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बदली क्रिकेट की दिशा.. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मार्च 2007, 50-50 क्रिकेट विश्व कप- छह हफ़्ते लंबा, दर्शकों की कमी, भारत सुपर-आठ से पहले ही टूर्नामेंट से बाहर, भारत भर में खिलाडि़यों के जलते पुतले. लेकिन समय का पहिया घूमने में ज़्यादा वक़्त नहीं लगा. करीब छह महीने बाद आज भारत ट्वेन्टी-20 विश्व कप विजेता है. 25 मार्च 2007 को बांग्लादेश की बरमूडा पर जीत के बाद भारत की विश्व कप में बने रहने की तकनीकी संभावनाएँ भी ख़त्म हो गई थी और वो आधिकारिक रूप से वर्ल्ड कप से बाहर हो गया. और पूरे छहे महीने बाद 25 सिंतबर 2007 को भारत के लोग ट्वेन्टी-20 जीत का जश्न मना रहा है. जिस धोनी के घर विश्व कप की हार के बाद पुलिस तैनात करनी पड़ी थी, उसी राँची में उनकी पूजा हो रही है. वैसे टवेन्टी-20 विश्व कप शुरू होने से पहले ही इसके ख़िलाफ़ विरोध के स्वर उठने लगे थे, ख़ासकर भारत में. लेकिन दक्षिण अफ़्रीका में हुए ट्वेन्टी-20 विश्व कप के बाद अवधारणा बदलती नज़र आ रही है- रोमांचक मैच, चौकों-छक्कों की बरसात, दर्शकों की भीड़ और चंद घंटों में मैच का नतीजा. ट्वेन्टी-20 क्रिकेट का नया चलन?
ट्वेन्टी-20 के बारे में वरिष्ठ खेल पत्रकार प्रदीप मैगज़ीन कहते हैं, “ट्वेन्टी-20 विश्व कप शुरू होने से पहले तो भारत खेलना ही नहीं चाहता था इसमें क्योंकि उसको लगता था कि 50-50 वनडे मैचों से ही पैसे बनाए जाते हैं. लेकिन अब तो मुझे लगता है कि भारत ट्वेन्टी-20 मैच ही खेलना चाहेगा जीतने के बाद. ट्वेन्टी-20 तो हिट हो गया है.यही क्रिकेट के छोटे वर्ज़न का भविष्य है.” ऐसा नहीं है कि ट्वेन्टी-20 के आलोचक नहीं है. एक ओवर में छह- छक्के, है-ट्रिक, बोल आउट से मैच का फ़ैसला- कई विशलेषकों ने ट्वेन्टी-20 को क्रिकेट का अपमान तक कहा है. लेकिन इन सब बातों को नकारते हुए प्रदीप मैगज़ीन कहते हैं कि ऐसे लोगों ने तो 50-50 क्रिकेट के शुरू होने पर भी यही कहा था. उनका मानना है, "क्रिकेट तो एक हिसाब से तभी डाइल्यूट हो गया था जब वनडे क्रिकेट आया था.50-50 मैचों को देखने वाले ख़ुद को प्यूरिस्ट नहीं कह सकते क्योंकि 50-50 एक तरह से टेस्ट क्रिकेट को डाइल्यूट करती है. ट्वेन्टी-20 तो 50-50 का भी छोटा रूप है." सवाल अब ये है कि अगर ट्वेन्टी-20 भविष्य का फ़ॉर्मेट है तो 50 ओवर वाले मैचों और टेस्ट क्रिकेट का क्या होगा. क्या इन पर ख़तरे के बादल मंडरा रहे हैं? इस पर खेल पत्रकार विजय लोकपल्ली कहते हैं, “मैं नहीं मानता. जब 50-50 मैच शुरू हुए थे तो भी क्रिकेट पंडित घबराते थे कि टेस्ट का क्या होगा लेकिन टेस्ट क्रिकेट की आज भी अपनी जगह है. फ़र्क यही है कि बल्लेबाज़ तेज़ खेलने लगे हैं, ड्रॉ कम होते हैं. जैसे बॉक्सिंग में प्रोफ़ेशनल बॉक्सिंग होती है, एमेच्योर बॉक्सिंग होती है और नकल बॉक्सिंग होती है..