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न्यूज़ीलैंड पर भारत की ऐतिहासिक जीत | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
न्यूज़ीलैंड के साथ तीन टेस्ट मैचों की श्रृंखला के पहले मैच में भारत को ऐतिहासिक जीत हासिल हुई है. हैमिल्टन में खेले गए इस मैच में भारत ने न्यूज़ीलैंड को दस विकेट से हरा दिया है. न्यूज़ीलैंड में भारत को 33 साल बाद टेस्ट मैच में कोई जीत मिली है. इससे पहले 1976 में ऑकलैंड में भारत को जीत मिली थी. इस जीत में गेंदबाज़ों का बड़ा योगदान रहा. पहली पारी में जहाँ ईशांत शर्मा सहित दूसरे तेज़ गेंदबाज़ों ने न्यूज़ीलैंड की पारी को 279 रनों पर समेट दिया. वहीं दूसरी पारी में हरभजन सिंह की फिरकी गेंदों ने एक के बाद एक न्यूज़ीलैंड के छह खिलाड़ियों को पेवेलियन पहुँचाया और टीम का स्कोर फिर 279 रन ही रहा. भारत ने अपनी पहली पारी में सचिन तेंदुलकर के शानदार 160 रनों की बदौलत 520 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया था. न्यूज़ीलैंड ने भारत के सामने जीते के लिए सिर्फ़ 39 रनों का लक्ष्य रखा था जिसे राहुल द्रविड़ और गौतम गंभीर ने छठवें ओवर में ही पा लिया. सचिन तेंदुलकर को मैन ऑफ़ मैच चुना गया. न्यूज़ीलैंड की पारी भारत के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने टॉस जीतकर जब न्यूज़ीलैंड को बल्लेबाज़ी करने को कहा तो भारतीय गेंदबाज़ों ने इस निर्णय को सही साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. ईशांत शर्मा, मुनाफ़ पटेल और ज़हीर ख़ान ने ख़तरनाक गेंदबाज़ी की और न्यूज़ीलैंड के पहले छह विकेट सिर्फ़ साठ रनों पर गिर गए थे.
लेकिन बाद में राइडर और विटोरी दोनों ने पारी संभालते हुए शतक लगाए लेकिन फिर भी टीम का स्कोर 279 रनों से आगे नहीं बढ़ पाया. पहली पारी में ईशांत शर्मा को चार विकेट मिले थे. जबकि हरभजन सिंह की फिरकी काम नहीं आई थी और उन्हें सिर्फ़ एक विकेट मिला था. लेकिन हरभजन की गेंद ने दूसरी पारी में जो कमाल दिखाया उसने न्यूज़ीलैंड को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया. उन्होंने 63 रन देकर छह विकेट लिए जिसमें गुप्टिल, फ़्लिन, राइडर और विटोरी के महत्वपूर्ण विकेट शामिल हैं. दूसरी पारी में मुनाफ़ पटेल ने फिर दो विकेट लिए और ज़हीर ख़ान को एक विकेट मिला. ईशांत शर्मा ने 22 ओवर फेंके, लेकिन उन्हें एक भी विकेट नहीं मिल सका. न्यूज़ीलैंड की पारी जिस तरह चल रही थी उससे साफ़ था कि वह पारी से हार को बचाने के लिए संघर्ष कर रही है और आख़िर ऐसा हुआ भी. जब न्यूज़ीलैंड ने दूसरी पारी 279 रनों पर समाप्त हुई तो भारत को जीत के लिए सिर्फ़ 39 रन ही बनाने थे. भारत की पारी
भारत ने अपनी पहली पारी बहुत आत्मविश्वास के साथ शुरू की. हालांकि 37 रनों के स्कोर पर ही उसे सहवाग का विकेट गँवाना पड़ा था. लेकिन बाद में बल्लेबाज़ों ने धैर्य के साथ खेलना शुरू किया. सचिन के बल्ले ने एक बार फिर कमाल दिखाया. उन्होंने अपने टेस्ट जीवन का 42 वाँ शतक पूरा किया. सचिन 160 रन बनाकर आउट हुए. गौतम गंभीर ने 72, द्रविड़ ने 66 और ज़हीर ख़ान ने 51 रनों की नाबाद पारी खेलकर भारत को बड़ा स्कोर ख़डा करने में सहयोग किया. भारत का दसवाँ विकेट जब गिरा तो टीम 520 रन जोड़ चुकी थी और न्यूज़ीलैंड के सामने 241 रनों की खाई को पाटना एक बड़ी चुनौती थी. भारत के ख़िलाफ़ न्यूज़ीलैंड के गेंदबाज़ों में मार्टिन का प्रदर्शन अच्छा रहा जिन्होंने 30 रन देकर तीन विकेट लिए जबकि ओ' ब्रायन को तीन विकेट लेने के लिए 103 रन गँवाने पड़े. विटोरी भी 90 रन देकर दो विकेट हासिल करते हुए महंगे साबित हुए. इतिहास भारत ने हैमिल्टन टेस्ट जीतकर एक इतिहास रच दिया है क्योंकि भारत ने 33 साल बाद न्यूज़ीलैंड को उसकी ज़मीन पर टेस्ट मैच में हराया है. इससे पहले 1976 में ऑकलैंड टेस्ट मैच में भारत को जीत हासिल हुई थी. वैसे भारत ने पिछले 41 वर्षों से न्यूज़ीलैंड को उनके घर में टेस्ट श्रृंखला में नहीं हराया है. भारत ने अंतिम बार 1967-68 में मंसूर अली ख़ान पटौदी के नेतृत्व में न्यूज़ीलैंड को 3-1 से हराकर न्यूज़ीलैंड में कोई श्रृंखला जीती थी. इससे पहले भारत ने 2002-03 में न्यूज़ीलैंड का दौरा किया था लेकिन तब उनका प्रदर्शन बेहद ख़राब रहा था और भारतीय टीम पूरे दौरे में सबसे अधिक केवल 219 रन बना सकी थी. |
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