चूहों से कैसे मुक्त हुए ये शहर?

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- Author, फिलिप्पा फ़ोगार्टी
- पदनाम, बीबीसी कैपिटल
फ़िल मेरिल कनाडा के अल्बर्टा प्रांत में चूहा नियंत्रण कार्यक्रम के प्रमुख हैं. उनका कहना है कि अगर चूहे नहीं होते तो उनके पास नौकरी भी नहीं होती.
"मैं उनको पसंद नहीं करता, लेकिन उनसे नफरत भी नहीं करता. मैं उनका सम्मान करता हूं. वे छोटे हैं, लेकिन चुनौतीपूर्ण हैं."
भूरे चूहे नॉर्वे चूहे के रूप में भी जाने जाते हैं. वे तेज़ी से बच्चे पैदा करते हैं. उनका गर्भाधान काल कम होता है.
वे कुछ भी खा लेते हैं. जैसे घरेलू कूड़ा, सड़ा हुआ मांस और अनाज वगैरह. वे हर उस जगह पर रहते हैं जहां इंसान रहते हैं.
वे धातु में भी सुराख कर सकते हैं, लंबी दूरी तक तैर सकते हैं, 50 फीट (15 मीटर) ऊंचाई से गिरकर भी ज़िंदा रह लेते हैं. वे टॉयलेट से भी निकल आ सकते हैं.
ये चूहे मूल रूप से उत्तरी चीन के निवासी हैं, मगर अब वे अंटार्कटिका को छोड़कर सभी महादेशों में फैल चुके हैं.
कई प्रजातियों के जीव घट रहे हैं, लेकिन चूहे लगातार बढ़ रहे हैं- ख़ास तौर से शहरों में.
चूहे दुनिया की सबसे आक्रामक प्रजातियों में से एक हैं. वे देसी वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाते हैं, संपत्ति नष्ट करते हैं, खाने-पीने की चीजों को दूषित करते हैं और बीमारियां फैलाते हैं.

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19 अरब डॉलर का नुकसान
चूहे सालाना 19 अरब डॉलर का नुकसान करते हैं. यह सभी आक्रामक जीवों की वजह से होने वाले नुकसान (120 अरब डॉलर) का छठा हिस्सा है.
2017 में न्यूयॉर्क के मेयर ने चूहों से निपटने के लिए 3.2 करोड़ डॉलर का बजट बनाया था. मुंबई में गाड़ियों में लगने वाली आग का मुख्य कारण चूहे हैं.
आप किसी चूहे से 6 फीट से ज़्यादा दूर नहीं हैं- यह शहरी मिथक भले ही सच हो या न हो, लेकिन चूहे आपसे ज़्यादा दूर नहीं हैं.
लेकिन अगर आप अल्बर्टा में हैं तो ज़रूर उनसे बचे हुए हैं. इस प्रांत में कैल्गरी और एडमॉन्टन जैसे शहर हैं और यहां की आबादी करीब 43 लाख है.
अल्बर्टा तेल, राष्ट्रीय उद्यानों और आइस हॉकी के लिए प्रसिद्ध है. इसकी प्रसिद्धि का एक और कारण भी है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं.

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यहां चूहे नहीं
यह दुनिया का एकमात्र ऐसा हिस्सा है, जहां शहरी और देहाती आबादी भी है लेकिन यहां चूहों की समस्या नहीं है.
अल्बर्टा का क्षेत्रफल अमरीका के टेक्सस के बराबर है. उसने यह उपलब्धि कैसे हासिल की, जिसकी दुनिया में दूसरी कोई मिसाल नहीं है?
क्या यह सौभाग्य से हो गया या किसी रणनीति से हुआ? और अल्बर्टा को चूहों को बाहर करने के क्या-क्या फायदे हुए?
मेरिल कहते हैं, "हमें एक भौगोलिक लाभ है. हमने चूहों के आने से पहले ही शुरुआत कर ली थी."
"चूहे हमारी पूर्वी सीमा पर 1950 के दशक में आए. हमने सीमा पर सभी खेतों की जांच की और उनको ज़हर देकर मार दिया. हम चूहों को अंदर आने की इज़ाज़त नहीं देते."
भूगोल का निश्चय ही बड़ा हाथ रहा. इतने बड़े क्षेत्र में कुछ ही एंट्री ज़ोन हैं. चूहे उत्तर की ठंड बर्दाश्त नहीं कर सकते, ना ही वे पश्चिमी सीमा के पहाड़ी क्षेत्र में रह सकते हैं.

