|
विश्व कप जीत के मायने हैं ख़ास... | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दो साल पहले ट्वेन्टी-20 प्रतियोगिता के फ़ाइनल में पाकिस्तान जीत के बेहद करीब होते हुए भी जीत न सका था. फ़ैसला आख़िरी ओवर में हुआ और पाकिस्तान केवल पाँच रन से चूक गया. लेकिन 2009 के फ़ाइनल में पाकिस्तान ने ऐसी कोई चूक नहीं की. न केवल वो मैच आठ विकेट से जीता बल्कि आठ गेंद रहते जीत गया. हालांकि दोनों विश्व कप की परिस्थितियों में ज़मीन आसमान का अंतर है जिस वजह से पाकिस्तानी के लिए ये जीत बेहद ख़ास है. यहाँ हम क्रिकेट की बारीकियों या खेल की तकनीक की बात नहीं कर रहे बल्कि माजरा कुछ दूसरा है. मुश्किल दौर
इसे किस्मत कहिए या कुछ और कि फ़ाइनल मैच में श्रीलंका और पाकिस्तान की टीमें आमने-सामने थी. दो ऐसी टीमें जो पिछले कुछ महीनों में काफ़ी मुश्किल और नाज़ुक हालात से गुज़री हैं. तीन मार्च 2009 के वो दृश्य अब भी लोगों के ज़हन में ताज़ा हैं जब लाहौर में मैदान पर जा रहे श्रीलंकाई क्रिकेट खिलाड़ियों पर गोलियाँ बरसाई गईं और देखने वाले दंग रह गए. श्रीलंका के कई खिलाड़ी घायल हुए और टीम तुरंत स्वदेश लौट गई. उसके बाद सबने पाकिस्तान में क्रिकेट मैच खेलने से हाथ खींच लिए. भारत-श्रीलंका की तरह पाकिस्तान में भी क्रिकेट की दीवानगी कुछ कम नहीं है. ज़ाहिर है इससे पाकिस्तान में क्रिकेट को धक्का लगा. महीनों तक पाकिस्तानी टीम मैच नहीं खेल पाई. जब दुनिया भर के खिलाड़ियों का जमावड़ा आईपीएल में लगा तो वहाँ भी पाकिस्तानी खिलाड़ी नहीं थे. पाकिस्तानी के अंदरूनी हालात भी कुछ समय से चर्चा का विषय बने हुए हैं- धमाकों पर धमाके, स्वात में संघर्ष और अपने ही देश में शरणार्थी हुए लोग. यानी पाकिस्तान आए दिन किसी न किसी वजह से नकारात्मक बातों के लिए चर्चा में रहा. ऐसे हालात में ये जीत पाकिस्तान, उसके लोग और वहाँ के क्रिकेट के लिए बेहद खुशनुमा ख़बर है. पाकिस्तानी कप्तान यूनिस खान के लफ़ज़ों में कहें तो ये टीम की ओर से पाकिस्तानी लोगों को तोहफ़ा है. टीम का दमखम
ये तो हुआ भावनात्मक पहलू लेकिन ये भी सच है कि विश्व कप केवल भावनाओं के नहीं बल्कि हुनर और दमखम के बल पर जीता है. पाकिस्तान की टीम ने प्रतियोगिता में दिखा दिया कि उसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता. आँकड़े इसकी गवाही देते हैं. शुरुआती मैचों में पाकिस्तानी टीम ज़रूर डगमगाई और लड़खड़ाई लेकिन जैसे –जैसे प्रतियोगिता में टीम आगे बढ़ती गई उसके प्रदर्शन में निखार आता रहा. उसके पास तीन ऐसे गेंदबाज़ रहे जिन्होंने ज़रूरत पड़ने पर विकेट लिए- उमर गुल, सईद अजमल और शाहिद अफ़रीदी. पूरे टूर्नामेंट में सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाला खिलाड़ी पाकिस्तानी है. उमर गुल ने 13 विकेट लिए. सईद अजमल ने 12 तो अफ़रीदी ने 11 विकेट चटके. टीम में अनुभवी और युवा खिलाड़ियों दोनों का मिश्रण था. समय-समय पर प्रतियोगिता में जब टीम मु्श्किल में घिरी तो कोई न कोई खिलाड़ी संकट मोचक बन कर उभरा और टीम को जीत दिलाई. पाकिस्तान की जीत से पाकिस्तान में क्रिकेट को ज़रूर फायदा होगा. ख़ासकर ऐसे माहौल में जब आईसीसी ने 2011 में होने वाले क्रिकेट विश्व कप में पाकिस्तान में किसी भी मैच का आयोजन करवाने से मना कर दिया और ज़्यादातर देश वहाँ फिलहाल सुरक्षा चिंताओं के कारण खेलना नहीं चाहते. लेकिन यहाँ ये मान लेना भी ग़लत होगा कि इस एक जीत से पाकिस्तान में क्रिकेट का नक्शा बदल जाएगा या अचानक से अंतरराष्ट्रीय जगत वहाँ खेलने के लिए उमड़ पड़ेगा. हाँ मनोवैज्ञानिक स्तर पर इस एक जीत का असर टीम और वहाँ के लोगों पर ज़रूर होगा. खराब हालात से जूझ रहे पाकिस्तान के पास जश्न मनाने का ये बड़ा मौका है और वहाँ क्रिकेट के जुनून को देखते हुए कहा जा सकता है कि जश्न कई दिनों तक चलेगा. |
इससे जुड़ी ख़बरें ट्वेन्टी-20 विश्व कप पाकिस्तान के नाम21 जून, 2009 | खेल की दुनिया इंग्लैंड को महिला विश्व कप का ख़िताब21 जून, 2009 | खेल की दुनिया ट्वेन्टी-20 विश्व कप के फ़ाइनल का स्कोर21 जून, 2009 | खेल की दुनिया श्रीलंका ने फ़ाइनल में जगह बनाई19 जून, 2009 | खेल की दुनिया सेमीफ़ाइनल में हारी महिला टीम18 जून, 2009 | खेल की दुनिया पाकिस्तान पहुंचा फाइनल में18 जून, 2009 | खेल की दुनिया आख़िरी मैच भी हार गया भारत16 जून, 2009 | खेल की दुनिया हंगामा है क्यों बरपा.......!20 जून, 2009 | खेल की दुनिया | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||