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विश्व कप में शामिल टीमों के प्रशिक्षकों का परिचय | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
****************************************************** ऑस्ट्रेलिया
कोच: जॉन बुकानन सिर्फ़ सात प्रथम श्रेणी मैच खेलने वाले जॉन बुकानन को जब ऑस्ट्रेलिया के कोच पद पर चुना गया तो उनकी दावेदारी सबसे कम मानी जा रही थी. लेकिन बॉब सिम्पसन और जेफ़ मार्श के बाद मौक़ा मिला बुकानन को. कोच के रूप में उन्होंने क्वींसलैंड को दो बार शैफ़ील्ड शील्ड का ख़िताब दिलवाया था. ऑस्ट्रेलिया के कोच के रूप में उन्होंने अपने देश को लगातार 15 मैच जितवाए. टेस्ट मैचों में उनके अधीन ऑस्ट्रेलिया ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की. उनके कोच रहते ही ऑस्ट्रेलिया ने वर्ष 2003 के विश्व कप फ़ाइनल में भारत को हराकर ख़िताब पर क़ब्ज़ा किया था. बुकानन ने पहले ही घोषणा कर दी है कि वर्ष 2007 के विश्व कप के बाद वे कोच का पद छोड़ देंगे. ****************************************************** बांग्लादेश
कोच: डेव ह्वाटमोर श्रीलंका में जन्मे ह्वाटमोर बचपन में ही ऑस्ट्रेलिया जाकर बस गए थे. बाद में वे एक बल्लेबाज़ के रूप में उभरे और उनकी टीम थी विक्टोरिया. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की ओर से सात टेस्ट मैच भी खेला. वर्ष 1996 में उन्होंने कोच के रूप में श्रीलंका को विश्व कप ख़िताब जितवाया. वे कुछ समय के लिए लंकाशायर के कोच भी रहे और उन्होंने अपने क्लब को तीन वनडे ट्रॉफ़ी भी जितवाई. श्रीलंका के कोच में कुछ समय बिताने के बाद उन्होंने वर्ष 2003 में बांग्लादेश से नाता जोड़ा और उस समय वे उसके साथ जुड़े हैं. माना जाता है कि उनके कोच रहते बांग्लादेश ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुधार दिखाया है. ****************************************************** बरमूदा
कोच: गस लोगी वेस्टइंडीज़ के मशहूर खिलाड़ी गस लोगी ने 52 टेस्ट मैच खेले हैं. वर्ष 1995 में वे वेस्टइंडीज़ क्रिकेट बोर्ड में शामिल हुए. साथ ही उन्होंने वेस्टइंडीज़ के युवा खिलाड़ियों की सहायता की और ए टीम के कोच भी बने. वर्ष 2003 के विश्व कप में वे कनाडा के कोच थे. एक साल तक उन्होंने वेस्टइंडीज़ क्रिकेट टीम के कोच का भी पद संभाला. लेकिन वर्ष 2004 में टीम के चैम्पियंस ट्रॉफ़ी जीतने के बाद उन्होंने पद छोड़ दिया. वर्ष 2007 के विश्व कप में बरमूदा को पहुँचाने के लिए उन्होंने काफ़ी मेहनत की. लेकिन हाल में टीम का प्रदर्शन मिला-जुला रहा है. ****************************************************** कनाडा
कोच: एंडी पिक वर्ष 1983 और 1997 के बीच अपनी टीम नॉटिंघमशायर की ओर से खेलते हुए पिक ने अपने को एक तेज़ गेंदबाज़ के रूप में स्थापित किया था. उन्होंने वर्ष 2006 में इंग्लैंड की अंडर-19 टीम को विश्व कप के दौरान कोच किया था. लेकिन इस बीच उन्होंने एक साल की छुट्टी लेकर कनाडा की टीम को विश्व कप के लिए तैयार किया. उन्होंने कनाडा में कुछ अच्छे बदलाव किए हैं और उन्हें उम्मीद है कि वे विश्व कप में कुछ उलटफेर कर सकते हैं. ****************************************************** इंग्लैंड