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दक्षिण में मोंटाना से लगी सीमा भी पहाड़ी है और वहां की आबादी इतनी बिखरी हुई है कि चूहे बढ़ नहीं सकते. इस तरह सिर्फ़ पूर्वी सीमा बचती है.
चूहे 18वीं सदी के अंत में उत्तर अमरीका के पूर्वी तट पर पहुंचे थे. वे धीरे-धीरे पश्चिम की ओर फैले. 1920 के दशक में वे पड़ोस के सस्केचवान पहुंचे.
"देखते ही मार दो"
मेरिल कहते हैं, "हम सस्केचवान से चालाक नहीं हैं. उनके पास चूहे हमसे 30 साल पहले पहुंच गए थे. उस समय प्रांतीय सरकारें बहुत विकसित नहीं थीं. सस्केचवान चूहों से निपटने के लिए तैयार नहीं था."
"जब वे हमारी सीमा पर आए तो हमारे पास स्वास्थ्य विभाग और कृषि विभाग था. हमारे पास एक व्यवस्था थी कि हम वास्तव में कुछ कर सकें."
और अल्बर्टा ने कर दिखाया. 1950 में चूहों को कीट घोषित किया गया और उनका नियंत्रण अनिवार्य कर दिया गया. चूहों को मारने के लिए ज़हर का इस्तेमाल किया गया.
पूर्वी सीमा पर 300 किलोमीटर लंबी और 20 से 50 किलोमीटर की चौड़ी पट्टी में उन सभी इमारतों में ज़हर का इस्तेमाल किया गया, जहां चूहों के छिपने की संभावना थी.
चूहा नियंत्रण क्षेत्र बनाया गया (जो आज भी है) और पेस्ट कंट्रोल ऑफिसर (PCO) तैनात किए गए.
इसके साथ-साथ एक सार्वजनिक शिक्षा अभियान भी शुरू किया गया. अल्बर्टा के ज़्यादातर लोगों ने नॉर्वे चूहे (भूरे चूहे) कभी नहीं देखे थे. सरकार ने उनकी पहचान के लिए हजारों पोस्टर लगवाए.
अल्बर्टा यूनिवर्सिटी में कला इतिहास, डिजाइन और दृश्य संस्कृति की प्रोफेसर लिएन मैकटविश कहती हैं, "वे पोस्टर देखने में बहुत प्रभावी थे. उनमें पूंछ पर फोकस था. वे चाहते थे कि लोग नॉर्वे चूहों पर ध्यान दें, दूसरी प्रजातियों पर नहीं."

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पोस्टरों में चूहों को सेहत, घर और इंडस्ट्री के लिए ख़तरा बताया गया और उनको देखते ही मार देने की अपील की गई. मैकटविश का कहना है कि उनमें जंगी नारे की तरह नारे लिखे गए थे.
"उस समय कई अभियान चल रहे थे- काइयोट और टिड्डों के ख़िलाफ. लेकिन लोग चूहे के पीछे पड़े और सरकार ने उस पर पैसे ख़र्च किए."
इस अभियान में भावनात्मक अपील भी थी- "वे आक्रामक घुसपैठिए हैं और ख़तरनाक हैं." लोग सचमुच उनके ख़िलाफ़ हो गए.

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धीरे-धीरे मिली क़ामयाबी
1950 के दशक में चूहा नियंत्रण क्षेत्र में नॉर्वे चूहों के सालाना 500 से अधिक संक्रमण होते थे. एक दशक बाद यह संख्या बहुत घट गई.
1970 के दशक में सालाना संक्रमण 50 रह गए. 1990 के दशक में यह संख्या 10-20 तक रह गई. 2003 में पहली बार यह संख्या शून्य हो गई.
आज इस क्षेत्र में नियमित निरीक्षण होता है. अगर कोई संक्रमण हो तो उसका प्रभावी उपाय किया जाता है. सीमा के पास के खेतों की साल में दो बार जांच की जाती है.
मेरिल का कहना है कि खेती के आधुनिकीकरण- जैसे भंडारण के लिए स्टील कंटेनर बनाने से अनाज तक चूहों की पहुंच सीमित हो गई है.
चूहों की रोकथाम के लिए किसानों को वार्फ़रिन नामक ज़हर इस्तेमाल करने के लिए कहा जाता है. इससे ज़्यादा प्रभावी ज़हर भी उपलब्ध हैं, लेकिन वार्फ़रिन का दूसरे जीवों पर कम असर होता है.
यह चूहों के पेट में बहुत कम देर तक रहता है और खुद ही नष्ट हो जाता है. यानी अगर भेड़िए जैसे दूसरे जानवर चूहों को खा भी लें तो उन पर असर नहीं होता.
अगर कहीं संक्रमण हो जाए तो लोग सहायता लेने में संकोच नहीं करते. मेरिल कहते हैं, "कुछ लोग हिचकते हैं. उनके यहां चूहे हैं और वे नहीं चाहते कि लोग इस बारे में जानें. लेकिन ज़्यादातर लोग इससे छुटकारा चाहते हैं. हम हर हफ्ते उनके यहां जाते हैं जब तक यह समस्या ख़त्म न हो जाए."
इस काम के लिए हॉटलाइन टेलीफोन सेवा भी शुरू की गई, जिस पर आने वाली शिकायतों पर फौरन कार्रवाई होती है.

