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पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त होंगे पर्यवेक्षक | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएस कृष्णमूर्ति भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के चुनाव में पर्यवेक्षक की भूमिका निभाएँगे. समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें पर्यवेक्षक की भूमिका निभाने पर कोई आपत्ति नहीं है लेकिन वे इस बारे में आधिकारिक सूचना की प्रतीक्षा कर रहे हैं. इससे पहले क्रिकेट बोर्ड के वकीलों केके वेणुगोपाल और सोली सोराबजी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि विवाद में उलझे दोनों पक्ष कृष्णमूर्ति के नाम पर सहमत हो गए हैं. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गुरूवार को अदालत इस बारे में निर्देश जारी करेगी कि चुनाव में पर्यवेक्षक की भूमिका, ज़िम्मेदारी और अधिकार क्या होंगे. इस विवाद के बारे में सुप्रीम कोर्ट ने पहले किसी न्यायाधीश को ज़िम्मेदारी सौंपने से इनकार कर दिया था और कहा था कि किसी पूर्व खिलाड़ी को पर्यवेक्षक बनाया जाना चाहिए. 27 सितंबर को भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस आरसी लहोटी ने इस मामले की समय से पहले सुनवाई की अर्ज़ी को ठुकरा दिया था, उन्होंने कहा था कि "यह सिर्फ़ नाक की लड़ाई है." दो गुट सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने जिस नाक की लड़ाई की बात कही है वह दो गुटों के बीच चल रही है, एक तरफ़ आईसीसी और बीसीसीआई के अध्यक्ष रह चुके जगमोहन डालमिया का ख़ेमा है और दूसरी ओर उनके विरोधियों का. बीसीसीआई के मौजूदा अध्यक्ष रणबीर सिंह महेंद्रा डालमिया खेमे के समझे जाते हैं जबकि शरद पवार, राजसिंह डूंगरपुर और आईएस बिंद्रा जैसे लोग उनके ख़िलाफ़ हैं. बीसीसीआई की वार्षिक बैठक में ही नए अध्यक्ष का चुनाव होना था लेकिन दोनों गुटों की आपसी लड़ाई के कारण बैठक ही स्थगित करनी पड़ी थी. बोर्ड के पिछले चुनाव में भी काफ़ी विवाद हुआ था और रणवीर सिंह महेंद्रा को विजयी घोषित किया गया था, शरद पवार को इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था. अब कहा जा रहा है कि शरद पवार एक बार फिर चुनाव मैदान में हो सकते हैं. |
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