परिवारों में बच्चों की जगह ले रहे हैं पालतू जानवर

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- Author, जेसिका क्लेन
- पदनाम, बीबीसी वर्कलाइफ़
अमरीकी राज्य मिशिगन के यप्सिलेंटी में लिसा रोचोव अपने पार्टनर कैमरन व्हीलर के साथ बैठी हैं. उनका हस्की पिल्ला ऐरी उनकी गोद में है और सोफ़े पर मंडराने की कोशिश कर रहा है.
ऐरी परिवार का नया सदस्य है. रोचोव और व्हीलर पहली बार 'माता-पिता' बनकर संतुष्ट दिख रहे हैं.
ऐरी उनकी 'औलाद' है. 24 साल की रोचोव सामाजिक कार्य में स्नातक कर रही हैं और 26 साल के व्हीलर हाई स्कूल में इतिहास के शिक्षक हैं. नौ हफ़्ते का ऐरी उनके परिवार को पूरा करता है.
रोचोव कहती हैं, "मुझे लगता है कि मां बनने के लिए मुझे अपनी ज़िंदगी का काफ़ी कुछ छोड़ना होगा. उसमें पैसे ख़र्च होंगे, समय बर्बाद होगा और जो मैं करना चाहती हूं वह नहीं कर पाऊंगी." वो नहीं चाहती थीं कि हाई स्कूल की पढ़ाई के दौरान ही वह मां बन जाएं. इसलिए बच्चों से मुक्त रहना और एक पिल्ले को पालना हमेशा उनके ज़हन में था.
एक संगीत समारोह में जब व्हीलर से उनकी मुलाकात हुई तो वो भी कुछ ऐसा ही सोच रहे थे.
वो कहते हैं, "कॉलेज के दिनों में, शायद स्नातक के दौरान, मैं राजनीतिक परिवेश में ज़्यादा जुड़ने लगा और मैंने जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर बहुत कुछ सीखा. मेरा ख़याल है कि मेरे लिए यह उचित नहीं होगा कि मैं इस दुनिया में एक बच्चे को लेकर आऊं."
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बच्चों की जगह पालतू जानवर
यह दंपती तेज़ी से बढ़ते उस मुखर समूह का हिस्सा है जिसने पूरी तरह बच्चों से मुक्त रहने का फ़ैसला किया है.
उनको लगता है कि बच्चे नहीं होने पर वो जो पैसे बचाएंगे उसे वे अपने करियर को आगे बढ़ाने और अपने शौक पूरे करने में ख़र्च कर सकते हैं. इतना ही नहीं, इससे ऐरी जैसे जानवरों का जीवन भी बेहतर होगा.
पिछले कई दशक से अमरीका और ब्रिटेन में बिना बच्चों वाले विवाहित जोड़ों की तादाद बढ़ी है. अमरीकी जनगणना ब्यूरो के मुताबिक 1970 में अमरीका के 40 फ़ीसदी विवाहित दंपतियों के बच्चे थे. 2012 में बच्चों वाले दंपति सिर्फ़ 20 फ़ीसदी रह गए.
हालांकि इन आंकड़ों में बच्चों वाले अविवाहित जोड़े शामिल नहीं हैं, फिर भी इससे पारंपरिक परिवार इकाइयों में आए बदलाव का पता चलता है.
'यूएस ब्यूरो ऑफ़ लेबर स्टैटिस्टिक्स' के शोध से पता चला है कि 2007 से 2011 के बीच बिना बच्चों वाले विवाहित जोड़ों ने अन्य सभी तरह की पारिवारिक इकाइयों की तुलना में पालतू जानवरों पर ज़्यादा ख़र्च किया.

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पालतू जानवरों को बच्चे जैसा प्यार
इन आंकड़ों में वे जोड़े भी शामिल हो सकते हैं जिनके बच्चे बड़े हो गए और अब अलग रहते हैं.
