|
'विश्व कप में मेहनत काम आई' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विश्व कप जीतने के बाद महेंद्र सिंह धोनी: ट्वेन्टी-20 विश्व कप में हमने सपने नहीं देखे, हर मैच को एक अलग मैच के रूप में लिया और चांस की तरह देखा कि अगर ये मैच जीत जाएँगे तो अगले दौर के लिए क्वालीफ़ाई करेंगे. हम लोग बहुत व्यावहारिक थे, इसलिए हम प्रतियोगिता में सफल रहे. जब इरफ़ान पठान की गेंद पर अफ़रीदी ने शॉट लगाया था, तो मैं विकेट के पीछे से श्रीसंत को ही देख रहा था कि वो हिल किस तरह रहा है और कैच पकड़ेगा या नहीं. उस पर भी दवाब बहुत था लेकिन अच्छा कैच लिया उसने. पूरे विश्व कप में भारत एक टीम की तरह खेली है. हर उसी स्थिति में जब भारत थोड़ी नाज़ुक हालत में था तो पूरी टीम ने अच्छा खेला है- कभी रन आउट कर के या अच्छी फ़ील्डिंग करके या फिर अच्छी गेंदबाज़ी करके. *********************************************** विश्व कप जीतने के बाद इरफ़ान पठान:
मैं तो यही कहूँगा कि ऊपर वाले का शुक्र है, मेहनत काम आई. क्रिकेट हमेशा सिखाता है, कभी ऊपर कभी नीचे. लेकिन अच्छा है मेहनत काम आ रही है. मुझे लगता है कि हम विश्व कप इसलिए जीते क्योंकि हम बिना किसी दवाब के खेले. किसी ने हमें चांस नहीं दिया था कि हम भी चैंपिनय हो सकते हैं. हर मैच को वन-बाय-वन खेल रहे थे. आगे भी ऐसा ही खेलना होगा. हार-जीत तो है ही, बस क्रिकेट का मज़ा लेना है. जब पठान से पूछा गया कि क्या ट्वेन्टी-20 में जीत भारतीय क्रिकेट के लिए नई सुबह है तो उन्होंने हँसते हुए कहा, सुबह तो कब की हो गई, अब तो दिन अच्छा बनाना है. बहुत अच्छी टीम है, बहुत अच्छा खेल रहे हैं. जैसा अभी चल रहा है बस वैसे ही चलते रहना चाहिए. (खेल पत्रकार सुनंदन लेले से बातचीत पर आधारित) |
इससे जुड़ी ख़बरें युवा ब्रिगेड के क़दमों में दुनिया24 सितंबर, 2007 | खेल की दुनिया 'झारखण्ड रत्न' से सम्मानित होंगे धोनी24 सितंबर, 2007 | खेल की दुनिया | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||