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'विश्व कप में खेलने का पूरा भरोसा था' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी वीरेंदर सहवाग का कहना है कि उन्हें पूरा विश्ववास था कि विश्व कप में खेलने का मौका उन्हें ज़रूर मिलेगा. बीबीसी से ख़ास बातचीत में सहवाग ने कहा कि हर खिलाड़ी के करियर में एक दौर आता है जब वो रन नहीं बना पाता है. सहवाग ने बताया कि इस दौरान उन्होंने यही बेहतर समझा कि वे तनावमुक्त रहें, परिवार के साथ समय बिताएँ और बल्लेबाज़ी का अभ्यास करते रहें. खराब प्रदर्शन के चलते वीरेंदर सहवाग को कुछ मैचों में भारतीय टीम में जगह नहीं दी गई थी. इस समय के बारे में सहवाग कहते है," ज़ाहिर है रन नहीं बन रहे थे, ये मेरे लिए बड़ी चुनौती थी और इस चुनौती को पार कर पाना ज़रूरी था. इसके लिए मैने अभ्यास किया और योगा भी की. अब मैं काफ़ी अच्छा महसूस कर रहा हूँ." बल्लेबाज़ी स्टाइल अपने बल्लेबाज़ी स्टाइल के बारे में सहवाग कहते हैं कि वो ये कोशिश करते हैं कि विकेट पर देर तक रहें लेकिन अगर कोई गेंद मारने लायक हो सहवाग कहते हैं कि वनडे मैच में अगर आप शॉट मारने का मौका खो देते हैं तो अच्छा स्कोर नहीं बना सकता और दबाव बढ़ने लगता है. बल्लेबाज़ी स्टाइल में बदलाव के बारे में सहवाग ने कहा, "ऐसा नहीं है कि मैं अपने शॉट कम रहा हूँ लेकिन मैं कोशिश कर रहा हूँ कि पहले पाँच-छह ओवर गेंद छोड़कर खेलूँ और उसके बाद अपने शॉट लगाउँ." 'उपकप्तानी जाने का दुख नहीं' उपकप्तानी का पद जाने पर सहवाग कहते हैं कि उन्हें इस बात का दुख नहीं हैं क्योंकि उनके मुताबिक किसी भी खिलाड़ी की अहमियत टीम में रहने से होती है न कि कप्तान या उपकप्तान बनाए जाने से. सहवाग कहते हैं, "मुझे उम्मीद भी नहीं की थी मैं उप्कप्तान बनूँगा. जब मुझे उपकप्तान बनाया गया था तो भी मैं उत्साहित नहीं था और जब निकाला गया तो भी दुख नहीं है." सहवाग का कहना है कि उपकप्तान न होने पर भी मैदान पर खेलने वाले खिलाड़ी पर दबाव तो रहता ही है. वीरेंदर सहवाग मानते हैं कि प्रदर्शन का दबाव तो हर खिलाड़ी पर रहता है कि लेकिन अहम बात ये है कि उस दबाव से आप किस तरह निपटते हैं. सहवाग कहते हैं कि पिछले कुछ समय में उन्होंने अपनी पुरानी बेहतरीन पारियों के वीडियो देखे हैं और उससे उन्हें मदद भी मिली है. शुरुआती मैचों में परिवारजनों को साथ न आने देने के फ़ैसले पर सहवाग का कहना है कि बीसीसीआई का हर फ़ैसला खिलाड़ियों को मानना पड़ता है क्योंकि वो उनके अच्छे के लिए होता है. क्रिकेट मैचों के दौरान परिवारजनों के साथ होने से खिलाड़ियों का ध्यान सहवाग कहते हैं कि अगर परिवार के लोग साथ हैं तो मैच के बाद क्रिकेट के अलावा भी दूसरे चीज़ों का आनंद लिया जा सकते हैं. |
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