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इकतीस साल बाद खेली भाइयों की जोड़ी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विश्व विजेता टीम के स्वदेश वापसी के भव्य और अभूतपूर्व जश्न के बीच जब बड़ौदा के पठान बंधुओं ने तिरंगा लहराकर लोगों का अभिवादन किया तो समाँ बंध गया. पठान बंधु यानी इरफ़ान और उनके बड़े भाई यूसुफ़. मुंबई हवाई अड्डे से वानखेड़े स्टेडियम के 25 किलोमीटर के विजय जुलूस में खेलप्रेमियों की निगाहें अपने चहेते स्टारों को तलाश रही थी, लेकिन इन सबके बीच कुछ पल के लिए ये नज़रें पठान बंधुओं पर ज़रूर टिकीं. वडोदरा क्रिकेट संघ (वीसीए) ने पठान बंधुओं को 10-10 लाख रुपए का नगद पुरस्कार देने की घोषणा की है. साथ ही गुजरात सरकार ने दोनों भाइयों को पाँच पाँच लाख रुपए देने की घोषणा की है. जोड़ियाँ भारत के 75 साल के क्रिकेट इतिहास में देश का प्रतिनिधित्व करने वाले भाइयों की यह आठवीं जोड़ी है. दक्षिण अफ़्रीका में संपन्न हुए इस टूर्नामेंट में लगभग पूरा वक़्त बेंच पर बिताने वाले यूसुफ़ को आख़िरकार वांडरर्स में मौका मिला और उन्हें सलामी बल्लेबाज़ के रूप में आजमाया गया. भारतीय क्रिकेट में 31 साल बाद भाइयों की जोड़ी आई है. इससे पहले 1976 में मोहिंदर और सुरेंदर अमरनाथ की जोड़ी न्यूज़ीलैंड और वेस्टइंडीज़ के दौरे पर गई थी. ट्वेन्टी-20 विश्व कप में भारत के अलावा चार टीमें ऐसी थी, जिनमें भाइयों की जोड़ियाँ खेल रही थीं. इनमें दक्षिण अफ़्रीका के मोर्केल बंधु (एल्बी और मोर्नी), न्यूज़ीलैंड के मैकमिलन बंधु (ब्रैंडन और मैथन) और कीनिया के ओबुया बंधु (डेविन और कोलिन) शामिल हैं. पठान बंधुओं के अलावा भारत के लिए क्रिकेट खेलने वाले भाइयों में वज़ीर और नज़ीर अली, अमर सिंह और रामजी, सीके और सीएस नायडू, अरविंद और माधव आप्टे, कृपाल और मिल्खा सिंह, सुभाष और बालू गुप्ते, मोहिंदर और सुरेंदर अमरनाथ की जोड़ियाँ शामिल हैं. इरफ़ान और यूसुफ़ ट्वेन्टी-20 विश्व कप के फ़ाइनल में खेलने वाली भाइयों की पहली जोड़ी है. हालाँकि विश्व कप फ़ाइनल खेलने वाले बंधुओं में ऑस्ट्रेलिया के चैपल बंधु (ग्रेग और इयान), वॉ बंधु (स्टीव और मार्क) शामिल हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें वानखेड़े स्टेडियम में टीम का अभिनंदन26 सितंबर, 2007 | खेल की दुनिया झंडे, नारे और अविश्वसनीय उत्साह26 सितंबर, 2007 | खेल की दुनिया बदली क्रिकेट की दिशा..25 सितंबर, 2007 | खेल की दुनिया बस इंतज़ार है भारतीय टीम का...25 सितंबर, 2007 | खेल की दुनिया भारतीय क्रिकेट सुरक्षित हाथों में है: सचिन25 सितंबर, 2007 | खेल की दुनिया 'जब भी मौक़ा मिलेगा जान लगाकर खेलूँगा'25 सितंबर, 2007 | खेल की दुनिया 'बल्ले से जवाब दे सकता हूँ'25 सितंबर, 2007 | खेल की दुनिया 'विश्व कप में मेहनत काम आई'24 सितंबर, 2007 | खेल की दुनिया | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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