पानी के बड़े पाइप में बनेगा मॉडर्न माइक्रो हाउस

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- Author, मैनुएला सारागोसा
- पदनाम, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस
हांगकांग एशिया का सबसे बड़ा कॉस्मोपोलिटन शहर है. ये अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेन-देन का बड़ा केंद्र भी है. चीन का हिस्सा होने के बावजूद हांगकांग अलग नियम क़ानूनों से प्रशासित होता है. दुनिया भर के लोग यहां से व्यापार करते हैं. ये देश सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र है. समुद्र किनारे बसा होने के कारण इसकी ख़ूबसूरती में चार चांद लगे हैं.
दुनिया भर से लोग यहां छुट्टियां मनाने आते हैं. इसमें कोई शक नहीं कि इस देश की जीडीपी बढ़ाने में टूरिज़्म का बड़ा हाथ है. लेकिन हैरानी की बात है जहां दूसरे देशों के लोग आकर रहते हैं, छुट्टियां बिताते हैं, वहां स्थानीय लोगों के रहने के लिए जगह नही हैं.
हांगकांग में आबादी ज़्यादा और जगह कम है. जिसके चलते यहां प्रॉपर्टी के दाम आसमान के पार पहुंच चुके हैं. यहां की आबादी का बड़ा हिस्सा ऐसा है, जो माक़ूल कमाई के बावजूद रहने के लिए एक मुनासिब घर नहीं ख़रीद सकता. लोग कम से कम जगह में रहकर गुज़ारा करते हैं.

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दड़बेनुमा घरों में रहने की मजबूरी
बीते दस सालों में यहां की ज़मीन पर आबादी का दबाव इतना बढ़ गया है कि लोग पिंजरेनुमा घरों में रहने के लिए मजबूर हैं.
बहुत से अपार्टमेंट और कमर्शियल बिल्डिंगों में जुगाड़ घर उपलब्ध कराए जाते हैं. घर के नाम पर ये ऐसा क़ैदखाना होता है, जहां ना सूरज की रोशनी पहुंचती है और ना ही क़ुदरती हवा नसीब होती है.
हांगकांग के मशहूर आर्किटेक्ट जेम्स लॉ का कहना है कि इन दड़बेनुमा घरों की वजह से हांगकांग की साख को काफ़ी धक्का पहुंच रहा है. लेकिन जगह का ना होना यहां सबसे बड़ी मजबूरी है. मकान मालिक भी ऐसा करने के लिए मजबूर हैं.
लोग पूरा अपार्टमेंट ख़रीद नहीं सकते लिहाज़ा एक ही अपार्टमेंट को टुकड़ों में बांट कर रहने लायक़ बनाने की कोशिश की जाती है.
यहां हज़ारों लोग तो ऐसे भी हैं, जो दड़बे जैसे घर भी नहीं ख़रीद पाते. लिहाज़ा वो 16 वर्ग मीटर वाले पिंजरेनुमा घर में रहते हैं. ये तीन मंज़िला होते हैं. इन्हें घर तो क्या ही कहा जाए, बस यूं समझिए कि लोग किसी तरह जिंदगी गुज़ार रहे हैं.
जानकर हैरानी होगी कि ऐसे घर में किराये पर रहने के लिए अच्छी खासी जेब ढीली करनी पड़ती है. इन पिंजरों का किराया 300 पाउंड है.

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पाइप को कैसे दिया जाएगा मॉडर्न लुक?
50 से 100 वर्ग मीटर वाले फ्लैट का किराया 418 से लेकर 837 अमरीकी डॉलर है. हांगकांग के लिए ऐसे हालात चिंता का विषय हैं.
लेकिन इस समस्या का समाधान तलाशने की कोशिशें की जा रही हैं. आर्किटेक्ट 'नैनो होम' प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं. नैनो होम का रक़बा 121 वर्ग फीट होगा जोकि एक गाड़ी की पार्किंग स्पेस से भी छोटा होगा. लेकिन उसे रहने लायक़ बनाया जाएगा.
साथ ही कंक्रीट से बने पानी के विशाल पाइप में माइक्रो हाउस बनाने पर विचार किया जा रहा है. इन पाइप को एक के ऊपर एक रख कर दो ब्लॉक वाली बिल्डिंग की शक्ल दी जाएगी. फिर इन्हें शहर की बेकार पड़ी ज़मीन पर स्थापित करने की योजना है.
आर्किटेक्ट लॉ के मुताबिक़ ठेकेदारों के पास ऐसे पाइप इफ़रात होते हैं. लिहाज़ा इन्हें मामूली क़ीमत पर ख़रीद लिया जाता है. फिर इसमें थोड़ा पैसा और लगाकर इन्हें रहने लायक़ बनाया जाता है. इनमें मामूली फर्नीचर, छोटा सा बावर्चीखाना और गुसलखाना होता है. सोफे का इस्तेमाल बेड के तौर पर कर लिया जाता है. पाइप में बने इस घर को पूरी तरह से मॉडर्न लुक दिया जाता है.

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उचित किराए पर सिर छिपाने का घर
जेम्स लॉ कहते हैं कि हांगकांग में घर की समस्या दूर करने का ये कोई स्थाई हल नहीं है. लेकिन पिंजड़े या दड़बे जैसे घर से ये बेहतर विकल्प है. साथ ही लॉ ये भी मानते हैं कि हांगकांग में जगह की कमी बड़ा मसला नहीं है. बल्कि बड़ी बिल्डिंग्स बनाने के लिए माक़ूल जगह नहीं है. साथ ही जो बिल्डिंग्स बनी हैं, वो बेतरतीब हैं. बिल्डिंग्स के ऊपर, फ्लाई ओवर के नीचे बहुत सी जगह बेकार छोड़ दी गई है.
अगर योजना के तहत काम किया जाए तो बहुत से लोगों को रहने के लिए जगह मिल सकती है. इसके अलावा किराया ज़्यादा होने की वजह से बहुत से घर खाली पड़े हैं.
शहर में रहना महंगा होता जा रहा है. लेकिन लोगों की आमदनी में इज़ाफ़ा रूका हुआ है. लिहाज़ा शहर की प्लानिंग करने वालों को सोचना पड़ेगा कि मुनासिब दाम में सभी को सिर छिपाने के लिए माक़ूल घर कैसे मुहैया कराया जाए.
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