कोच: डंकन फ़्लेचर वर्ष 1999 के विश्व कप के बाद जब डंकन फ़्लेचर ने इंग्लैंड के कोच का पद संभाला था, उस समय इंग्लैंड की टीम रैंकिंग में विश्व में सबसे निचले स्तर की टेस्ट टीम बन गई थी. लेकिन उनके पद संभालने के बाद इंग्लैंड की टीम का कायाकल्प होना शुरू हुआ और धीरे-धीरे टीम सफलता की राह पर आने लगी. वर्ष 2005 में इंग्लैंड के ऐशेज़ जीतने के पीछे उनका बड़ा हाथ माना जाता है. लेकिन 2006-07 में ऑस्ट्रेलिया के हाथों इंग्लैंड को करारी मात मिली. हालाँकि त्रिकोणीय एक दिवसीय सिरीज़ में इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया को हराकर ख़िताब जीता. विश्व कप से ठीक पहले इंग्लैंड की शानदार जीत से टीम का हौसला भी बढ़ा है. वर्ष 1983 के विश्व कप में ज़िम्बाब्वे की कप्तानी करने वाले डंकन फ़्लेचर 2007 के विश्व कप के बाद अपना भविष्य तय करेंगे. ****************************************************** भारत
कोच: ग्रेग चैपल अपनी पीढ़ी के शानदार बल्लेबाज़ रहे ऑस्ट्रेलिया के ग्रेग चैपल ने 87 टेस्ट मैच खेले और 7110 रन बनाए. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद चैपल ने क्रिकेट कोचिंग की और दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया में भी कुछ समय बिताया. उन्होंने पाकिस्तान के नेशनल क्रिकेट एकेडमी में सलाहकार के रूप में भी काम किया. जॉन राइट के बाद ग्रेग चैपल ने भारतीय टीम के कोच का पद संभाला. लेकिन उनका कार्यकाल विवादों में भी रहा है. पूर्व कप्तान सौरभ गांगुली के साथ उनके मतभेद के क़िस्से ख़ूब चर्चा में रहे हैं. उनके कोच रहते भारतीय टीम का प्रदर्शन मिला-जुला रहा है. लेकिन विश्व कप से पहले भारत ने लगातार अच्छा प्रदर्शन करके अपना दावा मज़बूत किया है. ****************************************************** आयरलैंड
कोच: एड्रियन बिरेल एड्रियन बिरेल ने ईस्टर्न प्रोविंस की ओर से 45 प्रथम श्रेणी के मैच खेले हैं. वे लेग ब्रेक गेंदबाज़ी करते थे और निचले क्रम में उन्हें एक उपयोगी बल्लेबाज़ माना जाता था. उन्होंने दक्षिण अफ़्रीका में कई जगह कोच के रूप में काम किया और फिर आयरलैंड की ओर से मिला प्रस्ताव स्वीकार किया. आईसीसी ट्रॉफ़ी में अच्छे प्रदर्शन के कारण आयरलैंड को पहली बार विश्व कप में खेलने का मौक़ा मिल रहा है. वर्ष 2004 में एक मैच में आयरलैंड ने वेस्टइंडीज़ को हराया था, जिसमें बिरेल की प्रमुख भूमिका मानी जाती है. वर्ष 2005 में टीम ने इंटरकॉन्टिनेंटल कप भी जीता. लेकिन हाल के आईसीसी विश्व क्रिकेट लीग में उन्होंने निराश किया. ****************************************************** नीदरलैंड्स