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कचरे के ढेर में जासूसी
जिस सुबह मैं मेरिल से मिली, उस दिन एक आदमी ने एक चूहे की सूचना दी. वह एक गैराज में था जिसे वह अपने पड़ोसी के साथ साझा करता था.
उसका पड़ोसी ब्रिटिश कोलंबिया से लौटकर आया था और चूहे ने उसकी गाड़ी में ही सफ़र तय किया था.
मेरिल इसे सामान्य बात मानते हैं. "हर महीने हमें औसतन दो चूहे मिलते हैं". उनकी सलाह होती है कि दूसरा फंदा भी लगाएं ताकि चूहे के साथी को पकड़ा जा सके.
"चूहा अगर अकेला आया है तो वह कोई बड़ी समस्या नहीं है."
यह हमेशा इतना आसान नहीं होता. कई बार मेरिल को जासूस भी बनना पड़ता है, जैसे अगस्त 2012 में उन्हें मेडिसिन हैट सिटी में कूड़े के ढेर में यह काम करना पड़ा था.
"हमें इसके आसपास खेतों में 21 चूहे मिले थे और 18 चूहे शहर से मिले. हम जानते थे कि इसका मतलब संक्रमण है, लेकिन हम उनको ढूंढ़ नहीं पा रहे थे."
"हम 6 बार कूड़े के ढेर में गए. वहां चूहों को ढूंढ़ना बहुत ही मुश्किल था क्योंकि हर तरफ कूड़ा ही कूड़ा था. अंत में एक पीसीओ ने उनको रात में खोज निकाला."
इस संक्रमण को राष्ट्रीय अखबारों में सुर्खियां मिली थीं. कुछ अंतरराष्ट्रीय अखबारों ने अल्बर्टा को चूहा-मुक्त घोषित किए जाने पर सवाल भी उठाए थे.
अक्टूबर तक उनको काबू में कर लिया गया. कम से कम 300 चूहे मारे गए.
ये चूहे रिसाइक्लिंग के लिए अल्बर्टा लाए गए खेती की मशीनों में बचे घास-फूस में छिपकर आ गए थे.

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लागत का हिसाब
मेरिल 67 साल के हैं. वह 1970 से चूहा नियंत्रण कर रहे हैं. वह उन बदलावों के बारे में बताते हैं जिनसे उनका काम आसान हो गया है.
सस्केचवान में नियंत्रण कार्य शुरू होने से वहां संक्रमण की दर घटी है. मेरिल को अल्बर्टा के सभी नगरपालिका क्षेत्रों से भी समर्थन मिल रहा है.
सबने एक-एक अधिकारी को नियुक्त किया है जो ज़रूरत पड़ने पर चूहा नियंत्रण में मदद करते हैं.
चूहा नियंत्रण कार्यक्रम में सालाना 5 लाख कनाडाई डॉलर (3,72,000 अमरीकी डॉलर) से भी कम की लागत आती है. इसमें मेरिल और 6 चूहा नियंत्रण क्षेत्रीय अधिकारियों के वेतन के साथ चारे का ख़र्च शामिल है.
यह मुनाफे का निवेश लगता है. 2004 में अल्बर्टा रिसर्च काउंसिल (ARC) ने अनुमान लगाया था कि चूहे होने से सालाना 4.25 करोड़ कनाडाई डॉलर (3.16 करोड़ अमरीकी डॉलर) का नुकसान होगा.
यह आंकड़ा एक अमरीकी अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया था जिसमें यह माना गया था कि एक चूहा हर साल 15 डॉलर का अनाज और दूसरे सामान बर्बाद कर देता है.
इस लागत में चूहों के तार कुतरने से लगने वाली आग, खाने-पीने की चीजों का प्रदूषण और बीमारियों से होने वाले नुकसान शामिल हैं.
ARC का अनुमान था कि अल्बर्टा के खेतों में औसत रूप से 20 चूहे और घरों में एक-एक चूहे होंगे. इस तरह अल्बर्टा में चूहों की कुल आबादी 21 लाख होगी.
ARC रिपोर्ट के सहलेखक लैरी रॉय का कहना है कि उस समय यह बहुत अच्छा और विश्वसनीय अनुमान था.
रॉय के मुताबिक चूहे जैसे आक्रामक प्रजातियों के आर्थिक प्रभाव का आंकलन मुश्किल है. सटीक डेटा हासिल करने के लिए ख़र्चीले सर्वेक्षण की ज़रूरत होती है. फिर भी इसमें कोई संदेह नहीं कि चूहा नियंत्रण से हर साल करोड़ों डॉलर की बचत हुई.
अल्बर्टा इनवेसिव स्पीसिज़ काउंसिल की कार्यकारी निदेशक डेलिंडा रायर्सन का मानना है कि नुकसान का अनुमान बढ़ा-चढ़ाकर नहीं लगाया गया है.
वन्यजीवों को होने वाले नुकसान का आंकलन पैसे में करना मुश्किल है. मिसाल के लिए अल्बर्टा में जमीन पर अंडे देने वाले पक्षियों के अंडे चूहे खा जाते थे, लेकिन अब वे सुरक्षित हैं.
जहां तक सेहत पर असर की बात है तो अल्बर्टा में इसका सही अनुमान लगाने के लिए पर्याप्त सूचनाएं नहीं हैं.

