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मीडिया मतभेदों को हवा न दे: श्रीनाथ | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पूर्व भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी श्रीनाथ ने चिंता जताई है कि अगर खिलाड़ियों के बीच मतभेदों को सार्वजनिक स्तर पर हवा दी गई तो इससे खिलाड़ियों को नुक़सान पहुँच सकता है. श्रीनाथ ने कहा कि खिलाड़ियों के प्रशंसकों के बीच एक ख़तरनाक़ चलन शुरू हो गया और वे खिलाड़ियों के पुतले तक जलाते हैं. पिछले साल सौरभ गांगुली को भारतीय क्रिकेट टीम में शामिल न किए जाने के बाद उनके प्रशंसकों ने प्रदर्शन किए थे. श्रीनाथ ने कहा," यदि ऐसा ही चलता रहा तो मुझे हैरत नहीं होगी अगर कोई प्रशंसक किसी खिलाड़ी के खिलाफ़ ख़तरनाक़ क़दम उठा ले." उन्होंने ये बात समाचार एजेंसी पीटीआई के लिए लिखे एक स्तंभ में लिखी. 'सनसनीखेज़ पत्रकारिता' पाकिस्तान में टेस्ट मैच शुरू होने से पहले टेलीविज़न पर भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान राहुल द्रविड़ और पूर्व कप्तान सौरभ गांगुली के बीच तीख़ी बहस दिखाई गई थी. श्रीनाथ ने मीडिया पर आरोप लगाया कि वो खिलाड़ियों में आम तौर पर होने वाले मतभेदों को हवा दे रहा है. पूर्व भारतीय गेंदबाज़ का कहना था, " क्रिकेट में बहस तो होती ही रहती है लेकिन इस बार इसका वीडियो बनाया गया और फिर वो वीडियो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर दिखाया गया." श्रीनाथ ने कहा कि 2003 में वर्ल्ड कप के शुरुआती मैचों के दौरान भारत ऑस्ट्रेलिया से हार गया था, मीडिया ने इस हार को मिर्च मसाला लगाकर पेश किया, नतीजा ये हुआ कि बंगलौर में द्रविड़ की कार पर पत्थरबाज़ी हुई और कैफ़ के घर पर काला रंग कर दिया गया. श्रीनाथ का कहना था,"सनसनी फैलाने के लिए की जाने वाली पत्रकारिता क्रिकेट को नहीं खिलाड़ियों को भी नुक़सान पहुँचा सकती है." उन्होंने कहा कि मीडिया के जो लोग ये ग़ैर ज़िम्मेदाराना काम कर रहे हैं वो अपना रवैया बदलें. | इससे जुड़ी ख़बरें | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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