकता है.
यिप और उनकी टीम ने यह भी परीक्षण किया कि क्या आक्रामक बातें रचनात्मकता को भी प्रभावित करती हैं.
उन्होंने पाया कि शोधकर्ताओं के उकसावे के बाद क्रिएटिव लोगों का प्रदर्शन बहुत ख़राब हो गया. इसकी वजह शायद यह है कि रचनात्मक कार्यों में बहुत दिमाग लगाने की ज़रूरत होती है.
इसमें एक साथ कई विचारों पर काम करना पड़ता है और फिर उनको एक नये तरीके से पेश करना पड़ता है.
भड़काऊ बातों से सभी विचारों को एक साथ सही जगह पर रखना कठिन हो जाता है.
शोधकर्ताओं ने जब लोगों से पूछा कि आक्रामक बातें आपके काल्पनिक प्रतिद्वंद्वी को कैसे प्रभावित कर सकती हैं तो उनकी उम्मीदों और वास्तविकता में बहुत अंतर दिखा.
यिप कहते हैं, "हम सटीक रूप से अनुमान लगाते हैं कि यह ध्यान भटकाने वाला है, लेकिन हम यह अनुमान लगाने में विफल रहते हैं कि यह प्रेरक भी हो सकता है."
कनेक्टिकट यूनिवर्सिटी की कैरेन मैकडरमोट के नेतृत्व में हुए एक अन्य अध्ययन से साबित हुआ कि छींटाकशी से वास्तव में निराशा हो सकती है.
बदसलूकी से खिलाड़ी शर्म और गुस्सा महसूस करते हैं. यह विचलित करने वाला होता है और खिलाड़ियों का प्रदर्शन बिगड़ता है.

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ख़ुद को ऊपर करें, दूसरों को नीचे न करें
क्या यह अनैतिक काम दफ़्तरों में भी कारगर होता है? यदि हां तो इसे सबसे प्रभावी तरीके से कैसे किया जा सकता है?
आक्रामक छींटाकशी पर अभी तक बहुत कम अध्ययन हुआ है. दफ़्तरों के परिवेश में कर्मचारियों पर इसके असर की जांच किसी ने नहीं की है, लेकिन मैकडरमोट को लगता है कि उनके अध्ययन से आगे का कुछ रास्ता बन सकता है.
वह कहती हैं, "मुझे लगता है कि ये प्रभाव कुछ हद तक दफ़्तरों में भी प्रभावी होंगे. वहां भटकाव का तत्व ज़रूर कम हो सकता है, क्योंकि आप ऐसी बातें करेंगे और फिर अपने डेस्क पर वापस चले जाएंगे और इसके बारे में सोचेंगे."
उनको लगता है कि बुरी बातों का भावनात्मक असर लंबे वक़्त तक रहता है और उनकी प्रेरणा को अच्छे या बुरे तरीके से प्रभावित करता है.
मैकडरमोट ने अपने अध्ययन में इस विषय को बड़ी सावधानी से चुना था क्योंकि "इसमें महिलाओं और समलैंगिक लोगों के प्रति अपशब्द हो सकते हैं.
वह कहती हैं, "मैं किसी को ठेस नहीं पहुंचाना चाहती थी, बस उनकी प्रतिक्रिया लेना चाहती थी."
बुली बनने के ख़तरे से बचने का आसान तरीका यह है कि ख़ुद को बेहतर करने के बारे में बात करें, न कि दूसरों को नीचा दिखाने वाली बातें करें.
मैकडरमोट माहौल को हल्का-फुल्का रखने और सामने वाले व्यक्ति के साथ सहज रिश्ता बनाने की अहमियत पर भी जोर देती हैं.
बेतरतीब ढंग से किसी अनजाने व्यक्ति पर फ़ब्तियां कसने से दोस्ती की कोई गुंजाइश नहीं बचती.
कंपनियों में होड़ पैदा करें
यिप का सुझाव है कि अपने सहकर्मियों के साथ इस तरह की बातों से परहेज करें और इस तरकीब का इस्तेमाल अपने और दूसरे संगठन के बीच प्रतिद्वंद्विता विकसित करने में करें.
"कर्मचारियों के बीच छींटाकशी के नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं क्योंकि दफ़्तर में लोग एक-दूसरे पर निर्भर करते हैं और किसी परियोजना में उनके मिलकर काम करने की ज़रूरत होती है."
उनके अध्ययन में यह भी पता चला था कि यदि किसी प्रोजेक्ट में काम कर रहे कुछ सहकर्मी असभ्य हो जाएं तो लोग उसमें मेहनत करना कम कर देते हैं.
यिप कहते हैं, "यदि आपके पास गूगल के कर्मचारी हैं और आप उनको प्रेरित करना चाहते हैं तो आप अमेज़ॉन या एप्पल के बारे में आक्रामक बातें कर सकते हैं और इसके कुछ फायदे भी दिख सकते हैं."
यदि इसका सावधानी से इस्तेमाल किया जाए तो कुछ स्थितियों में फायदा हो सकता है. लेकिन आपको नियमों की जानकारी होनी चाहिए, वरना आप बड़े ऑफिस की जगह कोर्ट में होंगे.
मुहम्मद अली कहते थे, "यह कहो कि मैं दुनिया का बादशाह हूं. यह मत कहो कि मैं उसे इतना मारूंगा कि उसे अपना हैट टांगने के लिए शूहॉर्न की ज़रूरत पड़ जाएगी!"
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