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दोहा में उम्मीद से कम प्रदर्शन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दोहा में 15वें एशियाई खेल संपन्न हो गए हैं. भारतीय खिलाड़ियों ने उम्मीद से कम प्रदर्शन तो किया लेकिन पिछले एशियाई खेलों के मुक़ाबले पदकों की संख्या बढ़ी. एक ओर जहाँ क़रीब-क़रीब भुला दिए गए निशानेबाज़ जसपाल राणा ने शानदार उपलब्धि हासिल की तो हॉकी में भारत ने ख़राब प्रदर्शन के मामले में इतिहास रचा. पहले वाकयुद्ध और फिर टीम बनाकर लिएंडर पेस और महेश भूपति की जोड़ी डबल्स में स्वर्ण पदक जीतने में सफल रही. लेकिन पदक जीतने के कई दावेदार खिलाड़ियों ने ख़राब प्रदर्शन से निराश भी किया. भारत को पदक तालिका में आठवाँ स्थान मिला. भारत को 10 स्वर्ण, 18 रजत और 26 कांस्य के साथ कुल 54 पदक मिले. चार साल पहले दक्षिण कोरिया के बुसान शहर में हुए एशियाई खेलों में भारत ने कुल 36 पदक जीते थे. खिलाड़ी लेकिन उस वर्ष भारत ने काफ़ी कम खिलाड़ी भेजे थे. इस बार दोहा में भारत ने फ़ेन्सिंग जैसे खेल में भी भाग्य आज़माया. कई एथलीट तो चर्चा में भी नहीं आए.
भारत ने दोहा में सबसे ज़्यादा कांस्य पदक जीते. भारत को रोविंग, घुड़सवारी और नौकायन जैसे मुक़ाबलों में कांस्य मिले. इसका मतलब ये भी हुआ कि जिन खेलों में भारतीय खिलाड़ियों से पदक जीतने की उम्मीद की जा रही थी, उसमें अच्छा प्रदर्शन नहीं हुआ. इनमें निशानेबाज़ी, एथलेटिक्स और कुछ हद तक टेनिस में भी उम्मीद से कम प्रदर्शन हुआ और इस कारण पदक भी कम मिले. टेनिस की टीम स्पर्धा में महेश भूपति और लिएंडर पेस के वाकयुद्ध का ख़ामियाज़ा भारत को भुगतना पड़ा. हालाँकि व्यक्तिगत डबल्स मुक़ाबले में दोनों साथ खेले और स्वर्ण पदक भी जीता. मिक्स्ड डबल्स में लिएंडर और सानिया ने स्वर्ण जीता, तो महिलाओं के सिंगल्स मैच में सानिया रजत पदक जीतने में सफल रहीं. सबसे ज़्यादा निराश एथलीटों ने किया. चार साल पहले एथलीटों ने भारत को सात स्वर्ण, छह रजत और चार कांस्य दिलवाए थे लेकिन दोहा में भारत को एथलेटिक्स में सिर्फ़ एक स्वर्ण, चार रजत और चार कांस्य पदक मिले. भारत को 4x400 मीटर रिले में एस गीता, मनजीत कौर, चित्रा सोमन और पिंकी प्रमानिक ने एक स्वर्ण दिलवाया. अंजू बॉबी जॉर्ज लंबी कूद में रजत पदक ही जीत पाईं. बुसान में अंजू ने स्वर्ण पदक जीता था. जसपाल की जय लेकिन भारत के लिए सबसे शानदार प्रदर्शन किया निशानेबाज़ जसपाल राणा ने. 30 वर्ष के हो चुके जसपाल राणा ने भारत को तीन स्वर्ण पदक दिलवाए और इतिहास रचा. उनके शानदार प्रदर्शन के कारण भारत ने तीन स्वर्ण, चार रजत और छह कांस्य पदक जीते. चार साल पहले बुसान में भारत ने सिर्फ़ दो रजत पदक जीते थे. जसपाल ने पहले 25 मीटर स्टैंडर्ड पिस्टल मुक़ाबले में स्वर्ण जीता फिर 25 मीटर सेंटर फ़ायर में व्यक्तिगत उपलब्धि हासिल की. उन्होंने 590 अंक हासिल कर विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की.
उनके शानदार प्रदर्शन के कारण टीम मुक़ाबले में भी भारत ने स्वर्ण पदक जीता. भारत को निशानेबाज़ी में कुछ और पदक मिल सकते थे. लेकिन अनुभवी समरेश जंग ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया. तेज़ हवा के कारण मानवजीत सिंह संधू का प्रदर्शन प्रभावित हुआ. फिर भी निशानेबाज़ी में भारत ने बुसान के मुक़ाबले अच्छा प्रदर्शन किया. इसके अलावा पंकज आडवाणी ने बिलियर्ड्स में और कोनेरू हम्पी ने शतरंज में भारत को स्वर्ण दिलवाया. परंपरागत खेल कबड्डी में भारत ने पाकिस्तान को हराकर स्वर्ण पदक जीता. हॉकी में पहली बार भारतीय टीम सेमी फ़ाइनल में भी जगह नहीं बना पाई. भारतीय टीम पाँचवें स्थान पर रही. हालाँकि भारतीय महिला हॉकी टीम ने कांस्य पदक जीता. | इससे जुड़ी ख़बरें भारतीय महिला हॉकी टीम को कांस्य पदक13 दिसंबर, 2006 | खेल पेस-भूपति ने स्वर्ण दिलाया, सानिया चूकी13 दिसंबर, 2006 | खेल जसपाल राणा एशियाड के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी 13 दिसंबर, 2006 | खेल पदक जीतने का बहुत दबाव था: अंजू11 दिसंबर, 2006 | खेल भारतीय हॉकी की दुर्दशा पर खरी-खोटी11 दिसंबर, 2006 | खेल भारतीय हॉकी टीम एशियाई खेल से बाहर10 दिसंबर, 2006 | खेल राणा ने दूसरा स्वर्ण भी जीता08 दिसंबर, 2006 | खेल भारत ने कबड़्डी का स्वर्ण पदक जीता07 दिसंबर, 2006 | खेल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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