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मीडिया सर्कस में खिलाड़ियों की सुध किसे.. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अगर आप भारत में टीवी देखने वाले हैं तो आपने सोच लिया होगा कि गुरुवार को देश की सबसे महत्वपूर्ण ख़बर क्या थी. जी हाँ, विजेता भारतीय क्रिकेट टीम का ऑस्ट्रेलिया से भारत लौटना और उनका शानदार स्वागत. सभी न्यूज़ चैनलों ने अपने-अपने रिपोर्टर मुंबई हवाई अड्डे, दिल्ली हवाई अड्डे और होटल में तैनात कर दिए थे. साथ ही फ़िरोज़शाह कोटला में तो मीडियाकर्मियों का भारी जमावड़ा था. हमें सेकेंड दर सेकेंड ये बताया जा रहा था कि टीम कहाँ है, किस पुल से गुज़र रही है, तो किस सड़क को पार कर रही है, किस खिलाड़ी के चेहरे पर मुस्कान है और कौन खिलाड़ी बस में खर्राटे भर रहा है. और उसके बाद दो घंटे तक ये दिखाया गया कि केंद्रीय कृषि मंत्री और बीसीसीआई के अध्यक्ष शरद पवार किस तरह हर खिलाड़ी को 58 लाख रुपए का चेक भेंट कर रहे हैं. मैंने भी टेलीविज़न देखने यही सोचा कि कितने लोगों ने घंटों तक टेलीविज़न पर ये तमाशा देखा होगा. ये अच्छी बात है कि भारतीय क्रिकेट बोर्ड उन खिलाड़ियों का सम्मान कर रहा है, जिन्होंने ऑस्ट्रेलिया में इतना बढ़िया खेल दिखाया है. प्राथमिकता लेकिन वो टीवी चैनलों का क्या, जो सुबह से शाम तक बार-बार इसे ही पीट रहे थे. ये तो स्पष्ट है कि राजनेता हों या क्रिकेट अधिकारी या फिर उद्योग जगत, सभी ऑस्ट्रेलिया में भारतीय टीम के शानदार प्रदर्शन का फ़ायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं.
उन्हें ये भी पता है कि आजकल मीडिया ऐसे आयोजनों को कितनी प्राथमिकता देता है. इसलिए ऐसे आयोजनों पर इतना ख़र्च किया जाता है जो टीवी पर अच्छा दिखे और उन्हें लोकप्रियता भी दिलाए. शरद पवार का नाम आजकल घर-घर में जाना जाने लगा है, इसलिए नहीं कि वे भारत के कृषि मंत्री हैं और इतनी बड़ी संख्या में किसान आत्महत्या कर रहे हैं बल्कि इसलिए क्योंकि वे बीसीसीआई के अध्यक्ष हैं. इस तरह के आयोजन उनके अनुकूल हैं. लेकिन मीडया क्यों इस तरह की हरकत करता है. यह भी स्पष्ट है कि उद्योग जगत क्रिकेट में करोड़ों का निवेश कर रहा है और वो चाहता है कि क्रिकेट को लेकर लोगों में पागलपन बना रहे और ऐसे आयोजनों के माध्यम से वे अपने उत्पाद का विज्ञापन भी कर सकते हैं. लेकिन मज़े की बात ये कि गुरुवार रात को एक मुख्य समाचार चैनल ने एक कार्यक्रम किया और दर्शकों से यह सवाल पूछा गया कि क्या हम क्रिकेट को लेकर कुछ ज़्यादा ही जश्न मनाते हैं. ख़ुशी और ग़म पैनल में शामिल खिलाड़ियों की एक एजेंट तो इतनी ख़ुश थी कि उन्हें तो ये सारे जश्न भी कम लग रहे थे. लेकिन पैनल में शामिल भारत के पूर्व डेविस कप खिलाड़ी विशाल उप्पल मीडिया की असंवेदनशीलता से काफ़ी सदमे में थे.
उन्होंने कहा कि भारत में क्रिकेट के अलावा अन्य सभी खेलों की अनदेखी की जा रही है. मैं भी उस कार्यक्रम में हिस्सा ले रहा था और मैंने कहा कि भारतीय जनता अति नहीं कर रही बल्कि मीडिया अति कर रहा है. मैंने यह सवाल भी उठाया कि क्या वाकई देश की जनता घंटों तक चलने वाले इस लाइव कार्यक्रम को देखना भी चाहती है या नहीं. अब आप ये भी सोचिए कि अगर ऐसे आयोजनों का टीवी पर सीधा प्रसारण ना हो तो क्या क्रिकेट अधिकारी इसका आयोजन भी करेंगे या नहीं. ये भी कल्पना कीजिए कि क़रीब तीन महीने बाद घंटों तक विमान यात्रा करने के बाद जब खिलाड़ी मुंबई पहुँचे तो उन्हें सीधे मुंबई से दिल्ली आने को कहा गया. खिलाड़ियों के नज़रिए से देखा जाए तो उन्हें पहले अपने घर भेजा जाना चाहिए था. ताकि वे अपने परिजनों से मिल सकें. लेकिन चूँकि भारतीय क्रिकेट अधिकारी ऐसा चाहते थे इसलिए उन्हें मुंबई से दिल्ली आना पड़ा. लेकिन कौन सोचता है इन खिलाड़ियों के बारे में. क्रिकेट अधिकारियों की जय हो, उद्योग जगत की जय हो और जय हो ऐसे मीडिया की भी. |
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