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साथ-साथ हैं विवाद और डेरेल हेयर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अब लगता है ऑस्ट्रेलिया के अंपायर डेरेल हेयर और विवाद साथ-साथ चलते हैं. ओवल में पाकिस्तान और इंग्लैंड के बीच हुए चौथे टेस्ट के दौरान विवाद में एक बार फिर सवाल उठे हैं डेरेल हेयर पर. ऐसा शायद पहली बार हुआ है कि कई वरिष्ठ क्रिकेटरों और पूर्व अंपायरों ने भी डेरेल हेयर के क़दम को जल्दबाज़ी में लिया हुआ फ़ैसला बताया है. चायकाल के बाद मैदान में न आने के पाकिस्तानी टीम के फ़ैसले की भी आलोचना की जा रही है लेकिन सबसे ज़्यादा सवाल उठ रहे हैं डेरेल हेयर पर. दरअसल ऐसा पहली बार नहीं कि डेरेल हेयर विवादों में पड़े हों. हेयर सबसे ज़्यादा चर्चा में उस समय आए जब उन्होंने श्रीलंका के स्टार स्पिनर मुथैया मुरलीधरन के ऐक्शन को ग़लत ठहराया और उस समय तक नो बॉल देते रहे जब तक कि तत्कालीन कप्तान अर्जुन रणतुंगा ने मुरलीधरन को गेंदबाज़ी के मोर्चे से न हटा लिया. विवाद 1995-96 की इस सिरीज़ में श्रीलंका का मुक़ाबला था मेजबान ऑस्ट्रेलिया था और मैदान था मेलबोर्न क्रिकेट ग्राउंड. इस बात को लेकर काफ़ी विवाद बढ़ा और श्रीलंका की टीम ने अपनी आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई.
अपनी आत्मकथा में तो डेरेल हेयर ने मुरलीधरन के ऐक्शन को 'शैतानी' तक कह दिया. ज़ाहिर है श्रीलंका के खिलाड़ी अभी तक डेरेल हेयर को नहीं भूल पाए हैं. 1952 में ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स में जन्मे डेरेल हेयर की विशाल काया को देखकर शायद ही किसी को अंदाज़ा हो कि वे एक समय तेज़ गेंदबाज़ी करते थे. सिडनी ग्रेड जैसी कड़ी प्रतियोगिता में हेयर नॉर्थ सिडनी की ओर से खेलते थे. लेकिन फिर क़िस्मत ने पलटा खाया और मैदान पर खरगोश की तरह दौड़ने वाला सख़्श मैदान पर खड़े रहना ज़्यादा पसंद करने लगा यानी उन्हें अंपायरिंग अच्छी लगने लगी. 1988 में डेरेल हेयर प्रथम श्रेणी क्रिकेट मैचों में अंपायरिंग कराने लगे. अंतरराष्ट्रीय मैचों में उन्होंने 1991 में अंपायर के तौर पर अपनी शुरुआत की. उनका पहला मैच भारत और वेस्टइंडीज़ के बीच एडीलेड में था. टेस्ट मैचों में उनका खाता खुला 1992 में जब उन्होंने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए टेस्ट मैच में अंपायरिंग की. 1995 में मुरलीधरन प्रकरण के अलावा 1996 में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ टेस्ट सिरीज़ में भी भारतीय खिलाड़ियों ने हेयर के कुछ फ़ैसलों पर निराशा जताई. कई मामले कहा तो ये भी जाता है कि 1999 में भारतीय क्रिकेट टीम के तत्कालीन कोच कपिल देव और कप्तान सौरभ गांगुली से भी उनकी बकझक हो गई थी.
उस समय तक डेरेल हेयर चर्चित हो गए थे लेकिन विवादों के कारण. वर्ष 2002 में जब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने शीर्ष अंपायरों का एक पैनल बनाया तो डेरेल हेयर का नाम उसमें नहीं था. लेकिन जब 2003 में अंपायरों के पैनल का विस्तार हुआ तो डेरेल हेयर को इसमें जगह मिल गई. भारतीय उपमहाद्वीप में डेरेल हेयर की छवि अच्छी नहीं. पिछले साल तो पाकिस्तान ने स्पष्ट कर दिया था कि भारत के ख़िलाफ़ घरेलू सिरीज़ के लिए उन्हें डेरेल हेयर नहीं चाहिए. लेकिन पिछले नवंबर में इंग्लैंड की टीम जब पाकिस्तान पहुँची तो डेरेल हेयर भी अंपायर थे और कई ऐसी घटनाएँ हुईं, जब पाकिस्तानी खिलाड़ी हेयर से उलझे. और अब एक बार फिर विवाद में आए हैं डेरेल हेयर. गेंद से छेड़छाड़ के मामले पर लिए गए उनके फ़ैसले पर सवाल उठ रहे हैं और साथ में उन पर भी लग रहा है सवालिया निशान. |
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