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सोमवार, 12 फ़रवरी, 2007 को 14:44 GMT तक के समाचार
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भारतीय टीम के दावे में भी है दम

भारतीय टीम
भारतीय टीम से विश्व कप में काफ़ी उम्मीदें हैं
अंततः वो घड़ी आ ही गई जिसका हम सभी क्रिकेट प्रेमियों को बेसब्री से इंतज़ार था. चयनकर्ताओं ने उस 15 सदस्यीय टीम का फ़ैसला कर दिया है जो विश्व कप को भारत लाकर एक अरब लोगों के विश्वास को और पुख़्ता करेगी.

विश्व कप को लेकर तो कुछ विश्लेषकों ने पहले से ही आस्ट्रेलिया को विजेता घोषित कर रखा है लेकिन भारतीय टीम युवा है और इससे काफ़ी उम्मीदें हैं.

मैं कोई स्तंभकार नहीं हूँ, फिर भी मैं भारतीयों की भावनाओं का प्रतिनिधि हूँ. मैं आलोचक नहीं हूँ, फिर भी बसों से आते-जाते समय लोगों की टिप्पणियाँ सुनता आया हूँ.

मैं कोई पत्रकार नहीं हूँ, फिर भी हरेक मैच को टीवी पर तब तक देखा है जब तक आँखें जबाब नहीं दे देतीं. मैं कोई रिपोर्टर नहीं हूँ, फिर भी हर मैच के हर ओवर का अपडेट एसएसएस के ज़रिए अपने साथियों को भेजता आया हूँ.

भारतीय टीम के बारे में मेरा आकलन कुछ यूँ है.....

राहुल द्रविड़- हालाँकि द्रविड़ की कप्तानी में हम ज़्यादा मैच नहीं जीत पाए हैं, फिर भी भारतीय टीम को इनके अतिरिक्त कोई और वास्तविक मिस्टर भरोसेमंद नहीं मिल पाया है. अब द्रविड़ ने उस समय को भी पीछे छोड़ दिया है जब वे चौके-छक्के मारने से कतराते थे. विश्व की अन्य किसी भी टीम के कप्तान से वे किसी मायने भी कम नहीं हैं.

सचिन का टीम में रहना खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाता है

सचिन तेंदुलकर- कभी-कभी हम दर्शकों को यह अपने अस्वाभाविक खेल से डराते ज़रूर हैं, मगर यह कहने में मैं कतराऊँगा नहीं कि ये हमारे टीम के मेरुदंड हैं. वे हैं, तो टीम उनके शून्य पर आऊट होने पर भी तीन सौ के आँकड़े को पार करने का माद्दा रखती है.

वीरेंदर सहवाग- इनके बारे में कहा जाता है कि यद्यपि यह कम ही खेलते हैं मगर जब खेलने लगेंगे तो दुनिया का कौन सा ऐसा गेंदबाज़ है जो चौकों और छक्कों को बचा सके? कोई अन्य विश्वसनीय विकल्प की अनुपस्थिति भी इनके चयन का कारण बनी है.

सौरभ गांगुली- कहा जाता है शेर जेसा साहस किसी अन्य जीव में नहीं होता. गांगुली भारतीय टीम के शेर ही तो हैं. इतने आरोपों और राजनैतिक चक्रव्यूहों से निकलकर अपने आप को फिर से स्थापित करने का साहस एक शेर के अलावा किसके अंदर हो सकता है. जब से वे आए हैं तब से अच्छा स्कोर कर रहे हैं.

युवराज सिंह- भारतीय टीम में एक अच्छे क्षेत्ररक्षक का हमेशा से अभाव रहा है. ये भारतीय टीम के दुर्गद्वार हैं, भरोसेमंद बल्लेबाज़ भी हैं. विषम-परिस्थितियों में इनकी कमी हमेशा महसूस होती रही है क्योंकि तनाव में तेज़ स्कोर करना किसे कहते हैं, भारतीय टीम को इन्होंने ही सिखलाया है.

