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'यह भारतीय टीमवर्क की जीत है' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आज भारत ने बहुत अच्छी जीत हासिल की है, बहुत आराम से जीती है भारतीय टीम, हर क्षेत्र में भारतीय टीम ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है. पाँच विकेट हाथ में थे और 17 ओवर की गेंदबाज़ी बाक़ी थी लेकिन भारत ने आसानी से मैच जीत लिया. मैं समझता हूँ कि भारतीय खिलाड़ी पूरी तरह से हावी हो गए हैं पाकिस्तानी टीम पर. भारतीय टीम ने टेस्ट शृंखला और पहला वनडे मैच हारने के बाद बढ़िया टीमवर्क का प्रदर्शन किया है और यही उसकी सफलता का राज़ है. शुरूआती हारों के बाद लोग इस टीम से उम्मीद ही हार बैठे थे, इस भारतीय टीम में वनडे मैच जीतने लायक़ जान है या नहीं, ऐसी बातें होने लगी थीं. लेकिन टीम ने जिस तरह से पूरी बाज़ी पलट दी है उसका श्रेय किसी एक खिलाड़ी को नहीं बल्कि पूरी टीम को ही जाता है. वैसे विशेष रूप से युवा खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है, इरफ़ान पठान, आरपी सिंह, महेंद्र सिंह धोनी और युवराज सिंह, ये सभी खिलाड़ी जमकर खेले हैं. राहुल द्रविड़ और सचिन ने इस टीम की बागडोर बहुत अच्छी तरह संभाल रखी है, यह साफ़ दिखाई दे रहा है. गेंदबाज़ी आरपी सिंह को मुल्तान में मैन ऑफ़ द मैच चुना गया, उनकी गेंदबाज़ी बहुत अच्छी रही, उसकी जितनी प्रशंसा की जाए कम है. उन्होंने दस ओवर में 40 रन देकर चार विकेट लिए, उनकी ख़ासियत ये है कि वे युवा, उत्साही और आक्रामक खिलाड़ी हैं, वे स्विंग कराने में भी काफ़ी सफल रहे हैं. यकीनन भारतीय टीम के कप्तान राहुल द्रविड़ और कोच ग्रेग चैपल को भी इसका श्रेय जाता है. एकदिवसीय क्रिकेट में जो युवा पीढ़ी जो उभरकर आई है जैसे महेंद्र सिंह धोनी ने एक बहुत ही बढ़िया चरित्र दर्शाया जब उन्होंने काउंटर अटैक किए. भारतीय टीम में एक नई बात आ गई है कि टीम में जब भी आप थोड़ा-सा अपने आपको अलग और तकलीफ में पाते हैं तो आक्रमण करते हैं और दबाव में नहीं आते. |
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