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कप्तान को कभी-कभी ढील देनी चाहिए | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरभ गांगुली मानते हैं कि टीम में पाँचवें गेंदबाज़ की कमी नहीं है. मानक गुप्ता के साथ ख़ास बातचीत के दूसरे अंश में पढ़िए गांगुली क्या कहते हैं राहुल द्रविड़ की कप्तानी में खेलने के बारे में. सवाल – सौरभ, क्या इस समय भारतीय टीम में पाँचवें गेंदबाज़ की कमी खल रही है क्योंकि त्रिकोणीय सीरीज़ में कमज़ोर गेंदबाज़ी की वजह से ही भारत श्रीलंका से दोनों मैच हार गया. जवाब - मुझे नहीं लगता कि पाँचवें गेंदबाज़ की कमी टीम में है. श्रीलंका से पिछला मैच हमें हारना नहीं चाहिए था. हम तो श्रीलंका से दोनों मैच जीत सकते थे, ख़ासतौर पर दूसरा जब वो 95 पर 6 विकेट खो चुके थे. हम कभी 5 गेंदबाज़ों के साथ नहीं खेले हैं क्योंकि हमारे पास कोई ऑलराउंडर नहीं है. हमारी क़िस्मत ख़राब है कि श्रीलका में हर बार अच्छी गेंदबाज़ी करने वाले सहवाग इस बार चल नहीं पा रहे हैं. आशा करते हैं कि अगले मैच में वो अच्छी बोलिंग करें. सवाल - दम्बुला की बात करें तो वहाँ बल्लेबाज़ों के लिए रन बनाना मुश्किल क्यों हो रहा था? जवाब - मुश्किल पिच है, अलग अलग रफ़्तार से गेंद बल्ले पर आती है. मेरी क़िस्मत अच्छी थी कि मैं पिछले मैच में श्रीलंका के ख़िलाफ़ रन बना पाया, उम्मीद है कि फ़ाइनल में भी बना पाऊँगा. सवाल - क्या सचिन की कमी टीम में खल रही है? जवाब - सचिन और लारा की कमी तो किसी भी टीम में रहेगी. उनके विकल्प होते नहीं हैं और इतने बड़े खिलाड़ी की कमी तो होगी ही. सवाल - क्या भारतीय टीम अब सचिन और सौरभ के बग़ैर खेलने को तैयार है, उनकी कमी झेल पाएगी? जवाब - पता नहीं. मैं इस बारे में कुछ नहीं कह पाऊँगा.
सवाल - टीम में सिर्फ़ एक बल्लेबाज़ की हैसियत से खेलना अलग अनुभव रहा होगा? जवाब – हालात के हिसाब से ख़ुद को ढालना सबकी ज़िम्मेदारी है. जब आप बल्लेबाज़ से कप्तान बनते हैं तो ढालना पड़ता है, जब कप्तान से वापस बल्लेबाज़ बनते हो तो एडजस्ट करना पड़ता है और जब दोबारा कप्तान बनते हैं तो फिर बदलना पड़ता है. मुझे कोई समस्या नहीं हुई. सवाल - राहुल द्रविड की कप्तानी में खेलना कैसा रहा? जवाब - मुझे कोई समस्या नहीं है. चाहे वो राहुल हो, भज्जी हो या वीरू, मुझे किसी की भी कप्तानी में खेलने में परेशानी नहीं है. सवाल - क्या अब आप राहुल को कप्तान की तरह रेट करना चाहेंगे, उनकी कप्तानी में खेल चुके हैं? जवाब - अगर इस बारे मैं कुछ कहूँगा तो विवाद होगा इसलिए मैं इस सवाल को जवाब नहीं दे सकता. सवाल - जो कप्तानी आपसे प्रतिबंध की वजह से छिनी है क्या उम्मीद है वो वापस आएगी? जवाब - ये तो चयनकर्ताओं के ऊपर है.
सवाल - कप्तान पर ज़्यादा दबाव होता है कि वो प्रदर्शन से टीम के लिए उदाहरण बनाए, पर क्या प्रदर्शन के मामले में कप्तान को भी उसी कसौटी पर खरा उतरना चाहिए जिस पर बाक़ी बल्लेबाज़ों को उतरना पड़ता है? जवाब - आप मानें या न मानें, कप्तान पर दबाव ज़्यादा होता ही है. इसीलिए कप्तान का चयन सबसे पहले होता है और उसे समय दिया जाता है. बाहर से कोई कुछ भी बोले, कप्तान की ज़िम्मेदारी अलग ही होती है, जो कप्तान नहीं बना वो कभी नहीं समझ पाएगा. सवाल - तो क्या कप्तान समेत सभी खिलाड़ियों को अच्छे प्रदर्शन के समान मापदंडों पर खरा नहीं उतरना चाहिए? जवाब - सबको प्रदर्शन की समान कसौटी से गुज़रना चाहिए लेकिन कभी कभी कप्तान को ढील देनी चाहिए क्योंकि उसकी ज़िम्मेदारी बहुत ज़्यादा होती है. सवाल – अब तो आप नए कोच ग्रेग चैपल के साथ खेल रहे हैं, क्या कहेंगे उनके बारे में? जवाब – वो इतने महान खिलाड़ी रहे हैं लेकिन उन्हें समय तो देना पड़ेगा जमने के लिए. वो टीम को मेहनत करा रहे हैं. उनके आने के बाद ट्रेनिंग और प्रेक्टिस सेशन भी पहले के मुक़ाबले अलग हो रहे हैं. जब वो जम सजाएँगे तो बहुत अच्छा करेंगे भारतीय क्रिकेट के लिए. सवाल - चैपल किस तरह जॉन राइट से अलग हैं? जवाब - हर आदमी अलग होता है, सब का सोचने का तरीक़ा अलग होता है. जैसे मैं खेलता हूँ राहुल नहीं खेल सकता और जैसा राहुल खेलता है वैसा मैं नहीं खेल सकता. उसी तरह हर कोच का तरीक़ा अलग होता है. |
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