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शनिवार, 03 मार्च, 2007 को 16:16 GMT तक के समाचार
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'ध्यान अच्छे प्रदर्शन पर केंद्रित रहे'

सौरभ गांगुली
सौरभ गांगुली पिछले विश्व कप में भारतीय टीम के कप्तान थे
सौरभ गांगुली भले ही अब भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान नहीं है लेकिन पिछले दो विश्व कपों का उनका अनुभव, गांगुली को टीम के लिए एक अहम खिलाड़ी बनाता है.

1999 और 2003 -दोनों बार के विश्व कप में गांगुली ने दो शतक जड़े थे. वर्ष 2003 में तो उन्होंने भारतीय टीम की कप्तानी की थी.

विश्व कप के बारे में गांगुली को क्या बात सबसे ख़ास लगती है?

गांगुली कहते हैं,"दर्शकों के लिए विश्व कप हमेशा एक बेहतरीन प्रतियोगिता रही है, इस बार भी ऐसा ही होगा. ये क्रिकेट का सबसे बड़ा टूर्नामेंट है, पूरा माहौल बेहद अच्छा होता है, काफ़ी तैयारियाँ होती हैं और सबकी नज़र इसी पर टिकी रहती है"

पर जब सबका ध्यान विश्व कप पर टिका हो तो ऐसे में अच्छा खेल पाना क्या मुश्किल होता है?

इस बारे में गांगुली कहते हैं,खेल पर ध्यान केंद्रित रखना ज़रूरी है, रन बनाने और विकेट लेने पर ध्यान देना चाहिए बजाए ये सोचने के ये कितनी बड़ी प्रतियोगिता है. जैसे ही आपने अपने दिमाग़ को हावी होने दिया, अब दवाब में आ जाएँगे.

कोई भी जीत सकता है

सौरभ गांगुली का मानना है कि वेस्टइंडीज़ में होने वाला विश्व कप एक खुले मैदान की तरह है जहाँ कोई भी जीत सकता है.

 विश्व कप में रन बनाने और विकेट लेने पर ध्यान देना चाहिए बजाए ये सोचने के ये कितनी बड़ी प्रतियोगिता है. जैसे ही आपने अपने दिमाग़ को हावी होने दिया, अब दवाब में आ जाएँगे

गांगुली ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "ऑस्ट्रेलिया अच्छा खेलेगा, दक्षिण अफ़्रीका की टीम भी अच्छी है, इंग्लैंड भी अच्छा प्रदर्शन करेगा-साथ ही भारत और पाकिस्तान- ये पाँच टीमें हैं."

वेस्टइंडीज़ के बारे में गांगुली का कहना था कि चूँकि वो घरेलू मैदान पर खेल रहे हैं तो वो एक ख़तरनाक टीम हो सकती है.

विश्व कप में कई खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन के लिए संघर्ष करते हुए दिखाई देते हैं लेकिन पिछले विश्व कपों में गांगुली ने शानदार प्रदर्शन किया है.

अपना पहला विश्व कप मैच खेलने के लिए गांगुली को 100 वनडे मैचों का इंतज़ार करना पड़ा. इसमें भी गांगुली ने निराश नहीं किया और दक्षिण अफ़्रीका के खिलाफ़ 97 रन बनाए.

श्रीलंका के ख़िलाफ़ 183 रनों का स्कोर विश्व कप में दूसरा सबसे बेहतरीन स्कोर है.

वर्ष 2003 में उन्होंने कीनिया के ख़िलाफ़ दो शतक बनाए. लेकिन पिछले विश्व कप में उनकी कप्तानी ने लोगों का सबसे ज़्यादा ध्यान खींचा-ख़ासकर जिस तरह उन्होंने आशीष नेहरा, ज़हीर खान और श्रीनाथ की तिकड़ी का हौसला बढ़ाया और उन्हें मैच विनर बनाया.

'अभी और खेलना है'

गांगुली ने 1999 के विश्व कप में 183 रन बनाए थे

कुछ लोगों का मानना है कि टवेन्टी-टवेन्टी क्रिकेट की सफलता और इसी वर्ग में होने वाले विश्व कप ने 50 ओवर वाले विश्व कप की चमक थोड़ी फ़ीकी कर दी है.

लेकिन गांगुली कहते हैं कि उन्हें टवेन्टी-टवेन्टी क्रिकेट में मज़ा नहीं आया और अभी देखना होगा कि ये किस दिशा में जाता है.

गांगुली का कहना है, "इंग्लैंड में उसकी सफलता को मैं समझ सकता हूँ लेकिन मुझे नहीं लगता कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए ये ठीक है."

विश्व कप के कुछ महीनों बाद ही सौरभ गांगुली 35 वर्ष के हो जाएँगे लेकिन वे अभी संन्यास लेने के मूड में नहीं है.

गांगुली कहते हैं, "मैं क्रिकेट के प्रति पूरी तरह समर्पित हूँ, पता नहीं कितनी देर और लेकिन मेरे पास अभी समय है, एक साल, डेढ़ साल या फिर दो साल भी. "

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