|
चुनाव में पूर्व क्रिकेटर को रखने का निर्देश | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सर्वोच्च न्यायालय ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) से कहा है कि वह अपने चुनाव में किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश के बदले सर्वसम्मति से किसी पुराने खिलाड़ी को पर्यवेक्षक नियुक्त करे. न्यायालय ने कहा है कि दोनों पक्ष आपस में चर्चा करके एक पर्यवेक्षक तय करें जो कोई सेवानिवृत जज न हो. सर्वोच्च न्यायालय ने ये निर्देश उस याचिका की सुनवाई के दौरान दिए हैं जिसमें कोलकाता उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी गई थी. इस आदेश में कहा गया था कि उच्च न्यायालय के दो पूर्व मुख्य न्यायाधीश बीसीसीआई के चुनाव के पर्यवेक्षक होंगे. सर्वोच्च न्यायालय ने दोनों पूर्व मुख्य न्यायाधीशों को भी पर्यवेक्षण के कार्य से मुक्त कर दिया है. सर्वोच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति एसबी सिन्हा और न्यायाधीश आरवी रवीन्द्रन वाले दो सदस्यीय पीठ ने कहा है कि यदि बीसीसीआई चाहे तो न्यायालय पूर्व क्रिकेटर का नाम पर्यवेक्षक के रुप में सुझा सकती है. इस मामले की अगली सुनवाई 18 अक्तूबर को होगी. उल्लेखनीय है कि 27 सितंबर को मुख्य न्यायाधीश आरसी लाहोटी ने इस मामले की सुनवाई करने से इनकार करते हुए कहा था कि यह सिर्फ़ अहम की लड़ाई है. राज्य क्रिकेट संघ की ओर से फाली एस नरीमन वकील थे तो बीसीसीआई की ओर से केके वेणुगोपाल, सोली सोराबजी और एएम सिंघवी ने मामला रखा. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||