माइने यूनिवर्सिटी में समाज विज्ञान की प्रोफ़ेसर डॉक्टर एमी ब्लैकस्टोन का कहना है कि बच्चों से मुक्त परिवार अपने पालतू जानवरों के साथ संबंध के जरिये अपने लालन-पालन के पक्ष को व्यक्त करते हैं.
डॉक्टर ब्लैकस्टोन 2008 से ही बच्चों से मुक्त विकल्प पर शोध कर रही हैं. वो कहती हैं, "मैं पेशेवर से ज़्यादा निजी तौर पर कुछ जानने के लिए इस क्षेत्र में आई."
यूनिवर्सिटी में स्थायी जगह के लिए जिन दिनों वह अपने काग़जात जमा कर रही थीं, उन्हीं दिनों उनकी तीन करीबी दोस्तों ने अपने गर्भवती होने के बारे में बताया. उन्होंने तय किया कि वह मातृत्व पर शोध करेंगी.
"मेरे दोस्तों ने मुझे बताया था कि वे मातृत्व की ओर खिंच रही हैं. उस वक़्त मुझमें वैसी भावनाएं नहीं थीं."
ब्लैकस्टोन को पहले तो लगा कि उनके साथ कुछ गड़बड़ी है. उन्होंने अपने हाईस्कूल के दोस्त लांस से शादी की थी और दोनों खुश थे.
पहले उन्होंने बच्चों के बारे में चर्चा की थी लेकिन 'बहुत जवान' होने के कारण उन्होंने यह विचार स्थगित कर दिया था. करीब 35 साल की होने पर उन्हें लगा कि उनके बच्चे होने चाहिए.
लेकिन ऐसा नहीं हुआ. "हममें से कोई भी उस समय इसमें दिलचस्पी नहीं ले रहा था." ब्लैकस्टोन और उनके पति के पास एक बिल्ली थी, लेकिन पता चला कि दोनों को उससे एलर्जी थी.
बच्चों से मुक्त ज़िंदगी के बारे में और जानने के लिए ब्लैकस्टोन कई दंपतियों और व्यक्तियों से मिलीं जो अपने पालतू जानवरों को बच्चों की तरह मानते थे.

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तलाक़ के बाद पालतू जानवरों की कस्टडी का विवाद
ब्लैकस्टोन ने एक ऐसे व्यक्ति का इंटरव्यू किया जिनकी अपनी संतान नहीं थी और उन्होंने एक कुत्ता पाल रखा था.
उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी क्योंकि जानवरों के डॉक्टर ने उनको बताया था कि उनका कुत्ता मरने जा रहा है. वह अपने प्यारे कुत्ते की ज़िंदगी के आख़िरी हफ़्तों में उसके साथ रहना चाहते थे.
ब्लैकस्टोन कहती हैं, "उन्होंने अपने कुत्ते की देखरेख की, जैसे कोई अपने बच्चे या बीमार मां-बाप की करता है."
एक निःसंतान दंपति ने तलाक़ लिया तो अपनी बिल्लियों की कस्टडी हासिल करने पर अड़े रहे. दोनों उन बिल्लियों को अपने बच्चे की तरह समझते थे. आख़िर में एक पार्टनर को बिल्लियों को अपने घर पर रखने का अधिकार मिला और दूसरा उनसे नियमित रूप से मिलने के अधिकार पर राजी हुआ.
न्यूयॉर्क सिटी के चित्रकार बेन लेनोवित्ज़ एक बे-औलाद दंपति के बारे में बताते हैं जिन्होंने अपने पालतू जानवरों के पोर्ट्रेट बनवाए थे.
उन्होंने अपने एक कुत्ते को 2012 के हरिकेन सैंडी के बाद लावारिस हालत में पाया था. लेनोवित्ज़ कहते हैं, "वह जिस तरह से अपने कुत्ते के बारे में बातें करते थे, लगता था कि वह उनका बच्चा है."
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'फ़र वाले बच्चे'
इंटरनेट पर 'फ़र बेबी' सर्च करेंगे तो आपको निःसंतान जोड़ों के लिए पालतू जानवर की कई परिभाषाएं मिलेंगी. लेकिन पालतू जानवरों के बच्चों की जगह लेने का मुद्दा बच्चे-मुक्त समुदाय के लिए भी विवादित विषय है.
