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रविवार, 11 मार्च, 2007 को 13:06 GMT तक के समाचार
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इस विश्व कप में कठिन संघर्ष होने की उम्मीद
वेस्टइंडीज़ में हो रहे विश्व कप में किसी एक टीम को दावेदार बताना मुश्किल है. वेस्टइंडीज़ में विकेट नयी बनी है और किसी को ये पता नहीं कि विकेट कैसी है.

अगर मौजूदा चैम्पियन ऑस्ट्रेलिया को देखा जाए, तो पिछले पाँच एक दिवसीय मैचों में टीम को हार ज़रूर मिली है और उनके कई खिलाड़ी घायल भी हैं, लेकिन वे अपने तरीक़े से ही क्रिकेट खेलेंगे.

ऑस्ट्रेलिया की मज़बूती है- उसकी बल्लेबाज़ी. आपको याद होगा कि पिछले विश्व कप का फ़ाइनल भी उन्होंने बल्लेबाज़ी के बूते ही जीता था.

इस बार भी उनकी बल्लेबाज़ी में कोई मुश्किल नहीं. हाँ, अगर कोई कमज़ोरी दिखती है तो वो है गेंदबाज़ी. ब्रेट ली घायल हैं और मैकग्रॉ भी उतने अच्छे फ़ॉर्म में नहीं हैं. लेकिन वेस्टइंडीज़ की विकेट कैसा खेलेगी, इस पर बहुत कुछ निर्भर करेगा.

मुश्किल ये है कि अगर वेस्टइंडीज़ की पिच स्पिन गेंदबाज़ों को मदद करेगी, तो ऑस्ट्रेलिया की टीम भारत, श्रीलंका जैसी टीमों से पिछड़ सकती है, जिनके पास विश्व स्तरीय स्पिनर हैं.

विकेट की अहम भूमिका

दक्षिण अफ़्रीका की बात करें, तो उनकी भी मुश्किल स्पिन आक्रमण ही है. उनके पास अच्छे ऑलराउंडर हैं, अच्छे बल्लेबाज़ हैं, अच्छे तेज़ गेंदबाज़ हैं लेकिन अच्छे स्पिनर नहीं.

मेरे हिसाब से दक्षिण अफ़्रीका का मज़बूत पक्ष वही है, जो ऑस्ट्रेलिया का है. इन दोनों टीमों की कमज़ोरी सिर्फ़ स्पिन गेंदबाज़ी में ही दिखती है.

विश्व कप से ठीक पहले ऑस्ट्रेलिया को वनडे सिरीज़ में 3-0 से हराने के बाद न्यूज़ीलैंड के भी हौसले बुलंद हैं. न्यूज़ीलैंड टीम में कोई बड़ा नाम भले ना हो लेकिन टीम काफ़ी संतुलित है.

इस विश्व कप में न्यूज़ीलैंड की टीम उलटफेर कर सकती है. हालाँकि देखना होगा कि ऑस्ट्रेलिया को हराने के बाद विश्व कप में वो कैसा शुरुआत करती है.

पाकिस्तान की टीम ने विश्व कप में हमेशा से अच्छा प्रदर्शन किया है. पाकिस्तान की टीम ऐसी है, जिनके प्रदर्शन के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता.

मैं नहीं मानता कि शोएब अख़्तर और मोहम्मद आसिफ़ की कमी पाकिस्तानी टीम को महसूस होगी. क्योंकि पाकिस्तान के पास और भी अच्छे गेंदबाज़ हैं.

बल्लेबाज़ों पर बोझ

वैसे भी वनडे मैचों में बल्लेबाज़ी की मज़बूती ज़्यादा मायने रखती है. पाकिस्तान के पास कई अच्छे बल्लेबाज़ हैं. इसलिए ये कहना उचित नहीं होगा कि शोएब और आसिफ़ के बिना टीम का दावा कम हुआ है.

अगर श्रीलंका की बात करें, तो टीम युवा खिलाड़ियों से भरी हुई है और जयसूर्या जैसे अनुभवी खिलाड़ी भी हैं. कहा जा सकता है कि श्रीलंका की टीम में युवा और अनुभवी खिलाड़ियों का अच्छा संतुलन है.

भारत ने भी इस बार विश्व कप में अच्छी टीम भेजी है. टीम में अनुभवी खिलाड़ी है, युवा खिलाड़ी हैं और कई मैच विनर खिलाड़ी भी हैं.

भारतीय टीम संतुलित दिखती है

भारत के लिए अहम ये होगा कि वो पहले दौर के मैचों में कैसा प्रदर्शन करता है. लेकिन टीम की असली परीक्षा तो सुपर-8 में होगी, जहाँ टॉप टीमों से उसका सामना होगा.

भारतीय टीम वैसे तो काफ़ी अच्छी है लेकिन मेरे विचार से टीम में अच्छे ऑलराउंडरों की कमी है. हाँ, उपयोगी पारियाँ खेलने वाले कई खिलाड़ी हैं. अगर वेस्टइंडीज़ की विकेट धीमी साबित होती है, तो भारत को बहुत फ़ायदा होगा.

जहाँ तक खिलाड़ियों की बात है, तो एक खिलाड़ी की बात करना ठीक नहीं. क्योंकि एक खिलाड़ी के दम पर आप मैच नहीं जीत सकते, फिर ये तो विश्व कप है.

लेकिन महेंद्र सिंह धोनी का मैं ख़ास तौर पर ज़िक्र करना चाहूँगा. जिनकी भूमिका भारत के लिए अहम साबित होने वाली है. और अगर भारतीय टीम में किसी मैच विनर की बात करें, तो वो हैं युवराज सिंह.

मेरे हिसाब से इस विश्व कप में जिन खिलाड़ियों पर नज़र रहेगी, वो हैं रिकी पोंटिंग, धोनी, युवराज सिंह, फ़्लिंटफ़, पीटरसन, मोहम्मद यूसुफ़, एडम गिलक्रिस्ट और याक कैलिस.

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