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भारतीय हॉकी की दुर्दशा पर खरी-खोटी
हॉकी
व्रीसमैन का कहना है कि आईएचएफ़ पेशेवर संस्था नहीं है
अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ (एफ़आईएच) की अध्यक्ष एल्स वॉन ब्रेदा व्रीसमैन ने कहा है कि भारतीय हॉकी अभी दुर्दशा में है और इसके लिए खिलाड़ी ख़ुद ज़िम्मेदार है.

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय टीम के घटिया प्रदर्शन का ज़िक्र करते हुए कहा कि भारत के खिलाड़ियों को कभी पूर्व विश्व चैम्पियन रहने के ख़्वाब से उबर कर भविष्य की ओर देखना चाहिए.

उनका बयान दोहा एशियाई खेलों से भारतीय टीम की शर्मनाक विदाई के एक दिन बाद आया है.

आठ बार की ओलंपिक चैम्पियन भारतीय टीम पहली बार एशियाई खेलों की हॉकी स्पर्धा में सेमी फ़ाइनल तक का रास्ता भी तय नहीं कर सकी.

अनिश्चित भविष्य

व्रीसमैन का कहना था, "भारत अब मुश्किल और अनिश्चित दौर से जूझ रहा है क्योंकि इसे अगले ओलंपिक में सीधा प्रवेश नहीं मिल सका है. उसके लिए क्वालीफ़ाइंग टूर्नामेंट भी आसान नहीं होगा."

एफ़आईएच के नए नियमों के मुताबिक़ एशियाई खेलों में फ़ाइनल तक पहुँचने वाली टीमों को ओलंपिक में सीधे प्रवेश मिल जाता है.

 भारत अब मुश्किल और अनिश्चित दौर से जूझ रहा है क्योंकि इसे अगले ओलंपिक में सीधा प्रवेश नहीं मिल सका है. उसके लिए क्वालीफ़ाइंग टूर्नामेंट भी आसान नहीं होगा
व्रीसमैन

भारत के पास अब एक ही विकल्प है कि वो अगले साल के शुरू में होने वाली तीन क्वालीफ़ाइंग प्रतियोगिताओं में से किसी एक में जीत दर्ज करे.

इस साल सितंबर में जर्मनी में हुए हॉकी विश्व कप में भाग लेने वाली 12 टीमों में भारत 11 वें पायदान पर ख़िसक गया था.

व्रीसमैन ने भारतीय हॉकी संघ (आईएचएफ़) को भी खरी-रोटी सुनाई और कहा कि आईएचएफ़ खेल का स्तर सुधारने के लिए एफ़आईएच के सुझावों को अमल में नहीं ला रहा है.

उन्होंने कहा, "आईएचएफ एक पेशेवर इकाई नहीं है. उन्हें ज़मीनी स्तर पर और प्रयास करने ज़रूरत है."

प्रयास

व्रीसमैन ने बताया, "हमनें भारतीय हॉकी के लिए ब्लूप्रिंट बनाया था और इसकी प्रतियाँ आईएचएफ़, भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन और अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के पास है. हमने तो अभी तक भारतीयों के साथ कम से कम 400 बैठकें की है."

 आईएचएफ एक पेशेवर इकाई नहीं है. उन्हें ज़मीनी स्तर पर और प्रयास करने ज़रूरत है
व्रीसमैन

उन्होंने कहा कि खेल के अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारत की मुख्य भूमिका है और वहाँ प्रतिभा की भी कमी नहीं है लेकिन उसे उभारने की ज़रूरत है.

हॉकी के नियमों में बदलाव को लेकर लग रहे आरोपों पर एफआईएच अध्यक्ष ने कहा, "जहाँ तक मैं जानती हूँ ऑफ़ साइड का नियम हटाने का मक़सद खेल की गति में तेज़ी लाना था. भारत और पाकिस्तान के खिलाड़ी तो दुनिया में सबसे तेज़ माने जाते हैं. इसलिए कोई हम पर क्यों आरोप लगाता है कि हम यूरोपीय देशों को फ़ायदे के लिए नियम बनाते हैं."

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