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'आपात बैठक बुलाए हॉकी महासंघ' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान ज़फ़र इक़बाल ने मांग की है कि हॉकी की चिंताजनक स्थिति को सुधारने के लिए हॉकी महासंघ आपात बैठक बुलाए. उन्होंने कहा कि सरकार और हॉकी महासंघ को चाहिए कि वो हॉकी की भारत में बिगड़ती स्थिति को गंभीरता से लें और इसके लिए हॉकी से जुड़े रहे लोगों के साथ तत्काल विचार-विमर्श किया जाना चाहिए. भारतीय हॉकी के एक और पूर्व कप्तान और हॉकी का जादूगर कहे जाने वाले भारतीय खिलाड़ी ध्यानचंद के बेटे अशोक कुमार ने कहा कि इस बात की पड़ताल की जानी चाहिए कि क्या वजहें है कि भारतीयों की हॉकी जैसे खेल में रुचि कम होती जा रही है. भारतीय हॉकी टीम के दोनों कप्तान रविवार को बीबीसी हिंदी सेवा के विशेष कार्यक्रम आपकी बात, बीबीसी के साथ में श्रोताओं के प्रश्नों का जवाब दे रहे थे. दोनों ने ही भारतीय हॉकी की आज की स्थिति पर चिंता जताई पर साथ ही यह भी कहा कि हॉकी अभी भी भारत का राष्ट्रीय खेल है और उसे इस स्थान पर बने रहना चाहिए. ज़फ़र इक़बाल ने कहा कि हालांकि आज भारतीय हॉकी चिंताजनक स्थिति में है पर अगर हॉकी का इतिहास देखें तो 1928 से 1975 तक भारत की जो उपलब्धियाँ हॉकी में हैं, वैसी किसी और खेल में नहीं. दुर्दशा अशोक कुमार हॉकी में नौकरशाही को भी इसकी दुर्दशा का दोष देने से नहीं चूके. उन्होंने कहा, "हॉकी फ़ेडरेशन में चुनाव की प्रथा रोकनी चाहिए. अगर ध्यानचंद ज़िंदा होते तो वो भी यह चुनाव नहीं जीत पाते क्योंकि जीत वही सकते हैं जो ताक़तवर और प्रभावशाली है. ऐसे लोगों को जगह देनी चाहिए जिन्होंने हॉकी खेली हो और जो इसे समझते हों." उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जो लोग हॉकी खेलकर बाहर गए उनकी कभी भी सेवाएँ नहीं ली गईं. चयन समिति से लेकर बाकी ज़रूरतों तक ऐसे लोगों को साथ लेना ज़रूरत है. अशोक कुमार पिछले कुछ वर्षों में टीम में बेवजह किए गए फेरबदल जैसी घटनाओं को तो इसके गिरते स्तर का ज़िम्मेदार मानते ही हैं साथ ही आधारभूत ढाँचे की कमी को भी इस खेल के लिए अच्छे खिलाड़ी न मिल पाने की वजह मानते हैं. रुचि की कमी उधर ज़फर इक़बाल मानते हैं कि भारत के पास अब अच्छे खिलाड़ियों की कमी है और अगर किसी खिलाड़ी की जगह किसी और की ज़रूरत हो तो उसके लिए विकल्प भी मौजूद नहीं है. उन्होंने कहा कि संसाधनों से ज़्यादा ज़रूरी है इस खेल का फिर से लोकप्रिय होना. ज़फ़र इक़बाल बताते हैं कि दो दशक पहले तक युवाओं में हॉकी को लेकर एक ललक होती थी और कई शहरों में बड़े पैमाने पर लोग हॉकी का खेल पसंद करते थे पर अब ऐसा नहीं है. उन्होंने कहा, "जर्मनी, हॉलैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भारत से 10 गुना ज़्यादा हॉकी खेला जा रहा है. यहाँ लोगों में इसके प्रति रुचि घटी है और इसकी वजह से अच्छे खिलाड़ी तैयार ही नहीं हो पा रहे हैं." उन्होंने कहा कि पहले लोग हॉकी में रुचि रखते थे और खेलने के लिए खेलते थे पर अब पैसे के लिए खेल खेला जाता है. हॉकी में पैसा नहीं है और इसलिए यह युवाओं को रिझा नहीं रहा है. ग़ौरतलब है कि विश्वकप हॉकी में आठ बार जलवा दिखा चुकी भारतीय टीम पिछले दो दशकों से कोई भी बड़ी सफलता हासिल कर पाने में अक्षम रही है. | इससे जुड़ी ख़बरें रोमांचक फ़ाइनल मैच में जर्मनी की जीत17 सितंबर, 2006 | खेल हॉकी में 11वें स्थान पर पहुँचा भारत17 सितंबर, 2006 | खेल नीदरलैंड ने भारत को 6-1 से हराया12 सितंबर, 2006 | खेल विश्व कप हॉकी: भारत इंग्लैंड से भी हारा07 सितंबर, 2006 | खेल ध्यानचंद का खेल आज भी याद आता है29 अगस्त, 2006 | खेल हॉकी स्टार संदीप की हालत चिंताजनक22 अगस्त, 2006 | खेल आइस हॉकी का 'तेंदुलकर'09 अगस्त, 2006 | खेल भारत 'अज़लान शाह' से बाहर23 जून, 2006 | खेल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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