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सोमवार, 24 सितंबर, 2007 को 18:49 GMT तक के समाचार
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'इससे बड़ी जीत और क्या हो सकती है'

हरभजन
प्रभाष जोशी मानते हैं कि गेंदबाज़ों ने मुख्य भूमिका निभाई
ट्वेंटी-ट्वेंटी को सारी दुनिया में बल्लेबाज़ों का खेल माना जाता है लेकिन उसके फ़ाइनल का निपटारा गेंदबाज़ों ने किया. इससे बड़ी कोई और क्रिकेट की जीत नहीं हो सकती.

ये मानकर कि लोगों को चौके-छक्के लगने में ही ज़्यादा आनंद आता है, इसको 20-20 ओवरों का रखा गया लेकिन इसमें सारे बल्लेबाज़ों पर गोलंदाज़ किस तरह हावी हो सकते हैं वो इस फ़ाइनल से सिद्ध हो गया.

एक ओवर में दो विकेट मलिक का और अफ़रीदी का पठान ने जो लिए उसके बाद पाकिस्तान टीम की जान निकल गई थी. मलिक आख़िर तक टिक कर बल्लेबाज़ी कर सकते थे. वहीं अफ़रीदी दो ओवर में ही मैच का फ़ैसला कर सकते थे. सारी दुनिया इस बात को मानती है.

इरफान पठान ने दोनों को आउट किया इसे मैं मैच का निर्णायक पल मानता हूँ.

गेंदबाज़ रहे हावी

ये जो सारी दुनिया में ख़ासकर बाजारू मीडिया के ज़रिए प्रचारित किया जा रहा है कि चौक्के-छक्के लगते हैं तो ही देखने में आनंद आता है, ग़लत है. ज़रा देखिए चौके छक्के पहले जितने लगे हों, फ़ाइनल में कितने लगे?

फ़ाइनल में स्पिन और तेज़ गेंदबाज़ों ने अच्छी बॉलिंग की है. यहाँ तक कि इस टूर्नामेंट के सबसे अच्छे बल्लेबाज़ कुछ नहीं कर पाए. युवराज सिंह की बल्लेबाज़ी चढ़ के बोल रही थी, महेंद्र सिंह धोनी को देखें जिन्होंने लगातार अच्छी बैटिंग की थी. वहीं पाकिस्तान के अफ़रीदी को देखें जो सबसे विस्फोटक बल्लेबाज़ माने जाते हैं, एक गेंद में बाहर हुए.

 ये जो सारी दुनिया में ख़ासकर बाजारू मीडिया के ज़रिए प्रचारित किया जा रहा है कि चौक्के-छक्के लगते हैं तो ही देखने में आनंद आता है, ग़लत है. ज़रा देखिए चौके छक्के पहले जितने लगे हों, फ़ाइनल में कितने लगे?

सिर्फ़ एक मिस्बाह उल हक़ ने उस प्रकार की पारी खेली जैसी हिंदुस्तान की तरफ़ से गौतम गंभीर ने खेली थी. मज़ेदार बात ये है कि ये दोनों खिलाड़ी एकदिवसीय क्रिकेट के एक्सपर्ट बल्लेबाज़ नहीं हैं, बल्कि ये रेगुलर क्रिकेट के अच्छे बल्लेबाज़ हैं.

अलग है दुनिया

सचिन,सौरभ और द्रविड़ अपना जो क्रिकेट खेलते हैं वह आज भी कायम है क्योंकि टी-20 टेस्ट क्रिकेट को ख़त्म कर देगा यह तो सिर्फ़ बाज़ारू लोगों का मानना हो सकता है.

युवराज सिंह

जिन्होंने पूरी उम्र क्रिकेट खेला और देखा है वह सब कह चुके हैं कि टी-20 या एकदिवसीय कभी भी टेस्ट का स्थान नहीं ले सकता.

क्रिकेट खेलने की हुनर और परीक्षा जितनी टेस्ट मैच में होती है उतनी एकदिवसीय में नहीं होती, टी-20 में तो होती ही नहीं है.

इसलिए चवन्नी छाप सिनेमा की तरह टी-20 चलता रहेगा, लेकिन क्लासिक थिएटर और क्लासिक फ़िल्म देखने वाले अब भी टेस्ट क्रिकेट को देखते रहेंगे.

क्या किरदार बदलेगा

भारत की तरफ़ से सबसे अच्छी बल्लेबाज़ी युवराज सिंह ने की है जो क्लासिकल क्रिकेट के भी अच्छे बल्लेबाज़ हैं. महेंद्र सिंह धोनी ने की जो टेस्ट क्रिकेट में भी अच्छी बल्लेबाज़ी करते हैं.

 चवन्नी छाप सिनेमा की तरह टी-20 चलता रहेगा, लेकिन क्लासिक थिएटर और क्लासिक फ़िल्म देखने वाले अब भी टेस्ट क्रिकेट को देखते रहेंगे.

गौतम गंभीर टेस्ट और वनडे दोनों में अच्छी बैटिंग करते हैं. जो लोग टी-20 के विशेषज्ञ हैं और इंग्लैंड में वाह-वाही लेते हैं, उनपर नज़र डालें तो पूरे टूर्नामेंट में एक से ज़्यादा मैच नहीं जीत पाए.

टी-20 इंग्लैंड में जन्मा और वहाँ पर दो साल से खेला जा रहा है. उस टीम की टी-20 वर्ल्ड कप में जितनी दयनीय हालत हुई है उतनी किसी क्रिकेट टीम की नहीं हुई है. ये मत मानें कि टी-20 किसी क्रिकेट के खेलने की कला और हुनर हो पाएगा.

इरफ़ान पठानमैच के अहम पल
जिन क्षणों ने भारत के लिए बदली मैच की दिशा
निराश हैं पाकिस्तानी
हार के बाद पाकिस्तानी क्रिकेट प्रेमियों की राय.
शोएब अख़्तर और महेंद्र सिंह धोनीफ़ाइनल का स्कोरकार्ड
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धोनीधोनी को 'झारखंड रत्न'
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