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बुधवार, 25 जनवरी, 2006 को 16:40 GMT तक के समाचार
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फ़ैसलाबाद में भी नहीं हो पाया फ़ैसला

गेंदबाज़ों को विकेट के लिए तरसना पड़ रहा है
इकबाल स्टेडियम की बेजान पिच पर निराश दर्शकों ने एक और टेस्ट मैच ऐसा देखा जिसमें मैच के दूसरे दिन से ही मैच ड्राँ हो जाने की संभावना साफ दिखाई पड़ने लगी और लाहौर की कहानी फ़ैसलाबाद में भी दोहराई गई.

रनों का अंबार खड़ा हुआ, बल्लेबाज़ी के नए कीर्तिमान बने और गेंदबाज़ों के धैर्य और थकान की सीमा की परीक्षा बार-बार होती रही.

रिकॉर्ड की बात करें तो टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में इतने रन पहले कभी नहीं बने 1702 रन. एक टेस्ट में इतने छक्के पहले कभी नहीं जड़े गए - कुल मिलाकर 27 छक्के. इस सिरीज़ में अभी तक केवल दो टेस्ट मैच हुए हैं. लेकिन 12 शतक लग चुके हैं.

लेकिन पाकिस्तान के उप कप्तान युनूस ख़ान संतुष्ट नहीं होंगे क्योंकि लगातार दूसरी बार वो दोहरा शतक लगाने से वंचित रह गए. और वो भी तब जब वो 190 का आँकड़ा पार कर चुके थे.

लेकिन किस काम आएँगे ये शतक और ये कीर्तिमान जब ना तो दर्शक रहेंगे मैदान पर, ना ही जीत की ख़ुशी या हार का ग़म मना पाएगी दुनिया की दो बेहतरीन टीमें ? यही सवाल आज क्रिकेट के दिग्गजों और समीक्षकों के मुँह पर है.

पिच पर सवाल

भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य चयनकर्ता रह चुके पूर्व टेस्ट विकेटकीपर सैयद किरमानी ने बीबीसी के साथ एक बातचीत में कहा ‘ऐसी पिचें नहीं होनी चाहिए थीं जिन्हें देखकर दूसरे दिन से ही ये पता लग गया कि दोनों मैच ड्रॉ की कगार पर हैं. इस पिच से ना तो तेज़ गेंदबाज़ों को मदद मिली ना ही स्पिनरों को जबकि सिरीज़ शुरू होने से पहले ये कहा जा रहा था कि हरी घास वाली और तेज़ गेंदबाज़ों को मदद करने वाली पिचें बनाई जाएँगी.’

पिच पर उठ रहे हैं गंभीर सवाल

उधर भारत के पूर्व कप्तान अजीत वाडेकर का कहना है कि आईसीसी को पिचों पर ध्यान देने की ज़रूरत है. पिच से निराश भारतीय कप्तान राहुल द्रविड़ को पाकिस्तान के कप्तान इंज़माम-उल-हक़ ने ये कहकर कुछ आस बँधाने की कोशिश की कि कराची में बेहतर पिच देखने को मिल सकती है.

बहरहाल भारतीय टीम के कप्तान और गेंदबाज़ों को मैन ऑफ द मैच का नाम सुनकर कुछ सांत्वना ज़रूर मिली होगी. इस बेजान पिच पर अपने पहले ही मैच में पाँच विकेट अपनी झोली में डालने वाले रूद्र प्रताप सिंह को मैन ऑफ द मैच पुरस्कार से नवाज़ा गया.

लाहौर के बाद फ़ैसलाबाद में भी सलामी बल्लेबाज़ की भूमिका में उतरे राहुल द्रविड़ ने दोनों मैचों में शतकीय पारियाँ खेलीं तो धोनी और पठान ने भी बल्लेबाज़ी में अपने-अपने हाथ कुछ और साफ किए.

गति की कमी से जूझते मध्यम तेज़ गेंदबाज़ों के लिए नए सबक मिले तो फ्लैट विकेटों पर रन रोकने की कला सीखने का मौक़ा हरभजन सिंह और अनिल कुंबले को भी मिला.

पाँच गेंदबाज़ों के साथ टीम मैदान पर उतारकर ग्रैग चैपल ने एक और साहसी प्रयोग किया तो सौरभ गाँगुली ये सोचने पर मजबूर हो गए होंगे कि कराची का मैच भी कहीं उन्हें पवेलियन के झरोखों से ही देखने पर मजबूर तो नहीं होना पड़ेगा.

 ऐसी पिचें नहीं होनी चाहिए थीं जिन्हें देखकर दूसरे दिन से ही ये पता लग गया कि दोनों मैच ड्रॉ की कगार पर हैं. इस पिच से ना तो तेज़ गेंदबाज़ों को मदद मिली ना ही स्पिनरों को जबकि सिरीज़ शुरू होने से पहले ये कहा जा रहा था कि हरी घास वाली और तेज़ गेंदबाज़ों को मदद करने वाली पिचें बनाई जाएँगी
सैयद किरमानी

उधर पाकिस्तान की टीम ने कराची टेस्ट के लिए अपनी 16 सदस्यीय टीम की घोषणा कर दी.

पितृशोक में डूबे शोएब मलिक की जगह मध्यक्रम के बल्लेबाज़ फैसल इक़बाल को टीम में जगह मिली है.

तेज़ गेंदबाज़ उमर ग़ुल को भी टीम में शामिल किया गया है. पीठ की तकलीफ से परेशान हैं इंज़माम और शोएब अख़्तर के टखने में चोट लगी है. ऐसे में ज़रूरत पड़ने पर फ़ैसल इक़बाल और उमर ग़ुल को मैदान पर उतारा जा सकता है.

भारतीय टीम का चयन कराची की पिच और हवा के रूख़ को देखने के बाद किया जाएगा. वैसे समीक्षकों का कहना है कि कराची में होने वाले तीसरे और अंतिम टेस्ट मैच में अगर पिच बेजान भी हुई तो, समुद्री हवाएँ मैच का रूख़ बदल सकती हैं.

हार-जीत का फ़ैसला नहीं होने के कारण निराश दोनों टीमें काफी उम्मीद के साथ कराची रवाना हो रही हैं.

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