वैसे ही क्रिकेट में भी तीनों फ़ॉर्मेट की अपनी जगह रहेगी. ट्वेन्टी-20 लोकप्रिय ज़रूर होगा लेकिन टेस्ट को इससे कोई ख़तरा नहीं है.” ग्लोबल असर विशलेषकों का कहना है कि फ़ाइनल में जगह बनाकर और बेहतरीन फ़ाइनल खेलने के बाद पाकिस्तान में भी ट्वेन्टी-20 का चलन बढ़ेगा. विश्व के परिदृश्य पर भारतीय महाद्वीप का क्रिकेट पर ख़ासा दबदबा है. आख़िर आमदनी का सबसे बढ़िया ज़रिया यहीं है. ऐसे में अगर भारतीय उपमहाद्वीप ट्वेन्टी-20 की ओर बढ़ेगा तो इसका ग्लोबल असर भी पड़ेगा. प्रदीप मैगज़ीन कहते हैं, "लोग ट्वेन्टी-20 मैच देख रहे हैं और प्रायोजक भी बेहद खुश हैं. पैसा, टेलीवीज़न चैनल और लोग ये तय करते हैं कि कौन से खेल टिकेगा और फलेगा-फूलेगा. वैसे मज़े के बात ये है कि इंग्लैंड ने टवेन्टी-20 शुरू किया था लेकिन विश्व कप भारत ने जीत लिया है, अब प्रायोजकों के ज़रिए ये इंग्लैंड समेत दूसरे देशों में जाएगा और सबसे ज़्यादा आलोचना भी इंग्लैंड में ही होगी कि भारतीय महाद्वीप ने क्रिकेट को ख़राब कर दिया." इस बीच बहस ये भी चल रही है कि ट्वेन्टी-20 का खिलाड़ियों के खेल पर क्या असर होगा. विजय लोकपल्ली मानते हैं कि ट्वेन्टी-20 से बहुत ज़्यादा इनोवेशन नहीं हो पाएगा. वे कहते हैं, "एक बल्लेबाज़ चौका मार सकता है, छक्का मार सकता है और क्या करेगा. गेंदबाज भी गेंद एक सीमित एरिया में ही फेंक सकता है. उसके बाहर डालेंगे तो वाइड हो जाएगी." हालांकि वे य़े ज़रूर स्वीकार करते हैं कि अब बल्लेबाज़ थोड़ा तेज़ खेलने लगे हैं और गेंदबाज़ गेंद फेकने के नए-नए ऐंगल ढूँढने लगे हैं. वे कहते हैं कि अगर ट्वेन्टी-20 के ज़रिए खेल में कुछ नया होता है तो टेस्ट क्रिकेट थोड़ा और रोचक हो जाएगा, गेंदबाज़ थोड़ा और पैना होना चाहेंगे. यंग ब्रिगेड
भारतीय क्रिकेट बोर्ड और ज़ी टीवी पहले ही ट्वेन्टी-20 लीग की घोषणा कर चुके हैं. आईसीसी ने अपना नाम ट्वेन्टी-20 के साथ जोड़कर इसकी अहमियत की स्वीकारा है. भारत के गली-मोहल्लों में गिल्लियाँ लगाकर कम ओवरों का क्रिकेट मैच खेलते और हुड़दंग मचाते बच्चों और युवाओं का नज़ारा बड़ी आम बात है. 'गली क्रिकेट' के इसी स्वरूप को अगर अंतरराष्ट्रीय जामा और मान्यता मिली है तो इसमें हर्ज़ ही क्या है? 50-50 क्रिकेट विश्व कप में मिली हार और मायूसी के बाद ट्वेन्टी-20 में जीत ने भारत के क्रिकेट प्रशंसकों और खिलाड़ियों में नई जान फूँक दी है. अब तक वरिष्ठ खिलाड़ियों के साए में खेल रहे ऐसे कई युवा खिलाड़ी थे जिनकी प्रतिभा निखर कर सामने नहीं आ पाई थी. ऐसे कई युवा खिलाड़ियों को हाशिए से सुर्ख़ियों में लाने का श्रेय भी ट्वेन्टी-20 के नाम रहेगा. रोहित शर्मा, जोगिंदर शर्मा, रॉबिन उथप्पा के घर के बाहर हुए जश्न की तमाम टीवी चैनलों पर आई तस्वीरें इसका गवाह है. ट्वेन्टी-20 को लेकर बहस जारी है और शायद चलती रहेगी लेकिन फ़िलहाल तो ये 'फ़्लवेर ऑफ़ द सीज़न' है. ट्वेन्टी-20 के भविष्य को लेकर चली पूरी बहस को क्रिकेट स्तंभकार मुकुल केसवन कुछ यूँ समेटते हैं, "ये फॉर्मेट तो अब टिकेगा. ट्वेन्टी-20 विश्व कप जीतकर भारतीय टीम ने सुनिश्चित किया है कि इसका भविष्य सुरक्षित है." |
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