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संघर्ष से क्या घबराना: श्रीसंत | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के युवा तेज़ गेंदबाज़ श्रीसंत का कहना है कि वे ख़राब फ़ॉर्म और फ़िटनेस की समस्या से जल्द ही उबर जाएँगे और विश्व कप में अच्छा प्रदर्शन करेंगे. उन्होंने कहा कि वे संघर्ष से घबराते नहीं बल्कि उन्हें संघर्ष करके कोई चीज़ हासिल करना ज़्यादा अच्छा लगता है. श्रीसंत का कहना है कि वे इस बात को लेकर चिंतित नहीं कि उन्हें विश्व कप के कुछ मैचों में बाहर भी बैठना पड़ सकता है. जानकारों का मानना है कि अजित अगरकर, ज़हीर ख़ान और मुनाफ़ पटेल जैसे गेंदबाज़ों की मौजूदगी में श्रीसंत को शायद उतना मौक़ा ना मिले. 'चिंतित नहीं' श्रीसंत का कहना है कि वे इस बात को लेकर बिल्कुल चिंतित नहीं. उन्होंने कहा, "मैं संघर्ष करना जानता हूँ. चीज़े आसानी से मिलें इससे अच्छा है मैं कुछ संघर्ष करूँ. मुझे भरोसा है कि मुझे मौक़ा ज़रूर मिलेगा." भारत का पहला मैच 17 मार्च को बांग्लादेश के ख़िलाफ़ है. 24 वर्षीय श्रीसंत ने 27 मैचों में 35 विकेट लिए हैं. श्रीसंत का ये पहला विश्व कप है और वे इसे लेकर काफ़ी उत्साहित हैं. श्रीसंत ने कहा, "विश्व कप में खेलना एक सपने के सच होने की तरह है. ये मेरा पहला विश्व कप है और मैं भाग्यशाली हूँ कि मुझे टीम में जगह मिली है." उन्होंने उम्मीद जताई कि विश्व कप में उनकी भी अहम भूमिका होगी. श्रीसंत ने कहा कि वे अपनी फ़िटनेस पर ख़ास ध्यान दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य टीम के लिए अच्छा खेलना है. पिछले साल भी श्रीसंत भारतीय टीम के साथ वेस्टइंडीज़ के दौरे पर गए थे. उनका कहना है कि वो दौरा उनके लिए काफ़ी फ़ायदेमंद रहा. | इससे जुड़ी ख़बरें ऑस्ट्रेलिया से बुरी तरह हारा स्कॉटलैंड15 मार्च, 2007 | खेल ...तो कैन छोड़ देंगे सचिन का कैच 14 मार्च, 2007 | खेल क्या कमज़ोर टीमों को मिले अधिकार14 मार्च, 2007 | खेल पहले ही मैच में पाकिस्तान धराशायी13 मार्च, 2007 | खेल विश्व कप क्रिकेट की रंगारंग शुरुआत11 मार्च, 2007 | खेल फिर सहवाग के बचाव में आए द्रविड़11 मार्च, 2007 | खेल 'पिचें धीमी हुईं, तो रोमांच कम होगा'11 मार्च, 2007 | खेल 'विश्व कप में खेलने का पूरा भरोसा था'10 मार्च, 2007 | खेल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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