कोच: पीटर कैन्ट्रेल कैन्ट्रेल ने वर्ष 1988-91 के बीच क्वींसलैंड के लिए 34 प्रथम श्रेणी मैच खेले. पहली बार वे वर्ष 1984 में नीदरलैंड्स गए. वर्ष 1992-97 के बीच नीदरलैंड्स के लिए उन्होंने 64 मैच खेले. वे 1996 में नीदरलैंड की विश्व कप टीम में भी शामिल थे. बॉब सिम्पसन के बाद उन्होंने नीदरलैंड्स के कोच की ज़िम्मेदारी संभाली. उनकी प्राथमिकता है- इस विश्व कप में टेस्ट खेलने वाले देश को हराकर उलटफेर करना. ****************************************************** पाकिस्तान
कोच: बॉब वूल्मर हालाँकि बॉब वूल्मर ने केंट की ओर से 300 से ज़्यादा प्रथम श्रेणी मैच खेले और इंग्लैंड की ओर से 19 टेस्ट मैच भी खेले, लेकिन उन्हें कोच के रूप में ज़्यादा जाना जाता है. वॉरविकशॉयर के कोच के रूप में सफलता हासिल करने के बाद वूल्मर चार साल दक्षिण अफ़्रीका के कोच रहे. उनके कोच रहते दक्षिण अफ़्रीका ने दो विश्व कप में हिस्सा लिया और अच्छा प्रदर्शन किया. जावेद मियाँदाद के बाद बॉब वूल्मर ने पाकिस्तान के कोच का पद संभाला. माना जा रहा है कि अगर विश्व कप में इंग्लैंड ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया तो वूल्मर इंग्लैंड के अगले कोच हो सकते हैं. ****************************************************** न्यूज़ीलैंड
कोच: जॉन ब्रेसवेल जॉन ब्रेसवेल ने 1979-80 और 1990 के बीच 41 टेस्ट मैच और 53 एक दिवसीय मैच खेले. वे अच्छे ऑफ़ स्पिनर थे और निचले क्रम में धमाकेदार बल्लेबाज़ी करते थे. उन्होंने प्रथम श्रेणी मैच में 4354 रन बनाए और 522 विकेट लिए. उसके बाद वे ऑकलैंड के कोच बने. वर्ष 1999 में वे ग्लूस्टरशॉयर के कोच बने और उनके अधीन टीम ने कई ख़िताब जीते. उनके अधीन न्यूज़ीलैंड ने कोई ख़ास प्रदर्शन तो नहीं किया है लेकिन विश्व कप से पहले ऑस्ट्रेलिया से तीन मैचों की सिरीज़ जीतने से टीम का मनोबल काफ़ी बढ़ा है. ****************************************************** स्कॉटलैंड
कोच: पीटर ड्रिनेन ड्रिनेन स्कॉटलैंड टीम में तकनीकी निदेशक के रूप में शामिल हुए थे. लेकिन एंडी मोल के एकाएक पद छोड़ देने के कारण उन्हें कोच का पद मिल गया. कम अनुभव के बावजूद ड्रिनेन खिलाड़ियों के साथ अच्छा तालमेल बिठा लेते हैं और उन्हें इसका लाभ भी मिला है. हाल ही में आईसीसी विश्व क्रिकेट लीग में स्कॉटलैंड की टीम कीनिया से फ़ाइनल में हार गई थी. लेकिन फ़ाइनल में पहुँचने के लिए उसने आयरलैंड, कनाडा, हॉलैंड और कीनिया को भी हराया था. ****************************************************** दक्षिण अफ़्रीका
कोच: मिकी ऑर्थर मिकी ऑर्थर फ़्री स्टेट, ग्रीक़ालैंड, वेस्ट और दक्षिण अफ़्रीका ए की ओर से खेल चुके हैं. लेकिन वर्ष 2001 में उन्होंने संन्यास ले लिया. उन्होंने ग्रीक़ालैंड टीम के कोच का भी काम संभाला. वर्ष 2003 में उन्होंने ईस्टर्न केप के कोच का पद संभाला और दो बार अपनी टीम को स्टैंडर्ड बैंक प्रो20 सिरीज़ के फ़ाइनल में भी पहुँचाया. रे जेनिंग्स के बाद दक्षिण अफ़्रीका के कोच के रूप में उनका चयन चौंकाने वाला ज़रूर था लेकिन उन्होंने अपनी उपयोगिता साबित की है और इस समय दक्षिण अफ़्रीका वनडे क्रिकेट रैंकिंग में शीर्ष पर है. पिछले साल चैम्पियंस ट्रॉफ़ी में दक्षिण अफ़्रीका की टीम सेमी फ़ाइनल में पहुँची थी. वेस्टइंडीज़ में होने वाले विश्व कप में दक्षिण अफ़्रीका का दावा भी काफ़ी मज़बूत है. ****************************************************** श्रीलंका
