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बुधवार, 05 मार्च, 2008 को 12:46 GMT तक के समाचार
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भज्जी को पसंद आलू का पराठा और मलाई
हरभजन सिंह
हरभजन सिंह 13 साल की उम्र से क्रिकेट खेलते आए हैं
हरभजन सिंह यानी भज्जी अक्सर विवादों में रहने के बावजूद भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के राजदुलारे हैं.

हाल के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान जब उन पर नस्लवादी टिप्पणी करने का आरोप लगा तो न सिर्फ़ पूरी क्रिकेट टीम और भारतीय क्रिकेट बोर्ड बल्कि पूरा देश उनके साथ खड़ा था.

ज़ाहिर है भज्जी अपनी माँ यानी के भी लाडले हैं.पेश है हरभजन की माँ अवतार कौर के साथ सूफ़िया शानी की बातचीत:

हरभजन अब भारतीय क्रिकेट टीम के अहम खिलाड़ी बन चुके हैं. उनकी सफलताओं को देखकर कैसा लगता है आपको?

बहुत अच्छा लगता है, ख़ुशी होती है. उसके पिता होते तो बहुत ख़ुश होते. क्योंकि उन्हें क्रिकेट के बारे में सब पता था. मुझे तो क्रिकेट के बारे में तब पता चला जब हरभजन ने खेलना शुरू किया.

अब तो आप भज्जी का हर मैच देखती होंगी?

मैच तो मैं उसके सब मैच देखती हूं. बिजली ना हो तो बात अलग है.

अब क्रिकेट समझ मे भी आता होगा?

हाँ आता है. देखते-देखते समझने लगे कि कोई ऐसे आउट हुआ,कोई वैसे आउट हुआ.

मैच से पहले हरभजन फ़ोन करते हैं तो क्या बात होती है?

फ़ोन तो वह हर मैच से पहले करता है...कि जी आज मेरा मैच है. क्रिकेट के बारे में बात नहीं होती.

मैं कहती हूं...बहुत विकेट लेना, बहुत रन बनाना, बहुत अच्छा खेलना, बस.

अभी ऑस्ट्रेलिया में इतना विवाद हुआ,तब आपको कैसा लग रहा था?

वह दुखी था. उसकी परेशानी से हम भी परेशान थे. लेकिन सबसे अच्छा यह लगा कि पूरी टीम ने उसका साथ दिया, पूरा देश उसके साथ था. बाक़ी खेल में विवाद तो चलते रहते हैं.

जब भज्जी घर आते हैं तो क्या करते हैं, घर का माहौल कैसा होता है?

बड़ा अच्छा लगता है. घर में ख़ुशी का माहौल होता है. उसके दोस्त आते रहते हैं. हम उसकी पसंद का नाश्ता बनाकर देते रहते हैं.

अच्छा यह बताइए कि भज्जी को खाने में सबसे ज़्यादा क्या पसंद है...आपके हाथ की बनी क्या चीज़ वह खाना चाहते हैं?

खाने में उसे सब कुछ पसंद है. आलू के पराठे ज़्यादा शौक़ से खाता है. वैसे मैं जो भी बनाऊँ...गोभी के पराठे, राजमा चावल, कढ़ी-चावल...वह बड़े मज़े से खाता है. मलाई और दही भी उसे बहुत पसंद है.

अब जब भज्जी घर आते हैं तो शरारत करते हैं...या बचपन में वह ज़्यादा शरारत करते थे. उनकी कौन कौन सी शरारतें आप भूल नहीं पातीं?

 बहू लाने का वक़्त तो हो गया है. दुल्हन तो उसकी पसंद की ही होगी. लेकिन वह मुझे बता कर ही फ़ैसला करेगा. दुल्हन तो वह अपने हिसाब से ही चुनेगा. लेकिन उसकी पसंद ही हमारी पसंद होगी
हरभजन की माँ

बचपन में भी शरारत करता था. शरारत अब भी करता है. पर पहले की शरारतें अलग थीं, अब शरारतें कुछ और हैं. बचपन में पांच बहनों के साथ रहता था, जो भी खेल वह खेलतीं, वही खेल यह भी खेलता था. खाने को बोलते तो कहता, यह सब बैठ गईं अब मेरे लिए जगह ही कहाँ है. अब जब आता है तो बहनों के साथ ख़ूब हंसी-मज़ाक़ चलता है.

हरभजन को क्रिकेट का शौक़ कैसे लगा...घर में क्रिकेट का माहौल था?

उसने तेरह साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू किया था. घर में कोई क्रिकेट नहीं खेलता था. उसकी बुआ का बेटा बैडमिंटन का कौच है..उसी ने हरभजन को क्रिकेट खेलना सिखाया.

जब भज्जी घर आते हैं तो आपसे ख़ूब गपशप होती होगी?

जब घर आता है, मेरे पास बैठता है. हालचाल पूछता है.

यानी आपके लाडले हैं भज्जी?

लाडले तो सभी हैं, हरभजन लाडला है, बेटियाँ भी लाडली हैं. उसे बहनों से भी बड़ा प्यार मिलता है.

बचपन में आपने भज्जी को कौन कौन सी कहानियां सुनाईं थीं?

हमें कहानियां सुनाने की ज़रूरत नहीं पड़ी. वह तो बहनों से ही कहानियां सुनता रहता था.

बचपन में खेल-कूद के ही नवाब थे..या पढ़ाई में भी लाजवाब थे भज्जी?

पढ़ाई में भी वह हमेशा अच्छे नंबर लाता था.

जब भी बाहर जाते हैं तो आपके लिए गिफ़्ट ज़रूर लाते होंगे भज्जी?

गिफ़्ट तो वह सबके लिए लाता है..और हर बार लाता है. लेकिन हमारे लिए तो हरभजन ही गिफ़्ट है...जब वह आ जाता है तो हमें समझो गिफ़्ट मिल जाता है.

सबसे पहली गिफ़्ट आपको क्या मिली था?

हीरे की अंगूठी जो अब भी मुझे बेहद पसंद है.

इतने बरसों घर का कामकाज करते करते आप थक गई होंगी...तो अपनी मदद के लिए बहू कब ला रही हैं...बहू किसकी पसंद की होगी..आपकी या भज्जी की?

बहू लाने का वक़्त तो हो गया है. दुल्हन तो उसकी पसंद की ही होगी. लेकिन वह मुझे बता कर ही फ़ैसला करेगा. दुल्हन तो वह अपने हिसाब से ही चुनेगा. उसकी पसंद ही हमारी पसंद होगी.

अच्छा यह बताइए कि हरभजन को संगीत पसंद है? उनका सबसे पसंदीदा गाना कौंन सा है?

संगीत उसे बहुत पसंद है. हर तरह का संगीत सुनता है. एक गाना सुबह से जो ज़ुबान पर चढ़ता है तो दिन भर वही गाना गाता रहता है...चाहे वह गाना ग़लत ही क्यों न हो. उसे गुरदास मान के गाने बेहद पसंद हैं. वैसे आजकल अक्सर वह यह गाना गुनगुनाता रहता है, "मैं जहाँ रहूँ....मैं कहीं भी हूँ...तेरी याद साथ है".

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