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गुरुवार, 08 मई, 2008 को 10:13 GMT तक के समाचार
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ओलंपिक मशाल माउंट एवरेस्ट पर
एवरेस्ट पर पहुँचा दल
ओलंपिक मशाल को माउंट एवरेस्ट पर रोशन करने वाले दल में तिब्बती भी शामिल
ओलंपिक मशाल दुनिया की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट पर पहुँच गई है और नेपाल ने चोटी पर चढ़ने के इच्छुक पर्वतारोहियों के लिए रास्ता खोल दिया है.

इससे पहले चीन के पर्वतारोहियों का एक दल ओलंपिक मशाल को लेकर चोटी पर पहुँचा.

उधर नेपाल में अधिकारियों का कहना है कि लगभग 200 पर्वतारोही चोटी पर चढ़ने का इंतज़ार कर रहे थे और उन्हें अब इजाज़त दे दी गई है.

नेपाल ने ये रास्ता बंद कर दिया था ताकि तिब्बत समर्थक प्रदर्शनकारी वहाँ कोई गड़बड़ी न कर पाएँ.

नेपाल के एक पर्यटन अधिकारी का कहना था कि ऐसे प्रदर्शनों पर अब भी प्रतिबंध है और हथियारों से लौस सैनिक अब भी चोटी पर तैनात रहेंगे ताकि पर्वतारोहियों के दलों पर नज़र रखी जा सके.

नेपाल के पर्यटन मंत्रालय के प्रवक्ता प्रेम राय का कहना था, "आज से पर्वतारोही एवरेस्ट की चढ़ाई कर सकते हैं. पर्वतारोहियों के लगभग 29 दल हैं और हर दल में नौ सदस्य हैं और कुछ लोग तो चढ़ाई शुरु भी कर चुके हैं."

ओलंपिक और चीन के झंडे

बर्फ़ से घिरे माउंट ऐवरेस्ट पर पहुँच कर चीनी दल ने ओलंपिक और चीन के झंडे फहराए.

 आज से पर्वतारोही एवरेस्ट की चढ़ाई कर सकते हैं. पर्वतारोहियों के लगभग 29 दल हैं और हर दल में नौ सदस्य हैं और कुछ लोग तो चढ़ाई शुरु भी कर चुके हैं
नेपाल का पर्यटन मंत्रालय

खास बात ये है कि धरती के सबसे ऊँचे शिखर पर ओलंपिक मशाल जलाने वाले चीनी दल में तिब्बत के पर्वतारोही भी थे.

बुधवार को सूरज निकलने से काफ़ी पहले 8300 मीटर की ऊँचाई पर बने अपने कैंप से इस दल ने चढ़ाई शुरू की.

छह घंटे की कड़ी मेहनत के बाद ये दल दुनिया की सबसे ऊँची चोटी पर 8848 मीटर की बुलंदी पर था. चढ़ाई के दौरान आसमान पूरी तरह साफ़ था और हवा भी ज़्यादा तेज़ नहीं थी.

पिछले हफ़्ते भारी हिमपात ने इसी तरह की एक कोशिश को नाकाम कर दिया था. इस हिमपात की वजह से ऊँचाई पर बने पर्वतारोहियों के कई कैंप उखड़ गए थे.

माउंट एवरेस्ट
माउंट एवरेस्ट चीन, तिब्बत और नेपाल की सीमा पर स्थित है

बुलंदी पर पहुँचने वाले इस दल ने चढ़ाई के दौरान मशाल की लौ से दूसरी मशालों को जलाया.

ओलंपिक और चीन के झंडे लिए इस दल ने चोटी पर 'बीजिंग में आपका स्वागत है' और 'एक दुनिया-एक सपना' के नारे भी लगाए.

बीजिंग ओलंपिक का नारा 'एक दुनिया एक सपना' है. सबसे आगे और सबसे पीछे ओलंपिक मशाल थामने वालीं तिब्बत की महिलाएँ थीं.

बेहद कड़ी सुरक्षा

ओलंपिक मशाल के माउंट एवरेस्ट पर ले जाए जाने के मद्देनज़र यहाँ सुरक्षा बेहद कड़ी रखी गई थी.

सिर्फ़ इसी दल को माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने दिया गया था. दरअसल, माउंट एवरेस्ट नेपाल, चीन और तिब्बत की सीमा पर स्थित है.

तिब्बती प्रदर्शनकारियों को देखते हुए नेपाल और चीन ने माउंट एवरेस्ट की अपनी तरफ़ की सीमाएं पूरी तरह बंद कर दी थीं.

आयोजकों ने मशाल को ले जाने का रास्ता भी गुप्त रखा था. मार्च के महीने में तिब्बत का राजधानी ल्हासा में चीन विरोधी प्रदर्शनों में कई लोग मारे गए थे.

एवरेस्ट की चोटी पर भेजी गई ओलंपिक मशाल मुख्य ओलंपिक मशाल की प्रतिकृति है.

असली ओलंपिक मशाल इन दिनों चीन के अलग-अलग शहरों में हो रही मशाल दौड़ में शामिल है.

ओलंपिक खेलों की शुरुआत आठ अगस्त को बीजिंग में होनी है.

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