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'कामयाबी इतनी बड़ी, अब हुआ अहसास' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का कहना है कि टीम ने ट्वेन्टी-20 विश्व कप जीता ज़रूर, लेकिन यह कामयाबी इतनी बड़ी है, इसका अहसास स्वदेश लौटकर ही हुआ. खेलप्रेमियों से खचाखच भरे मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में टीम के स्वागत समारोह के बाद धोनी ने कहा, "लोगों का जोश और जुनून देखकर हम अचंभित हैं. ये सिर्फ़ मेरे विचार नहीं है. हवाई अड्डे से स्टेडियम के सफ़र के दौरान सिर्फ़ मुझे ही नहीं सभी 15 खिलाड़ी यह समझ नहीं पा रहे थे कि यह हो क्या रहा है." प्रशंसकों का शुक्रिया अदा करते हुए उन्होंने कहा, " मुझे और टीम को कप जीतने की बहुत खुशी है. हमने विश्व कप जीता है, लेकिन ये कामयाबी इतनी बड़ी है, इसका अहसास हमें स्वदेश वापसी और आप लोगों का जोश और जुनून देखने के बाद ही हुआ." अभिभूत हूँ धोनी ने कहा, " लोगों की यह भीड़ देखकर मैं अभिभूत हूँ. कहा जाता है कि मुंबई चौबीसों घंटे चलती रहती है, लेकिन आज हमने पहली बार इसे रुकते हुए देखा." फ़ाइनल मुक़ाबले के बारे में उन्होंने कहा, "ये तो नहीं कह सकता कि घबराहट नहीं थी. थोड़ी नहीं बल्कि काफ़ी थी. जब मिस्बा का शॉट हवा में उछला तो पहले मैने सोचा कि गेंद श्रीसंत की पीछे गिरेगी, लेकिन फिर देखा कि श्रीसंत इसके नीचे हैं. मैं श्रीसंत को नहीं बल्कि उनके हाथों को देख रहा था और कैच पकड़े जाने का इंतज़ार कर रहा था." विश्व कप जीत को टीम प्रयासों का नतीज़ा बताते हुए उन्होंने कहा कि सभी 15 खिलाड़ियों ने अपना सौ फ़ीसदी प्रदर्शन किया और टीम की जीत में योगदान दिया. धोनी ने कहा, " मैने जिसे भी गेंद थमाई, उसने बेहतरीन गेंदबाज़ी की और जिसे बल्लेबाज़ी के लिए भेजा उसने शानदार प्रदर्शन किया." धोनी ने माना कि उम्मीदों का बोझ कम होने से टीम की जीत की राह आसान हुई. उन्होंने कहा, " जब हम दक्षिण अफ़्रीका पहुँचे तो कोई भी हमें ख़िताब के दावेदारों में नहीं गिन रहा था. मैने साथी खिलाड़ियों से हर मैच का लुत्फ़ उठाने और अपना शत प्रतिशत प्रदर्शन करने को कहा और नतीजा सबके सामने है." यकीन धोनी ने कहा कि उन्हें अपने खिलाड़ियों पर पूरा यकीन था और खेल के दौरान वह कभी तनाव में नहीं रहे. उन्होंने कहा कि टीम की कोशिश जीत के इस सिलसिले को आगे भी बनाए रखने की होगी. राँची के धुरंधर विकेटकीपर बल्लेबाज़ धोनी ने कहा कि महानगरों के मुक़ाबले छोटे स्थानों से आने वाले खिलाड़ियों में दम है. उन्होंने कहा, " मेरा मानना है कि छोटे स्थानों से आने वाले खिलाड़ी शारीरिक और मानसिक तौर पर ज़्यादा मज़बूत होते हैं. उनमें खुद को साबित करने का दमखम अधिक होता है." धोनी ने कहा कि बड़े शहरों या महानगरों से आने वाले खिलाड़ियों को ज़्यादा सहूलियतें मिलती हैं. हालाँकि अगले ही पल धोनी ने बात सँभालते हुए कहा, " ट्वेन्टी-20 के इस फॉर्मेट में इससे फ़र्क नहीं पड़ता. सभी खिलाड़ियों ने ज़ोरदार प्रदर्शन किया." | इससे जुड़ी ख़बरें सूरमाओं का शानदार स्वागत26 सितंबर, 2007 | खेल की दुनिया झंडे, नारे और अविश्वसनीय उत्साह26 सितंबर, 2007 | खेल की दुनिया बदली क्रिकेट की दिशा..25 सितंबर, 2007 | खेल की दुनिया टी-20 सफल लेकिन वनडे महत्वपूर्ण25 सितंबर, 2007 | खेल की दुनिया भारतीय क्रिकेट सुरक्षित हाथों में है: सचिन25 सितंबर, 2007 | खेल की दुनिया 'जब भी मौक़ा मिलेगा जान लगाकर खेलूँगा'25 सितंबर, 2007 | खेल की दुनिया 'बल्ले से जवाब दे सकता हूँ'25 सितंबर, 2007 | खेल की दुनिया 'विश्व कप में मेहनत काम आई'24 सितंबर, 2007 | खेल की दुनिया | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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