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हरभजन पर आरोप हटाने का स्वागत | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हरभजन सिंह पर नस्लवादी टिप्पणी के आरोप हटाने पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने राहत की सांस ली है और फ़ैसले का स्वागत किया है. बीसीसीआई के अध्यक्ष शरद पवार ने ख़ुशी जताते हुए कहा, " जज ने सही फ़ैसला सुनाया है और बीसीसीआई शुरु से कह रहा था कि हरभजन के ख़िलाफ़ नस्लवादी टिप्पणी का आरोप लगाना बोर्ड को स्वीकार नहीं है." बीसीसीआई अध्यक्ष शरद पवार ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के अपील कमिश्नर जॉन हेंसन ने सही फ़ैसला सुनाया है. बीसीसीआई की ओर से हरभजन की पैरवी के लिए नियुक्त वीआर मनोहर के अनुसार हरभजन के ख़िलाफ़ गाली देने का आरोप लगा और नियमों के अनुसार उन्हें आधी मैच फ़ीस का जुर्माना भरना होगा. इसके पहले बीसीसीआई के उपाध्यक्ष ललित मोदी ने सुनवाई से पहले मुबंई में कहा था, ''यदि हरभजन के ख़िलाफ़ नस्लवादी टिप्पणी का आरोप वापस नहीं लिया गया तो भारतीय टीम त्रिकोणीय वनडे सिरीज़ से हट सकती है.'' ग़ौरतलब है कि ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी एंड्रयू साइमंड्स पर कथित नस्लवादी टिप्पणी करने के मामले में हरभजन सिंह पर तीन टेस्ट मैचों के लिए लगा प्रतिबंध हटा लिया गया है लेकिन उन्हें मैच की आधी फ़ीस का जुर्माना भरना होगा. इस घटना के बाद मैच रेफ़री माइक प्रॉक्टर ने हरभजन पर तीन मैचों का प्रतिबंध लगा दिया था. 'मैदान की बात मैदान पर' फ़ैसले के बाद भारतीय टीम के मैनेजर चेतन चौहान का कहना था कि मैदान की बातें मैदान में ही छोड़ देनी चाहिए. मलय नीरव से बातचीत में चेतन चौहान ने कहा कि मैदान के अंदर की बातें तभी बाहर आनी चाहिए जब बात हाथ से निकल जाए और झगड़ा या हाथापाई हो जाए. उनका कहना था कि मैदान पर थोड़ी टीका टिप्पणी और गर्मागर्मी गंभीर बात नहीं है बशर्ते मामला टकराव तक न पहुँच जाए. चेतन चौहान का मानना है कि कोई भी खेल अब 'जेंटलमैन गेम' नहीं रह गया है, ज्यादातर सभी खेल पेशेवर हो गए हैं. इन पर खिलाड़ियों की जीविका निर्भर है इसलिए खिलाड़ी तरह तरह के हथकंडे अपनाते हैं. उसका मानना है कि भारतीय टीम को पिछली बातों को भुला कर अब खेल पर ध्यान देना चाहिए. 'नहीं रहा वो खेल' पूर्व क्रिकेटर मदनलाल का भी मानना है कि क्रिकेट अब 'जेंटलमैन गेम' नहीं रहा है क्योंकि अब हर टीम किसी भी तरह जीतना चाहती है.
मदनलाल का कहना था कि यदि ये मामला नहीं सुलझता तो अंतरराष्ट्रीय खेल परिषद के लिए मुश्किल हो जाती. उनका मानना था कि ये मामला मैदान पर ही सुलझा लिया जाना चाहिए था. पूर्व क्रिकेटर सैयद किरमानी का कहना है कि हरभजन पर 50 फ़ीसदी मैच फीस का जुर्माना और ब्रै़ड हॉग को बरी करना, उनकी समझ के परे है. किरमानी भी मानते हैं कि अब क्रिकेट 'जेंटलमैन गेम' नहीं रहा. उनका कहना था कि क्रिकेटर जब कचहरी में खड़े नज़र आएँ तो उससे इस बात का अंदाज़ा लगाया जा सकता है. वो कहते हैं कि विवाद इतना तूल नहीं पकड़ना चाहिए था, ग़लतियाँ किसी से भी हो सकती है, उसको स्वीकार करना चाहिए. |
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