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अल्बर्टा के सबक
क्या अल्बर्टा के अनुभवों से पूरी दुनिया में मदद मिल सकती है?
दक्षिणी जॉर्जिया में चूहा उन्मूलन परियोजना का नेतृत्व कर चुके टोनी मार्टिन कहते हैं, "दुनिया भर में कई उन्मूलन कार्यक्रम लागत और लाभ सोचकर चलाए गए हैं. लेकिन इसका आंकलन करना मुश्किल है. अधिकतर मामलो में हम वन्यजीवों की रक्षा करने के लिए इसे चलाते हैं, न कि वित्तीय नजरिये से."
दक्षिणी जॉर्जिया में चूहों के लिए ज़हर मिला हुआ चारा हेलीकॉप्टर से गिराया जाता था. आठ साल में इस प्रोजेक्ट पर करीब एक करोड़ पाउंड ख़र्च किए गए.
मार्टिन का काम काफी हद तक दान के पैसे पर चलता था. उनका कहना है कि उन्मूलन कार्यक्रमों में अगर वित्तीय फायदे और नुकसान का आंकलन होता तो पैसे आसानी से उपलब्ध होते.
मार्टिन की परियोजना अल्बर्टा से बहुत अलग है, फिर भी उनके मन में अल्बर्टा ने जो हासिल किया है, उसके लिए बहुत सम्मान है.
"दूसरी जगहों के मुक़ाबले उन्होंने बेहतर काम किया है. उन्होंने किसी एक शहर को ही चूहों से मुक्त नहीं रखा है, बल्कि उन्होंने एक विशाल क्षेत्र की देख-रेख की है."
मार्टिन जनता की भावनाओं को सबसे महत्वपूर्ण मानते हैं. "आपको लोगों की दिलचस्पी और उनके समर्थन की जरूरत होती है." कुछ लोग भी इसका विरोध करें तो गाड़ी पटरी से उतर सकती है.

लोगों का समर्थन
ऑस्ट्रेलिया के लॉर्ड होवे आइलैंड में 20 साल की बहस के बाद अब जाकर चूहा उन्मूलन शुरू हुआ है.
न्यूजीलैंड ने वन्यजीवों की रक्षा के लिए 2050 तक चूहों से मुक्ति की महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू की है. कई लोगों ने इसकी तारीफ की है, मगर कई लोग आलोचना भी कर रहे हैं.
अल्बर्टा में इस पर बहुत बहस नहीं हुई थी. मैकटविश का कहना है कि 2007 में जब वह वहां पहुंची तो उन्होंने देखा कि लोग इस पर बहुत गर्व करते थे.
"यह अल्बर्टा की पहचान से जुड़ गया था. अल्बर्टा के लोग इसे जानते थे और इसमें शरीक हो रहे थे."
फिल मेरिल का कहना है कि जनता का समर्थन बहुत अहम है. अगर किसी के अहाते में चूहों का संक्रमण तो हमें तुरंत सूचना मिल जाती है. लोग हमें बता देते हैं.
कुछ लोग नाराज़ भी रहते हैं, वे पालतू चूहों पर पाबंदी का विरोध करते हैं. इसे बदलने के लिए तीन साल पुरानी एक याचिका भी है. फिर भी ज़्यादातर लोग बहुत खुश हैं कि उन्हें चूहों से नहीं निपटना पड़ता है.
"कुछ पशुप्रेमियों को लगता है कि हम चूहों को मारते हैं. हां, हम ऐसा करते हैं. लेकिन हम स्थानीय चूहों- मस्करैट्स और पैकरैट्स से प्यार करते हैं."
"चूहे यदि इंसानों से दूर रहें तो बहुत अच्छा है. लेकिन अगर वे हमारा भोजन खाएं, हमारा कचरा फैलाएं और हमारे घरों में घुस आएं तो हमें यह पसंद नहीं."
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