कोच: टॉम मूडी टॉम मूडी ने ऑस्ट्रेलिया की ओर से आठ टेस्ट मैच और 76 एक दिवसीय मैच खेले हैं. उनके टीम में रहते ऑस्ट्रेलिया ने दो बार विश्व कप का ख़िताब जीता है. आक्रमक बल्लेबाज़ माने जाने वाले टॉम मूडी ने वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया और वॉरसेस्टरशॉयर की कप्तानी भी की है. वर्ष 2001 में वे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से रिटायर हो गए थे. वे पाँच साल तक वॉरसेस्टरशॉयर के क्रिकेट निदेशक भी रहे थे. बाद में वे जॉन डाइसन के बाद श्रीलंका के कोच बने. शुरुआती मुश्किलों के बाद उनके अधीन श्रीलंका की टीम अच्छा खेल रही है. ****************************************************** वेस्टइंडीज़
कोच: बेनेट किंग जब जॉन बुकानन ने क्वींसलैंड का कोच पद छोड़कर ऑस्ट्रेलिया का कोच पद संभाला तो उनकी जगह क्वींसलैंड के कोच बने बेनेट किंग. पहले तीन सीज़न में उन्होंने क्वींसलैंड को अच्छी सफलता दिलाई. वर्ष 2002 में किंग ने ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट एकेडमी में प्रमुख कोच की ज़िम्मेदारी संभाली. लेकिन 2004 में उन्हें वेस्टइंडीज़ क्रिकेट बोर्ड का निमंत्रण मिला और उन्होंने उसे स्वीकार कर लिया. बेनेट किंग के अधीन वेस्टइंडीज़ ने एक दिवसीय मैचों में अच्छा प्रदर्शन किया और पिछले साल चैम्पियंस ट्रॉफ़ी के फ़ाइनल में भी जगह बनाई. अभी तक विश्व कप में किसी मेजबान देश ने ख़िताब नहीं जीता है. लेकिन किंग के अधीन वेस्टइंडीज़ की टीम इस मिथक को तोड़ने की तैयारी में है. ****************************************************** ज़िम्बाब्वे
कोच: केविन करैन 1980 और 1990 के दशक में करैन ने ग्लूस्टशॉयर और नॉर्थैम्पटनशॉयर की ओर से एक प्रभावी ऑल-राउंडर की भूमिका निभाई. ज़िम्बाब्वे की ओर से उन्होंने 1983 और 1987 के विश्व कप में हिस्सा लिया. वर्ष 1999 में रिटायर होने के बाद करैन नामीबिया के कोच बने. वर्ष 2004 में वे हरारे स्थित सीएफ़एक्स क्रिकेट एकेडमी में कोचिंग निदेशक बने. एक साल बाद 2005 में वे फिल सिमंस की जगह ज़िम्बाब्वे के कोच बने. लेकिन उनके अधीन ज़िम्बाब्वे क्रिकेट में कोई ख़ास बदलाव नहीं आया है. | इससे जुड़ी ख़बरें भारतीय टीम के लिए एनएसजी की सुरक्षा 02 मार्च, 2007 | खेल विश्व कप से बाहर हुए शोएब और आसिफ़01 मार्च, 2007 | खेल वेस्टइंडीज़ रवाना हुई टीम इंडिया28 फ़रवरी, 2007 | खेल 'आक्रामक क्रिकेट खेलने की कोशिश रहेगी'27 फ़रवरी, 2007 | खेल विश्वकप में पठान का खेलना तय25 फ़रवरी, 2007 | खेल वर्ल्ड कप के बाद रिटायर होंगे कुंबले?25 फ़रवरी, 2007 | खेल ब्रेट ली चोट के कारण विश्व कप से बाहर23 फ़रवरी, 2007 | खेल सोबर्स की नज़र में भारतीय टीम संतुलित22 फ़रवरी, 2007 | खेल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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