महेंद्र सिंह धोनी- श्रीलंका के ख़िलाफ़ मैच में इन्होंने यह भी सिद्ध किया है कि वे अनुशासन के साथ भी खेल सकते हैं और अगर सामने वाला थोड़ा-बहुत भी साथ दे तो मैच को अपनी झोली में डाला जा सकता है. यह भारत के पहले ऐसे विकेटकीपर हैं जो एक धमाकेदार बल्लेबाज़ भी हैं.

अनिल कुंबले- टीम के सबसे अनुभवी गेंदबाज़. जब इनके स्पिन का जादू चलता है तो विरोधी टीम के लिए एक-एक रन बनाना मुश्किल हो जाता है. अनुभव को भुनाना इन्हें ख़ूब आता है.

हरभजन सिंह- अपनी फ़िटनेस और अनुभव के आधार पर इन्होंने चयनकर्ताओं को अपने चुनाव के लिए मजबूर किया. मेरे साथी कहते हैं- भज्जी का सर्वश्रेष्ठ आना अभी शेष है जो इस विश्व कप में दिखाई देगा.

रॉबिन उथप्पा- पिछले मैचों में इन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि ये भी सहवाग के बराबर आक्रामक हैं. इतनी अच्छी शुरुआत दे सकते हैं कि अगर आगे के खिलाड़ी प्रत्येक गेंद पर मात्र छोर भी बदलें तो भारतीय टीम सम्मानजनक स्कोर कर सकती है.

दिनेश कार्तिक- ये तेज़ गेंदबाज़ों और स्पिनर दोनों को बहुत संयम के साथ खेलते हैं. ज़रूरत आने पर कीपिंग भी कर सकते हैं.

ज़हीर ख़ान- इनको विश्व कप का अच्छा अनुभव है, जिसमें ये 18 विकेट ले चुके हैं. दक्षिण अफ़्रीका के दौरे से इन्होंने ज़बरदस्त वापसी की है.

अनिल कुंबले का अनुभव भी टीम के काम आएगा

अजित अगरकर- ये यॉर्कर भी फेंक सकते हैं. नई गेंद के साथ अच्छी गेंदबाज़ी करते हैं. विश्व कप का अनुभव भी रखते हैं.

मुनाफ़ पटेल- लेफ़्ट और राइट हैंड दोनों बल्लेबाज़ों को अपनी गेंद खेलने पर मजबूर कर देते हैं. अगर मुनाफ़ फ़िट हैं, तो हिट हैं. इस तरह के और युवा खिलाड़ियों की आवश्यकता है.

श्रीसंत- अत्यंत आक्रामक गेंदबाज़, जो हर गेंद को बिना किसी तनाव और दबाव से फेंकता है. अनुभवी खिलाडियों से सीखकर किसी भी टीम के सभी स्टंप उखाड़ सकते हैं.

इरफ़ान पठान- भारतीय टीम के एकमात्र ऑलराउंडर. अभी फ़ॉर्म में नहीं हैं मगर फ़ॉर्म में आने के लिए उनके पास लगभग एक महीने का वक़्त है. आख़िर कोच कब काम आएँगे?

निःसंदेह चयनकर्ताओं ने एक मज़बूत और स्थिर टीम दी है. अगर टीम हर मैच को पुरानी हार-जीत भुलाकर खेले तो विश्व कप दिल्ली के इंदिरा गांधी अर्तराष्ट्रीय हवाई अड्डे से होकर गुज़रेगा.

(बीबीसी हिंदी डॉट कॉम ने विश्व कप के लिए टीम की घोषणा से पहले एक प्रतियोगिता का आयोजन किया था. जिसमें शैलेश भारतवासी टीम के सभी 15 खिलाड़ियों के सही नाम बताकर विजेता बने हैं. वैसे इस प्रतियोगिता में कई अन्य पाठकों के जवाब सही थे.)

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