'आर/चाइल्डफ्री सबरेडिट' के 5 लाख 94 हजार सदस्य हैं. वे अपने बच्चे-मुक्त ज़िंदगी पर चर्चा करते हैं.
बच्चों और पालतू पशुओं को बराबर बताने पर कुछ की भौहें तन जाती हैं. वहीं कुछ लोग आसानी से यह स्वीकार कर लेते हैं कि उनके पास बच्चों की जगह बिल्लियां हैं.
विवाहित मगर बे-औलाद फ़िल्म निर्माता मैक्सिन ट्रंप की फ़िल्म "टु किड ऑर नॉट टु किड" निःसंतान रहने वाले लोगों के बारे में फैली धारणाओं को तोड़ती है.
वो कहती हैं, "हम अपनी बिल्लियों को अपने परिवार को हिस्सा समझते हैं. लेकिन मैं उनको मेरा बच्चा कहकर नहीं बुलाती."
49 साल की ट्रंप ब्रिटेन की हैं और न्यूयॉर्क और ब्रिटेन के बीच आती-जाती रहती हैं. वो अपने पति जोश ग्रेनर (45 साल) और बिल्ली ऑस्कर वाइल्ड के साथ रहती हैं.
यात्राओं से भरी जीवन-शैली के कारण भी ट्रंप बच्चे नहीं चाहतीं और परिवार में एक बिल्ली ही उनके लिए ठीक है.
"मैं अपने दोस्तों से कुछ निराश थी." वे उनको अपना विचार बदलने के लिए कहते थे, लेकिन ट्रंप को लगता है कि फ़िल्म बनाने से उनको संतोष मिल गया.''
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'बच्चा पैदा न करना भी समझदारी भरा फ़ैसला'
सात साल पहले जब उन्होंने यह काम शुरू किया था तब अपनी पसंद से निःसंतान रहने के बारे में ज़्यादा जानकारियां उपलब्ध नहीं थीं. आज ऐसी ढेरों सूचनाएं मौजूद हैं.
"यह रोमांचक है क्योंकि यह वास्तव में ऐसा लगता है. क्या हम ऐसे लोगों के लिए, जिन्होंने यह फ़ैसला लिया है, समाज को सामान्य बना सकते हैं ताकि लोग उन्हें अजीब न समझें?"
अमरीका और दूसरे देशों में भी रोचोव, व्हीलर और अन्य निःसंतान जोड़ों के लिए बच्चे पैदा न करने का फ़ैसला उतना ही समझदारी भरा है जितना कि एक पालतू जानवर को अपनाना.
रोचोव कहती हैं, "पिछले हफ़्ते हम ऐरी के लिए थोड़े डरे हुए थे." ऐसा किसी भी नये मां-बाप के लिए तब होता है जब लगता है कि उनके बच्चे को बुखार होने वाला है. वे तुरंत ही ऐरी को पशु चिकित्सक के पास ले गए.
"उसे इमरजेंसी रूम में ले जाया गया. इसमें हज़ार डॉलर से कुछ कम ख़र्च हुआ. मुझे लगता है कि किसी बच्चे को एंबुलेंस में इमरजेंसी रूम ले जाया जाए या सिर्फ़ इमरजेंसी रूम में ही भेजा जाए तो 1,000 डॉलर से कम ख़र्च नहीं होगा."
पैसे बचाने के अलावा रोचोव का कहना है कि उनका फ़ैसला उनको बच्चे होने के भावनात्मक बोझ से भी बचाता है.
"मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता हूं. मुझे पता है कि इंसान होने का क्या मतलब है. एक बच्चे को वह सब देने में सक्षम होना चाहिए जिसकी उसे ज़रूरत है. मुझे नहीं लगता कि मैं वह सब कर सकती हूं."
(ये बीबीसी वर्कलाइफ़ की स्टोरी का अक्षरश: अनुवाद नहीं है. मूल लेख पढ़ने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं.)
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