'हाँगकाँग पर चीनी हक को चुनौती बर्दाश्त नहीं'

शी जिनपिंग

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इमेज कैप्शन, हाँगकाँग की नई कार्यकारी अधिकारी कैरी लैम के साथ चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने हाँगकाँग पहुंचने के बाद इस क्षेत्र पर चीनी प्रभुत्व को चुनौती देने वाली कोशिशों के ख़िलाफ़ चेतावनी जारी की गई है.

चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग हाँगकाँग की नई कार्यकारी अधिकारी कैरी लेम के शपथ ग्रहण समारोह में हाँगकाँग पहुंचे थे.

लेम हाँगकाँग की पहली महिला कार्यकारी अधिकारी हैं.

चीनी राष्ट्रपति बनने के बाद जिनपिंग की ये पहले हाँगकाँग यात्रा थी.

शी जिनपिंग

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इस दौरान उन्होंने कहा, "चीनी संप्रभुता सुरक्षा को ख़तरे में डालने, केंद्रीय सरकार की शक्तियों की चुनौती देने, हाँगकाँग से घुसपैठ करने और चीन की धरती के ख़िलाफ़ किसी भी तरह की गतिविधि को अंजाम देने की कोशिश करना पूरी तरह मना है. ऐसी कोशिशें अपनी सीमा रेखा पार करने वाली गतिविधियां हैं."

उन्होंने ये भी कहा है कि हाँगकाँग में अब सबसे ज्यादा आजादी है.

हालांकि, हाँगकाँग में 'वन कंट्री-टू सिस्टम' कार्यक्रम के तहत यहां का क़ानून नागरिकों को कई तरह की आज़ादी देता है.

हॉंगकॉंग

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लेकिन सभी व्यस्कों को राजनैतिक मताधिकार के इस्तेमाल की आज़ादी देने के मुद्दे पर चीन के इनकार से कई बार हिंसक प्रदर्शन हो चुके हैं.

शनिवार के प्रदर्शन में लोकतंत्र के समर्थक दल डेमोसिस्टो पार्टी ने कहा है कि पुलिस ने इसके पांच सदस्यों को गिरफ़्तार कर लिया है और सोशल डेमोक्रेटिक लीग के चार सदस्यों को भी गिरफ़्तार किया गया है.

ये सदस्य उस स्थान पर प्रदर्शन करने जा रहे थे जहां चीनी राष्ट्रपति ध्वजारोहण करने वाले थे.

हाँगकाँग में लोकतंत्र समर्थक सालों से इस बात के लिए अभियान चलाते रहे हैं कि यहां के लोगों को अपना नेता चुनने का अधिकार मिले.

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साल 2014 में चीन ने कहा था कि वो मुख्य कार्यकारी अध्यक्ष के सीधे चुनाव की इजाज़त देगा, लेकिन केवल पहले से अधिकृत उम्मीदवारों की सूची से ही इनका चुनाव होगा.

लेकिन पूरी तरह लोकतंत्र चाहने वाले लोगों की ओर से बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए. हफ़्तों तक शहर का मुख्य हिस्सा बंद रहा. इसके बाद चीन ने अपने इस कदम को वापस ले लिया.

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